लखनऊ, विधि संवाददाता। 37 साल पहले लखनऊ व‍िश्‍वव‍िद्यालय में प्रोवोस्ट के साथ मारपीट व सम्पति को नुकसान पहुंचाने के मामले में आरोपित रविदास मेहरोत्रा व लवि छात्रसंघ के पूर्व अध्यक्ष राकेश सिंह राना समेत सात अन्य को एमपी-एमएलए की विशेष मजिस्ट्रेट कोर्ट ने बरी कर दिया है। रविदास मेहरोत्रा मध्य लखनऊ विधानसभा से सपा विधायक हैं।

विशेष एसीजेएम अम्बरीष कुमार श्रीवास्तव ने अपने आदेश में कहा है कि अभियुक्तों पर लगाए गए आरोपों को अभियोजन पक्ष साबित नहीं कर सका है। लिहाजा अभियुक्त रविदास मेहरोत्रा, राकेश सिंह राना, प्रमोद कुमार सिंह, संजय कुमार, उदय राज यादव, राजेश वर्मा व सुरेश पाल सिंह को दोषमुक्त किया जाता है। बचाव पक्ष के वकील सूर्यमणि यादव के मुताबिक 22 सितंबर, 1985 को इस मामले की रिपोर्ट चंद्र प्रकाश शर्मा ने थाना हसनगंज में दर्ज कराई थी। विवेचना के पश्चात अभियुक्तों के खिलाफ आइपीसी की धारा 147, 342, 188, 323, 452, 506 व 7 सीएलए एक्ट में आरोप पत्र दाखिल हुआ था।

मूल रूप से हाथरस के गांव बिसाना निवासी डा. राकेश सिंह राना छात्र जीवन से ही राजनीति में सक्रिय रहे हैं। लखनऊ विश्वविद्यालय में पढ़ाई के दौरान वह छात्र संघ के अध्यक्ष व महामंत्री रहे। उन्‍होंने राजनीत‍िक पारी की शुरुआत समाजवादी पार्टी से ही की थी।

वर्ष 1992 में उसी वक्त सपा से जुड़ गए थे जब मुलायम सिंह यादव ने समाजवादी पार्टी का गठन किया था। उनकी नेतृत्व क्षमता को देखकर मुलायम सिंह यादव ने उन्हें बड़ी जिम्मेदारी देते हुए समाजवादी युवजन सभा का प्रदेश अध्यक्ष बनाया था, फिर उन्हें एमएलसी भी बनवाया। इसके बाद राना सिकंदराराऊ की राजनीति में सक्रिय हुए।

Edited By: Anurag Gupta