लखनऊ[कुसुम भारती]। आजकल बहुत से ऐसे युवा हैं, जो पढ़ाई या नौकरी के चलते घर से बाहर रहते हैं। ऐसे में, मजबूरी या शौकिया तौर पर वो घरेलू कामकाज में इतने माहिर हो जाते हैं कि यह उनकी जिंदगी का हिस्सा बन जाता है। हालाकि, लाइफ पार्टनर के रूप में आज लड़किया ऐसा प्रिंस चार्मिंग चाहती हैं, जो कुकिंग के साथ घर के बाकी कामों में भी माहिर हो। ताकि, शादी के बाद दोनों मिलकर गृहस्थी की गाड़ी को खींचे नहीं बल्कि असानी से चला सकें। दैनिक जागरण ने इस विषय पर युवाओं से बातचीत की, जो आपको बता रहा है। कुछ यूं सामने आई.. आदत में शुमार हो गया घर का काम

पिछले 18 साल से घर से दूर रह रहे कानपुर के संजय कुमार इस दूरी को मजबूरी मानते हैं। वह कहते हैं, भले दूर रहने पर युवा आत्मनिर्भर हो जाते हैं, पर कई बार ऐसी दिक्कतों का भी सामना करना पड़ जाता है कि घर से दूर होना बहुत खलता है। लखनऊ में अपना व्यवसाय शुरू करने के लिए सबसे पहले रहने का ठिकाना बनाया। एक कमरा किराए पर लिया। छोटा सा कमरा था इसलिए साफ-सफाई खुद ही करने लगा। बाहर का खाना अच्छा नहीं लगता था, इसलिए स्वयं बनाना शुरू किया। घर का कामकाज धीरे-धीरे आदत में शुमार हो गया फिर ये जिंदगी का हिस्सा बन गए। अब तो जब भी घर जाता हूं परिवार को अपने हाथ के बनी नई-नई डिश खिलाकर खुश करता हूं। इस तरह उनके साथ अच्छा टाइम पास भी हो जाता है। कुछ उनकी और कुछ अपनी कहने का मौका भी मिल जाता है।

अब तो सब्जी खुद बनाता हूं

इलाहाबाद हाईकोर्ट में क्रिमिनल लॉयर, संतोष पाडेय कुकिंग में इतने माहिर हो चुके हैं कि हर कोई उनकी तारीफ करता है। छुट्टियों में जब वह परिवार से मिलने बस्ती जाते हैं तो कुकिंग खुद ही करते हैं। खासतौर से सब्जी वह खुद बनाना पसंद करते हैं। वह कहते हैं, पहले पढ़ाई और अब हाईकोर्ट में प्रैक्टिस के चलते पिछले 20 सालों से इलाहाबाद में हूं। करीब 15 साल हॉस्टल लाइफ में गुजरे हैं। इस दौरान खाना बनाने से लेकर बर्तन और कपड़े धोना, घर की साफ-सफाई और दूसरे भी छोटे-मोटे काम कर लेता हूं। मुझे घर के कामकाज करने में कोई शर्म नहीं आती है बल्कि मैं तो खुश होता हूं। मेरे बड़े भाई पुलिस की नौकरी में हैं वह भी घर से दूर रहते हैं पर उन्हें ये सारे काम नहीं आते और न ही वह करना पसंद करते हैं। यह तो अपना-अपना नजरिया है। समाज में पुरुष सत्ता आज भी हावी है इसीलिए कुकिंग और घर के कामकाज को लेकर रूढि़वादी कुछ लोगों की सोच आज भी नहीं बदली है। पर, युवा अब इस बात को समझ रहे हैं। लड़कों में बचपन से डालें आदत

आज पति-पत्‍‌नी दोनों नौकरी करते हैं और शाम को ऑफिस से आने के बाद दोनों ही थके होते हैं। फिर केवल पत्‍‌नी से ही किचन के काम की उम्मीद क्यों की जाए वह भी तो थकी होती है। यदि दोनों मिलकर काम करते हैं तो न केवल काम बंट जाता है बल्कि जल्दी भी हो जाता है। कुछ इस तरह के विचार हैं, दि राइटर्स हब के डायरेक्टर, निखिल शर्मा के। वह कहते हैं, शादी के बाद मैं अपनी पत्‍‌नी का किचन में जरूर हाथ बटाऊंगा। मुझे तो वैसे भी घर के काम करने की आदत है क्योंकि बचपन से ही मम्मी ने सिखाया है। संडे को पापा भी मम्मी के लिए स्पेशल डिश बनाते हैं। चूंकि, मेरी कोई बहन नहीं है इसलिए मम्मी मुझसे और मेरे बड़े भाई से घर के काम लेती थी। यही अनुभव 2014 में बीटेक के दौरान हॉस्टल लाइफ में मेरे काम आया। मेरे चार दोस्त थे और सबका काम बंटा हुआ था। एक सब्जी लाने से लेकर काटने का काम करता था, तो दूसरा दाल-चावल बनाता था। तीसरे की जिम्मेदारी बर्तन धोने और सफाई थी। मैं रोटिया बनाता था। इस तरह से हम चारों मिलकर एन्ज्वॉय करते हुए सब काम निपटाते थे।

