अयोध्या (जेएऩएन)। रामजन्मभूमि पर मंदिर निर्माण के लिए दो ट्रक पत्थरों की खेप राजस्थान के भरतपुर स्थित खदान से सोमवार को रामसेवकपुरम पहुंची। क्रेन की मदद से विशाल शिलाखंडों को देर शाम तक यथोचित स्थान पर रखवाने की कोशिश होती रही। रामघाट स्थित मंदिर निर्माण कार्यशाला में पत्थरों की तराशी का काम सितंबर, 1991 से ही जारी है। बीच के करीब पांच वर्ष यह सिलसिला बाधित रहने के बाद गत चार वर्षों से तराशी का काम पुन: शुरू किया गया।

हालांकि शुरुआती दशक के मुकाबले न्यास कार्यशाला में पत्थरों की तराशी की गति कुछ वर्षों से मंद पड़ी है। एक जमाने में कार्यशाला में ढाई से तीन दर्जन तक कारीगर तराशी करते थे, जबकि कुछ वर्षों से यहां कारीगरों के संख्या मुट्ठी भर रह गई है। इसके बावजूद कार्यशाला में एक लाख 10 हजार घन फीट पत्थरों की तराशी हो चुकी है। रामजन्मभूमि पर प्रस्तावित मंदिर में कुल एक लाख 75 हजार घन फीट पत्थर प्रयुक्त होने हैं। मंदिर के जिस हिस्से के पत्थरों की तराशी बाकी है, उनमें छत और शिखर का काम होना है। समझा जाता है कि पत्थरों की नई खेप मंदिर के इसी हिस्से के अनुरूप ढाली जाएगी।


विहिप के प्रांतीय मीडिया प्रभारी शरद शर्मा के अनुसार पत्थर तराशी की गति संतोषजनक है और निकट भविष्य में किसी भी समय मंदिर निर्माण शुरू होने की सूरत में तराशे गए पत्थरों का टोटा नहीं पडऩे पाएगा। समझा जाता है कि आने वाले दिनों में पत्थर तराशी के काम में तेजी लाई जा सकती है। तीन माह पूर्व प्रदेश में भाजपा सरकार गठित होने के साथ पत्थरों की आमद का गतिरोध दूर हो गया है और इसी का नतीजा है कि सोमवार को पूरे 15 माह बाद पत्थरों की नई खेप आ सकी। पूर्व की प्रदेश सरकार के समय ट्रेड टैक्स के नियमों का हवाला देकर पत्थरों की आमद में गतिरोध पैदा कर दिया गया था। पत्थरों की आमद की गति सामान्य होने के साथ कार्यशाला में कारीगरों की संख्या में भी बढ़ोतरी की जा सकती है।
 

Posted By: Ashish Mishra

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