नई दिल्ली, पीटीआइ। सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश स्थित धामपुर शुगर मिल्स लिमिटेड की चार इकाइयों पर 20 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाने के राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण (एनजीटी) के आदेश पर रोक लगा दी है। एनजीटी ने पर्यावरण नियमों के लगातार उल्लंघन को लेकर यह जुर्माना लगाया था। जस्टिस इंदिरा बनर्जी और जेके माहेश्वरी की पीठ ने धामपुर चीनी मिल की अपील पर केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी), केंद्रीय भूमि जल प्राधिकरण (सीजीडब्ल्यूए), उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (यूपीपीसीबी) और अन्य को नोटिस जारी किया है।

पीठ ने कहा, 'नोटिस जारी कीजिए, जिसका जवाब छह सप्ताह में दिया जाए। इस बीच, प्रत्येक इकाई पर पांच-पांच करोड़ रुपये के जुर्माने के भुगतान तथा प्रतिवादी संख्या एक से तीन तक (धामपुर शुगर मिल्स लिमिटेड) द्वारा दिए जाने वाले 10 लाख रुपये के शुल्क संबंधी आदेश पर स्थगन रहेगा।'

शीर्ष अदालत ने अपने आदेश में यह भी कहा कि नुकसान के आकलन के लिए एनजीटी की ओर से गठित की गई समिति छह सप्ताह की अवधि तक कोई और कदम नहीं उठाएगी। कंपनी ने एनजीटी के आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर की थी।

एनजीटी ने सीपीसीबी और यूपीपीसीबी द्वारा दाखिल विभिन्न निरीक्षण रिपोर्टो का अध्ययन करने के बाद कहा था कि पर्यावरण को लंबे समय तक नुकसान पहुंचा है। एनजीटी ने धामपुर शुगर मिल्स की जिला संभल स्थित धामपुर शुगर मिल्स, जिला बिजनौर स्थित धामपुर शुगर मिल्स और जिला बिजनौर स्थित धामपुर डिस्टिलरी यूनिट के साथ ही धामपुर शुगर मिल्स, मीरगंज, जिला बरेली पर पांच-पांच करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया था।

इसने निर्देश दिया था कि जुर्माने का भुगतान एक सितंबर, 2021 से 30 दिन के भीतर किया जाना चाहिए। एनजीटी ने पर्यावरण को पहुंचे नुकसान का विस्तृत अध्ययन करने के लिए सीपीसीबी, यूपीपीसीबी और संबंधित जिलाधिकारियों की एक समिति भी गठित की थी।