काम में बहनों की करता हूं मदद

एमिटी यूनिवर्सिटी में, मासकॉम डिपार्टमेंट में सिनेमैटोग्राफर कम एडिटर, राजन मिश्रा कहते हैं, पति-पत्‍‌नी एक-दूसरे के पूरक हैं इसलिए दोनों को एक-दूसरे का साथ देना चाहिए। बेटा-बेटी एक समान का नारा जो हम देते हैं उसकी शुरुआत हमें घर से ही करनी चाहिए। बचपन से ही बच्चों में यह आदत डालें ताकि किसी काम को लेकर मेरा-तुम्हारा वाली भावना न रहे। पिछले आठ साल से पढ़ाई और अब नौकरी के चलते मैं घर से दूर हूं। इस दौरान मैंने बहुत कुछ सीखा है। बाहर रहकर मैंने सबसे पहले खाना बनाना और फिर घर के लगभग सभी काम सीख लिए। जब भी अपने घर गोंडा जाता हूं तो किचन में अपनी बहनों की मदद जरूर करता हूं।

सोशल साइट्स की लेता हूं मदद

लखनऊ में एक निजी कंपनी में ग्राफिक डिजाइनर व वीडियो एडिटर, राजन कहते हैं, इंटर के बाद 2015 में डिप्लोमा कोर्स करने लखनऊ आ गया। कोर्स पूरा होने के बाद जॉब प्लेसमेंट के जरिए मुझे नौकरी मिल गई। इसी महीने प्रमोशन भी हो गया है। बतौर टीम लीडर ग्रेटर नोएडा ट्रासफर हो गया है। मैंने पढ़ाई के दौरान किराए पर कमरा लिया। उस वक्त मेरा दोस्त भी साथ रहता था। बाहर का खाना अच्छा नहीं लगता था इसलिए खुद खाना बनाना सीखा। खाना बनाने में फेसबुक और यूट्यूब से मुझे खूब मदद मिली। आज भी स्पेशल डिश बनाने के लिए मैं सोशल साइट्स और फूड चैनल की मदद लेता हूं। मेरा खुद का मानना है कि आज हसबैंड-वाइफ दोनों वर्किंग होते हैं। ऐसे में, दोनों को मिलकर घर के काम करने चाहिए। जितनी मेहनत पति ऑफिस में करता है पत्‍‌नी भी उतनी मेहनत करती है। फिर घर के कामों को लेकर सिर्फ पत्‍‌नी से ही अपेक्षा की जाए, यह सही नहीं है। शादी के बाद मैं तो अपनी पत्‍‌नी की पूरी हेल्प करूंगा।

कामकाजी हो मेरा प्रिंस चार्मिंग

केमिकल इंजीनियरिंग कर रहीं नम्रता उप्रेती कहती हैं, हमेशा से ही पढ़ाई में लगे रहने के कारण अपने प्रिंस चार्मिंग के बारे में कभी ज्यादा सोचा नहीं। मगर, मैं चाहतीं हूं कि मेरा साथी ऐसा हो जो हर कदम पर मेरा साथ दे और मेरे सपनों को पूरा करने में मेरा सहयोग करे। आज के दौर में हर लड़की चाहती है कि उसका प्रिंस चार्मिंग ऐसा हो जो न केवल करियर में बल्कि किचन में भी हाथ बटाएं। मैं भी एक ऐसा ही परफेक्ट पार्टनर चाहती हूं।

पेरेंट्स को भी दे सम्मान

हैदराबाद से एमटेक कर रहीं शौर्य मोहन कहती हैं, मेरा प्रिंस चार्मिंग ऐसा हो जो कुकिंग में तो एक्सपर्ट हो, मगर मेरे माता-पिता का भी सम्मान करे। साथ ही मेरे हर फैसले को पूरा सम्मान दे। हमेशा मुझे आगे बढ़ाने को मोटिवेट करे। मेरे सपनों को पूरा करने में मेरी मदद करे। जब एक लड़की से शादी के बाद सास-ससुर और परिवार का पूरा ध्यान रखने की अपेक्षा की जाती है तो लड़कों से क्यों न की जाए। घर के कामकाज के साथ यदि दूसरों को सम्मान देने वाला प्रिंस चार्मिंग मिल जाए तो कहने ही क्या।

By Jagran