लखनऊ, जेएनएन। इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ ख्ंडपीठ ने राज्य कर्मचारियों की हड़ताल को अवैध घोषित कर दिया है। इस बीच हड़ताल अवैध ठहराने, कर्मचारियों की सभा से पहले पुलिस द्वारा कुर्सियां व टेंट उठा ले जाने और दिन में कई राउंड बारिश होने के बावजूद राज्य कर्मचारियों व शिक्षकों की हड़ताल गुरुवार को दूसरे दिन भी जारी रही। कर्मचारियों ने शुक्रवार से हड़ताल का दायरा बढ़ाने और पुरानी पेंशन बहाल होने तक आंदोलन जारी रखने का निर्णय लिया है।

कर्मचारी, शिक्षक, अधिकारी-पुरानी पेंशन बहाली मंच के आह्वान पर पुरानी पेंशन बहाली के लिए छह फरवरी से शुरू हुई हड़ताल के दूसरे दिन कर्मचारियों ने बड़े पैमाने पर कामकाज प्रभावित होने का दावा किया। मंच के संयोजक हरिकिशोर तिवारी ने बताया कि प्रदेश के करीब 7500 कार्यालयों में बंदी की स्थिति बनी रही। लखनऊ में कर्मचारियों की सभा बेसिक शिक्षा अधिकारी कार्यालय आयोजित की गई। हालांकि सभा के लिए गुरुवार को जब कर्मचारी नेता पहुंचे तो उन्हें न कुर्सियां मिलीं न टेंट दिखा, जबकि बुधवार रात वे इसकी व्यवस्था करके गए थे। पता चला कि पुलिस ने सब-कुछ हटवा दिया। 

कर्मचारी नेताओं और पुलिस के बीच इसे लेकर झड़प भी हुई। हालांकि जब तक कुर्सियां आती, बारिश शुरू हो गई और सभा खत्म हो गई। हालांकि किसी अन्य जिले से टकराव की सूचना नहीं आई है। लखनऊ में हुई सभा में कर्मचारी नेताओं ने दो दिन की हड़ताल से 2100 करोड़ रुपये का नुकसान होने का दावा किया है। कार्यालयों की मॉनीटङ्क्षरग के लिए जिलों में निकली टोलियों ने भी हड़ताल के पूरी तरह सफल रहने और दफ्तरों में कामकाज ठप रहने की जानकारी दी। हड़ताल के दौरान सभाओं में कर्मचारी नेताओं ने चेतावनी दी कि अब वार्ता नहीं, उन्हें समाधान चाहिए। पुरानी पेंशन बहाली मंच के बैनर तले हड़ताली कर्मचारियों की सभा शुक्रवार को लखनऊ के उद्यान भवन में होगी। 

जेल भरो आंदोलन करेंगे

संयुक्त संघर्ष संचालन समिति ने पुरानी पेंशन के लिए 18 फरवरी को जेल भरो आंदोलन की चेतावनी दी है। समिति के अध्यक्ष एसपी तिवारी ने कहा कि पुरानी पेंशन का विकल्प नई पेंशन योजना नहीं है। उधर, विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति ने भी हड़ताल को समर्थन दिया है। 

बजट से निराशा

पेंशन योजना में अंशदान के लिए सरकार द्वारा बजट में 10,500 करोड़ रुपये का प्रस्ताव न आने पर कर्मचारियों ने निराशा व्यक्त की है। इसी तरह कर्मचारियों के लिए कैशलेस इलाज की सुविधा के लिए व्यवस्था न किए जाने पर भी कर्मचारियों ने नाराजगी जताई है। 

हड़ताल अवैध घोषित

इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ ख्ंडपीठ ने राज्य कर्मचारियों की हड़ताल को अवैध घोषित कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि न तो कोई कर्मचारी यूनियन हड़ताल करेगी और न ही किसी कर्मचारी को हड़ताल के लिए प्रेरित करेगी। कोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि यदि कोई कर्मचारी या यूनियन हड़़ताल पर जाती है तो उसके खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जाए। कर्मचारियों की हड़ताल पर सख्ती करने के साथ कोर्ट ने उनकी मांगों के प्रति सहानुभूति दिखाते हुए सरकार को आदेश दिया कि कर्मचारियों की मांगों पर विचार किया जाए।

यह आदेश जस्टिस देवेंद्र कुमार अरोड़ा व जस्टिस अजय भनोट की बेंच ने राजीव कुमार की ओर से दायर याचिका पर दिया है। याचिका में कहा गया है कि याची के माता, पिता और पत्नी बीमार रहते हैं। इन्हें चिकित्सीय सुविधाएं दिलाना आवश्यक है लेकिन, राज्य कर्मचारियों के छह से 12 फरवरी के बीच हड़ताल पर जाने से वह बीमार परिवारीजन को चिकित्सीय सुविधाएं नहीं दिला पा रहे हैं। इस समय बच्चों की परीक्षाएं भी चल रही हैं। हड़ताल के कारण इसमें भी व्यवधान पड़ेगा। इसलिए हड़ताल को अवैध घोषित किया जाए। राज्य सरकार की ओर से महाधिवक्ता राघवेंद्र सिंह ने कोर्ट को बताया कि सरकार हड़ताल पर सख्त है और सिर्फ दस प्रतिशत कर्मचारियों के हड़ताल पर जाने की सूचना है।

इसके बाद बेंच ने हड़ताल के खिलाफ सख्त कदम उठाते हुए कहा कि हर सरकारी विभाग में सीनियर अफसर कर्मचारियों की अटेंडेंस लें। यदि कोई धरना प्रदर्शन होता है तो उसकी वीडियोग्राफी कराएं। कोर्ट ने हड़ताल के खिलाफ की गई कार्रवाई के संबंध में सरकार को एक माह के भीतर रिपोर्ट पेश करने का आदेश दिया है।

 

Posted By: Nawal Mishra

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