लखनऊ(जागरण संवाददाता)। राजधानी के तेलीबाग में खरिका स्थित सर्वागीण विकास पब्लिक इंटर कॉलेज में एक छात्र के शैक्षिक भविष्य से खिलवाड़ किए जाने का खुलासा हुआ है। आइसीएसई बोर्ड के इस स्कूल में नौवीं से 11वीं तक छात्र को पढ़ाया गया और फिर 11वीं की परीक्षा देने से पहले दसवीं में यूपी बोर्ड के दूसरे स्कूल का परीक्षार्थी बना दिया गया। छात्र से कहा गया कि उसके दसवीं में नंबर बढ़वाने के लिए उसका दूसरे स्कूल से फॉर्म भराया गया है। मामले में शक होने पर छात्र के अभिभावक ने विरोध किया तो स्कूल ने उन्हें बाहर कर दिया। शिकायत पर उप मुख्यमंत्री डॉ.दिनेश शर्मा ने जाच के आदेश दिए। जिला विद्यालय निरीक्षक (डीआइओएस) ने मामले की जाच के बाद स्कूल को छात्र के साथ धोखाधड़ी कर उसके तीन शैक्षिक वर्ष खराब करने का दोषी पाया है। साथ ही स्कूल के विरुद्ध एफआइआर की संस्तुति के साथ ही मान्यता प्रत्याहरण की कार्रवाई की भी संस्तुति की है। जाच में पकड़े गए: डिप्टी सीएम डॉ. दिनेश शर्मा के निर्देश पर डीआइओएस ने जाच में पाया कि कविता ने 26 अप्रैल 2015 में विद्यालय में प्रवेश लिया था और समय-समय पर सभी शुल्क जमा किए। डीआइओएस ने बताया कि स्कूल ने जाच में माना कि कविता का दसवीं का प्रवेश पत्र बोर्ड से नहीं आया था, इसलिए उसे परीक्षा नहीं दिलाई गई। स्कूल ने तर्क दिया कि उसने छात्र के अभिभावक को जानकारी देकर टीसी भी जारी कर दी थी। हालाकि स्कूल यह नहीं बता पाया कि जब अभिभावक को जानकारी देकर टीसी जारी कर दी गई थी तो फिर छात्र से 11वीं की फीस कैसे वसूल ली गई। अभिभावक द्वारा पेश की गईं फीस रसीदों से झूठ का खुलासा हो गया। डीआइओएस ने छात्र के बहुमूल्य 3 वर्ष खराब करने के आरोप में आइसीएसई/आइएससी बोर्ड नई दिल्ली से स्कूल की मान्यता प्रत्याहरण किए जाने की संस्तुति की है। उनके अनुसार जिस महाकाली इंटर कॉलेज से छात्र को जालसाजी कर दसवीं की परीक्षा देने को कहा जा रहा था, वह यूपी बोर्ड का है।

ऐसे हुआ खेल:

डीआइओएस के अनुसार छात्र कविता ने सत्र 2015-16 में तेलीबाग स्थित सर्वागीण विकास पब्लिक इंटर कॉलेज में नौवीं में दाखिला लिया था। अभिभावक के अनुसार वर्ष 2016 में नौवीं की परीक्षा के बाद 2017 में उसे आइसीएसई बोर्ड की दसवीं परीक्षा देनी थी, लेकिन परीक्षा शुरू होने तक कॉलेज ने उसे प्रवेश पत्र नहीं दिया। गुमराह करके प्रवेश पत्र बाद में देने की बात कही और उसे दूसरी पाली में बुलाकर बिना रोल नंबर एलॉट किए परीक्षा दिला दी। परीक्षा के बाद स्कूल में बताया गया कि कविता अच्छे नंबरों से पास हो गई है। इंटर में रजिस्ट्रेशन के लिए रिजल्ट कार्ड की जरूरत बताकर उसे रिजल्ट भी नहीं दिया गया। साथ ही 11वीं दाखिला दे दिया गया और फीस भी जमा करा ली गई। छात्र 11वीं की पढ़ाई करती रही, लेकिन उसे पता नहीं चला कि वह दसवीं में फेल है। बाद में 11वीं की परीक्षाएं फरवरी 2018 में शुरू होने से पहले छात्र से कहा गया कि उसके नंबर बढ़वाने हैं, इसलिए उसे महाकाली इंकॉ., हरिहरपुर नीलमथा में कक्षा दस की परीक्षा देने होगी। अभिभावक ने इसका विरोध किया, तो स्कूल प्रशासन ने उन्हें निकाल दिया।

Posted By: Jagran

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