लखनऊ, जेएनएन। उत्तर प्रदेश सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड ने अयोध्या में आवंटित की गई पांच एकड़ जमीन पर मस्जिद निर्माण के लिए बुधवार को इंडो इस्लामिक कल्चरल फाउंडेशन ट्रस्ट के नौ सदस्यों के नामों की घोषणा कर दी है। इसमें मुस्लिम समाज के प्रबुद्ध वर्ग व जानी-मानी हस्तियों को शामिल किया जाएगा। यह ट्रस्ट अयोध्या में मिली पांच एकड़ भूमि पर मस्जिद, अस्पताल, रिसर्च सेंटर सहित अन्य जरूरी सुविधाओं का निर्माण करेगा। यह ट्रस्ट कुल 15 सदस्यीय है, जिसमें छह सदस्यों को बाद में यह ट्रस्ट खुद नामित करेगा।

सुन्नी वक्फ सेंट्रल बोर्ड के अध्यक्ष जुफर अहमद फारूकी सहित पूरे बोर्ड का कार्यकाल 31 मार्च को पूरा हो गया था। उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने पूरे बोर्ड को पिछले दिनों छह महीने का विस्तार दिया था। श्रीराम जन्मभूमि विवाद में सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले के बाद बोर्ड ने अयोध्या में मिली पांच एकड़ भूमि स्वीकार करते हुए इस पर मस्जिद, रिसर्च सेंटर, लाइब्रेरी एवं अस्पताल सहित अन्य जन सुविधाएं विकसित करने के लिए इस साल फरवरी में ही इंडो इस्लामिक कल्चरल ट्रस्ट का गठन किया था। उस समय ट्रस्ट के सदस्यों के नामों की घोषणा नहीं हुई थी।

इंडो इस्लामिक कल्चरल ट्रस्ट में 15 सदस्यों को शामिल किया जाना है, जिसमें से अध्यक्ष सहित नौ सदस्यों की घोषणा बुधवार को कर दी गई। बोर्ड के चेयरमैन जुफर अहमद फारूकी ने बताया कि इसमें वह खुद मुख्य ट्रस्टी व अध्यक्ष होंगे। बोर्ड के सीइओ संस्थापक ट्रस्टी रहेंगे। लखनऊ के अतहर हुसैन को सचिव बनाया गया है। इसके अलावा गोरखपुर के अदनान फारुख शाह, मेरठ के फैज आफताब, लखनऊ के मो. जुनैद सिद्दीकी, बांदा के शेख सैदुज्जमां, लखनऊ के मो. राशिद व इमरान अहमद शामिल हैं। इनके साथ ही मस्जिद निर्माण ट्रस्ट के सचिव अतहर हुसैन ट्रस्ट का आधिकारिक प्रवक्ता भी बनाया है। 

ट्रस्ट के सचिव व प्रवक्ता अतहर हुसैन ने बताया कि इंडो इस्लामिक कल्चरल ट्रस्ट का गठन पुराने सभी विवादों को खत्म कर कुछ नया व सकारात्मक करने के लिए हुआ है। इसी कोशिश में यह ट्रस्ट काम करेगा। अयोध्या में मिली पांच एकड़ भूमि पर इंडो इस्लामिक सभ्यता का ऐसा प्रमुख केंद्र बिंदु होगा जिसकी पूरे विश्व में सकारात्मक चर्चा होगी। उन्होंने बताया कि कोरोना संक्रमण के कारण फिलहाल कोई बैठक नहीं रखी गई है। जल्द ही ट्रस्ट अपनी औपचारिकताएं पूरी कर अयोध्या में मानव कल्याण की कुछ अच्छी पहल करेगा। 

सुप्रीम कोर्ट ने पिछले साल नौ नवंबर को श्रीराम जन्मभूमि विवाद में फैसला सुनाते हुए विवादित स्थल पर श्रीराम मंदिर का निर्माण करने और मुस्लिमों को मस्जिद के निर्माण के लिए अयोध्या में किसी अन्य स्थान पर पांच एकड़ जमीन देने का आदेश दिया था। इसके अनुपालन में अयोध्या जिले की सोहावल तहसील स्थित धन्नीपुर गांव में पांच एकड़ जमीन सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड को दी गई थी। इस पांच एकड़ भूमि पर अस्पताल, विद्यालय, इस्लामिक कल्चरल गतिविधियां बढ़ाने वाले संस्थान और लाइब्रेरी बनाने के साथ ही सामाजिक गतिविधियां बढ़ाने वाले कार्यक्रम संचालित होंगे। इस फाउंडेशन के जरिए सुन्नी वक्फ बोर्ड हिंदू और मुस्लिमों के बीच सामंजस्य बनाने के कार्यक्रम भी चलाएगा।

बता दें कि अयोध्या केस पर सुप्रीम कोर्ट के फैसला आने के बाद यूपी सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष जुफर फारूकी ने कहा था कि वह न्यायालय के निर्णय का स्वागत करते हैं और बोर्ड का इस फैसले को चुनौती देने का कोई विचार नहीं है। केंद्र के राम मंदिर ट्रस्‍ट को मंजूरी देने के बाद अब उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने अयोध्‍या से करीब 22 क‍िमी दूर रौनाही में सुन्‍नी वक्‍फ बोर्ड को 5 एकड़ जमीन देने का एलान किया। रौनाही अयोध्‍या के मुख्‍य मंदिर क्षेत्र के दायरे में नहीं आता है और मुस्लिम बहुल क्षेत्र है।

फिलहाल कृषि विभाग के पास है भूमि : अयोध्या के ब्लॉक सोहावल की ग्राम पंचायत धन्नीपुर में मिली पांच एकड़ भूमि फिलहाल कृषि विभाग के पास है। कृषि विभाग इस पर भूमि पर धान की रोपाई करा चुका है। हालांकि वक्फ बोर्ड को भूमि देने के जिला प्रशासन के प्रस्ताव को शासन की मंजूरी भी मिल चुकी है। जिला कृषि अधिकारी बीके सिंह के अनुसार तहसील कर्मचारी जैसे पैमाइश करके भूमि अलग करा देंगे, विभाग कब्जा तत्काल छोड़ देगा।

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