लखनऊ, [राज्य ब्यूरो]। कोरोना की बढ़ती रफ्तार ने हर तरफ चिंता की लकीरें खींची हैं। कारागार प्रशासन भी इससे अछूता नहीं है। सूबे की जेलों को काेरोना के कहर से बचाने के लिए हर जिले में अस्थायी जेल वजूद में लाने की कसरत शुरू कर दी गई है। जेलों में मास्क और सैनिटाइजर बनाने, बंदियों को काढ़ा देने व योगाभ्यास कराने के निर्देश भी दिए गए हैं। कोरोना संक्रमण के चलते मार्च 2020 से ही जेलों में मुलाकात बंद है।

डीजी जेल आनन्द कुमार ने सभी जेल अधीक्षकों को जिला प्रशासन की मदद से अस्थाई जेलों को शुरू कराने का निर्देश दिया है। बीते दिनों कोरोना संक्रमण के चलते सूबे में अस्थायी जेलों की व्यवस्था शुरू की गई थी, जो काफी कारगर साबित हुई थी। स्थायी जेलों मेें कोरोना संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए मार्च 2020 मेें लॉकडाउन के दौरान शासन ने अस्थायी जेल बनाने के निर्देश दिए थे। सूबे की 64 जिला जेलों के बंदियाें को संक्रमण से बचाने के लिए 83 अस्थाई जेल बनाई गई थीं। अस्थायी जेल में बंदियों को 14 दिनों तक रखने के कोविड रिपोर्ट निगेटिव आने पर उन्हें स्थायह जेलों में भेजे जाने की व्यवस्था थी।

स्थायी जेलों में भी नए आए बंदियों को 14 दिन अलग रखने के बाद दूसरे बंदियों के बीच भेजने के निर्देश थे। स्कूल-कालेज, हास्टल, चिकित्साल व ऐसे अन्य स्थानों काे अस्थायी जेल बनाया गया था। हालांकि बाद में अस्थायी जेलों के बंद होने का सिलसिला भी शुरू हो गया था। वर्तमान में 48 अस्थायी कारागार क्रियाशील हैं, जहां नए बन्दियों को सीधे जेलों में दाखिल करके आइसोलेशन में रखा जाने लगा जो अब तक जारी है। जबकि 11 फरवरी 2021 को सूबे में 35 अस्थायी कारागार ही क्रियाशील रह गए थे, जिनमें 4319 बंदी निरुद्ध थे। बढ़ते कोरोना संक्रमण को देखते हुए जेल अधीक्षकों ने अस्थायी कारागारों की व्यवस्था को शुरू करने की मांग की थी। कारागार मुख्यालय के अधिकारियों का कहना है कि वर्तमान में 43 जिलों में 48 अस्थायी कारागार वजूद में हैं, जहां करीब 3500 बंदी निरुद्ध हैं।

16144 बंदियों को लगा टीका : सूबे की जेलों में 45 वर्ष से अधिक आयु के 23432 बंदी हैं, जिनमें 16144 बंदियों को कोरोना का टीका लगवाया जा चुका है। जेलों में कुल करीब 1.12 लाख बंदी हैं।

वीडियो कांफ्रेंसिंग से ही हो पेशी : अपर मुख्य सचिव गृह अवनीश कुमार अवस्थी ने स्थायी व अस्थायी कारागारों में निरुद्ध बंदियों की कोरोना जांच कराए जाने के साथ ही दोषसिद्ध व विचाराधीन बंदियों की पेशी वीडियो कांफेंसिंग के जरिए ही कराने के निर्देश दिया है। कहा है कि अधिकारी इसके लिए जिला जज से लिखित अनुरोध करें व इस व्यवस्था को सुनिश्चित कराए।  

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