यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Mar 17, 2018 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
18 से शुरू नवरात्र, पूजा सामग्रियों से लदी बाजार; नव दंपतियों के लिए होगी खास व्यवस्था
इस बार नौ नहीं, आठ दिनों के होंगे नवरात्र। चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से शुरू होकर रामनवमी के साथ समापन।

लखनऊ(जागरण संवाददाता)। मा दुर्गा के विविध स्वरूपों के पूजन का पर्व नवरात्र रविवार से शुरू होगा। लेकिन खास बात ये होगी कि इस बार नवरात्र नौ नहीं, आठ दिनों के होंगे। नवमी की हानि की वजह से नवरात्र चैत्र शुक्ल प्रतिपदा यानी 18 मार्च से शुरू होकर 25 मार्च को रामनवमी के साथ समापन होगा। जहा सजे दरबार में कलश स्थापना के संग मा के विविध स्वरूपों की विधि विधान से पूजा होगी। वहीं, श्रद्धालु व्रत रखकर मा के नौ स्वरूपों की आराधना करेंगे। मा के दरबारों की सजावट के साथ ही चढ़ावे की तमाम सामग्री बाजारों में लग गई है।
बड़ी काली जी मंदिर पर लगेगा मेला
चौक की बड़ी व छोटी काली जी मंदिर के पास मेला शुरू होगा जो पूरे नवरात्र चलेगा। चौक के संतोषी माता मंदिर में देशी-विदेशी फूलों से मा का दरबार सजाया जाएगा। मंदिर के विष्णु अवस्थी ने बताया कि हर दिन अलग-अलग पुष्पों से श्रृंगार होगा। संदोहन देवी मंदिर, संकटा देवी मंदिर, त्रिवेणीनगर योगी नगर दुर्गा मंदिर, मदेयगंज दुर्गा मंदिर, चिनहट के मा जानकी मंदिर, कैसरबाग दुर्गा मंदिर, हाथी बाबा वाले मंदिर के अलावा कृष्णानगर के इंद्रेश्वर मंदिर, सैसोवीर मंदिर, तुलसी मानस मंदिर, आलमबाग के दुर्गा मंदिर, मौनी बाबा मंदिर समेत डालीगंज, अलीगंज, महानगर, इंदिरानगर, गोमतीनगर के मंदिरों के अलावा सभी मंदिरों में भी तैयारिया जोरों पर हैं।
महाकालेश्वर मंदिर में नव दंपतियों के दर्शन की अलग से होगी व्यवस्था
ठाकुरगंज स्थित मा पूर्वी देवी एवं महाकालेश्वर मंदिर में मा की प्रतिमा को फूलों से सजाने के साथ नव दंपतियों के दर्शन की अलग से व्यवस्था होगी। मंदिर समिति के अध्यक्ष प्रमोद कुमार शुक्ला ने बताया कि शुभ कायरे के लिए भक्त यहा आते हैं। सुबह 6:00 से दोपहर 12 बजे तक विविध आयोजन होंगे। सुबह-शाम आरती के साथ भक्तों की ओर से प्रसाद वितरण किया जाएगा।
महापौर ने लिया तैयारियों का जायजा
