लखनऊ[महेन्द्र पाण्डेय]। चाशनी मा गोली बनै लाग बेटवा..अब सांचा मा भरि देव। मां का आदेश मिलते ही बेटा भट्ठी पर पक रही चाशनी से भरा दौरा (बर्तन) उतारता है और तश्तरी में क्रम से रखे सांचे में उसे भरने लगता है। दीपावली के दौरान शहर में हर मिष्ठान की दुकानों पर मिलने वाली शक्कर (चीनी) से बने खिलौने (मिठाई) इन दिनों सआदतगंज के हलवाइयों (मिठाई के कारीगर) के यहां सांचों में आकार ले रहे हैं। दरअसल, दीपावली पर्व पर परंपराओं से जुड़ी यह खिलौनों वाली मिठाई बच्चों ही नहीं बड़ों के भी मन को भाती है। दीपों के पर्व पर इसकी विशेष मांग रहती है इसलिए पैतृक कारोबारी दीपावली के अवसर पर हर काम छोड़ कर यह मिठाई अवश्य बनाते हैं। 

तीन पीढ़ियों से चल रहा मिठाई का कारोबार

सआदतगंज निवासी सोनू भट्ठी पर दौरा में चाशनी पका रही कामिनी कहती हैं, उनकी तीन पीढ़ियों से चीनी की मिठाइयां बनाने काम हो रहा है। बाबा के बाद पिता और फिर बेटा सोनू इस पैतृक कार्य को संजोए हुए हैं। कामिनी के साथ उनकी बहू मीरा भी उनका हाथ बंटाती हैं। सोनू बताते हैं कि इस व्यवसाय में अब फायदा नहीं रहा। एक बार चीनी के खिलौने नहीं बनाया तो लोग कहने लगे, का हो बाबा बंद कर दियो बाबा की दुकान? यह तंज सुनकर सोनू ने ठान लिया की पैतृक पेशे को अब कभी बंद नहीं रखेंगे।

15 किलोग्राम चीनी में आठ लीटर पानी

सोनू बताते हैं कि 15 किलोग्राम चीनी में आठ लीटर पानी मिलाते हैं। चीनी घुलने के बाद उसे 15 मिनट पकाते हैं। भट्ठी से चाशनी का दौरा उतारने के तुरंत बाद उसमें दो चुटकी सल्फ्यूरिक एसिड मिलाते हैं। इससे चाशनी तुरंत नहीं जमती।

 

80 रुपया किलो है भैया 

सआदतगंज निवासी सोनू भट्ठी पर दौरा में चाशनी पका रहे हैं। करीब 15 मिनट बाद चाशनी का एक पाग तैयार होता है। इसके बाद वह तश्तरी में रखे सांचे में उसे भरते हैं। इसी बीच दौरा में दूसरा पाग गर्म होने लगता है। उधर, सोनू की मां कामिनी गर्म चाशनी को पलटे से चलाने में व्यस्त हैं। इसी बीच ग्राहक दस्तक देता है..क्या भाव है चल रहा है भई.खिलौनों का? भैया 80 रुपया किलो। बहुत महंगा है हो..। यह सुनकर सोनू से रहा नहीं गया। बोल पड़े..यह जमाना मा सस्ता काव है भैया। खैर, ग्राहक भाव जानने के बाद फिर आने की बात कहकर चला जाता है। बातचीत के बीच सोनू दौरा से चाशनी सांचे में भर चुके होते हैं। इसके बाद उनकी पत्‍नी मीरा की ड्यूटी शुरू हो जाती है। वह अहिस्ता..अहिस्ता सांचे को अलग कर उसमें भरी मिठाइयां तसले में रखती जाती हैं। यह क्रम हर 15 मिनट में दोहराता रहता है। 

 

Posted By: Anurag Gupta

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