यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Feb 26, 2024 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
सु्प्रीम कोर्ट ने HC के पोस्टिंग के आदेश खिलाफ याचिका पर लगाया 1 लाख रुपये का जुर्माना, कहा- ऐसी याचिकाएं करती हैं कोर्ट का समय बर्बाद
शीर्ष कोर्ट ने कहा- हमने ऐसी कई विशेष अनुमति याचिकाएं देखी हैं जो केवल नोटिस जारी करने स्थगन देने या ...और पढ़ें

HighLights
- सुप्रीम कोर्ट ने कहा- इस तरह की याचिकाएं करती हैं अदालत का समय बर्बाद, लंबित मामले बढ़ाती हैं
- इलाहाबाद HC ने पदोन्नति से संबंधित मामले को अप्रैल के लिए किया था सूचीबद्ध, आदेश को दी गई थी चुनौती
नई दिल्ली, प्रेट्र। सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को एक याचिकाकर्ता पर इलाहाबाद हाई कोर्ट के उस आदेश को चुनौती देने के लिए अपील दायर करने पर एक लाख रुपये का जुर्माना लगाया जिसने नोटिस जारी करने के बाद पदोन्नति से संबंधित उसकी याचिका स्थगित कर दी थी। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इस तरह की याचिकाएं न सिर्फ अदालत का समय बर्बाद करती हैं बल्कि लंबित मामलों को भी बढ़ाती है।
जस्टिस बीआर गवई, जस्टिस राजेश बिंदल और जस्टिस संदीप मेहता की तीन न्यायाधीशों की पीठ ने नोटिस जारी करने या स्थगन देने के हाई कोर्ट के आदेशों के खिलाफ अपील दायर करने की प्रथा पर नाराजगी व्यक्त की।
शीर्ष कोर्ट ने कहा- ''हमने ऐसी कई विशेष अनुमति याचिकाएं देखी हैं जो केवल नोटिस जारी करने, स्थगन देने या अंतरिम संरक्षण देने से इन्कार करने वाले आदेशों के खिलाफ दायर की गई हैं। ऐसी याचिकाएं कानून की प्रक्रिया के दुरुपयोग के अलावा और कुछ नहीं हैं और ये अदालत का कीमती समय बर्बाद करती हैं और लंबित मामलों को बढ़ाती हैं।''
शीर्ष अदालत ने निर्देश दिया कि एक लाख की जुर्माना राशि सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन और हाई कोर्ट के एडवोकेट्स आन रिकार्ड एसोसिएशन में जमा की जाए।इस मामले में याचिकाकर्ता ने उस आदेश को रद करने की याचिका के साथ हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था जिसमें पदोन्नति के लिए उसका मामला खारिज कर दिया गया था।
हाई कोर्ट ने 18 जनवरी, 2024 को एक नोटिस जारी किया जिसमें कहा गया कि मामले पर विचार की आवश्यकता है और इसे आठ अप्रैल से शुरू होने वाले सप्ताह के लिए सूचीबद्ध किया जाता है।