्रनवरात्र पर दुर्गा मंदिरों के आसपास सफाई और पेयजल सुविधा दुरुस्त करने का महापौर संयुक्ता भाटिया ने निर्देश दिया। शुक्रवार को महापौर नवरात्र एवं रामनवमी को लेकर हो रही तैयारियों के निरीक्षण के दौरान अधिकारियों को निर्देश दी रही थीं। उन्होंने नगर निगम जोन-दो के कुंडरी रकाबगंज स्थित शीतला देवी मंदिर पर जाकर मंदिर के पुजारी से फीडबैक लिया। नगर अभियंता डीडी गुप्ता और सहायक अभियंता आनंद सिंह की मौजूदगी में महापौर ने इलाके का दैरा कर परेशानियों को दूर करने का निर्देश दिया। रकाबगंज स्थित श्रीराधा-कृष्णा मंदिर, संतोषी माता मंदिर और सिद्धनाथ मंदिर में मत्था टेकने के बाद अधिकारियों से मार्ग प्रकाश व्यवस्था दुरुस्त करने के निर्देश दिए। चौक स्थित काली जी मंदिर और चौपटिया के संदोहन देवी मंदिर के पास गंदगी दूर करने के लिए जोनल अधिकारी बिन्नो रिजवी को कूड़ा घर में कम्पेक्टर लगवाने के निर्देश दिए। दौरे के दौरान कई पार्षद व आम नागरिक मौजूद थे।
नवमी की हानि, नवरात्र आठ दिन
नवमी तिथि की हानि से इस बार नवरात्र आठ दिनों के होंगे। पं. राधेश्याम शास्त्री ने बताया कि निर्णय सिंधु के अनुसार प्रतिपदा 17 मार्च को शाम 6:41 से नवसंवत्सर लग जाएगा। 18 को सूर्योदय 6:13 बजे होगा। शाम 6:16 तक कलश स्थापना की जा सकती है। लग्न के अनुसार, सूर्योदय के बाद सुबह 9:13 बजे तक कलश स्थापना करना श्रेयस्कर होगा। किसी मान्यता या विशेष प्रयोजन को लेकर व्रत रखने वाले श्रद्धालु सुबह 9:11 से पूर्वाह्न् 11:07 बजे तक कलश स्थापना कर सकते हैं। पहले और अंतिम दिन व्रत रखने वाले 24 को अष्टमी व्रत रख सकेंगे। 24 को सुबह 10:06 बजे से अष्टमी लगेगी और 25 को सुबह 8:03 बजे तक रहेगी। नवरात्र में पूरा व्रत रखने वाले 25 को सुबह 8:03 बजे के बाद व्रत का पारण कर सकते हैं।
ऐसे करें कलश स्थापना
मा की पूजा से पहले कलश स्थापना करनी चाहिए। आचार्य राकेश पाडेय ने बताया कि कलश स्थापना के लिए मिट्टी या धातु के बने कलश में पानी भर कर, आम के पत्तों कलश के घेरे पर रखें और ऊपर ढक्कन में चावल रखे। कलश के नीचे काली मिट्टी में जौ की बुआई करें और हर दिन उसमें पानी डालते रहें। घट स्थापना के बाद श्रद्धालुओं को 'ऊं दुर्गे दुर्गे रक्षिणि स्वाहा' का जप करना चाहिए। अंतिम दिन नदी व सरोवर में कलश का विसर्जन करना उत्तम होगा।
ज्योति की स्थापना
शास्त्रीनगर के श्री दुर्गा मंदिर में हर दिन अलग-अलग रंगों के फूलों और वस्त्रों से मा के दरबार को सजाया जाएगा। मा ज्वाला की ज्योति की स्थापना के साथ मा का गुणगान शुरू हो जाएगा। हर दिन ज्योति के दर्शन किए जा सकेंगे।
ये हैं नौ गौरी दर्शन
18 मार्च - मुख निर्मालिका गौरी
19 मार्च- ज्येष्ठा गौरी
20 मार्च- सौभाग्य गौरी
21 मार्च- श्रृंगार गौरी
22 मार्च- विशालाक्षी गौरी
23 मार्च- ललिता गौरी
24 मार्च- भवानी गौरी (निशिथ काल में महानिशा पूजा)
25 मार्च- मंगलागौरी व महालक्ष्मी गौरी का दर्शन पूजन विधान, नवरात्र का हवन पूजन, दोपहर में रामनवमी। 26 मार्च- भोर 4:39 से पहले महाष्टमी व्रत पारन। प्रात: 5:26 के बाद नवरात्र पारन।
