Lok Sabha By-Elections Result 2022: लखनऊ [राज्य ब्यूरो]। समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव के अति आत्मविश्वास ने पार्टी की नैया डुबो दी है। वर्ष 2017 का विधानसभा चुनाव हो या 2019 का लोकसभा चुनाव या फिर 2022 का विधानसभा चुनाव, सभी में मिली करारी हार से भी अखिलेश सीख नहीं पाए। अपने ही गढ़ आजमगढ़ व रामपुर लोकसभा सीट के उपचुनाव में मिली पराजय के बाद अब तो उनके नेतृत्व पर ही सवाल उठने लगे हैं। सपा के नेता दबी जुबान से नेतृत्व पर सवाल खड़े कर रहे हैं तो वहीं, सहयोगी दल खुलकर तेवर दिखाने लगे हैं।

सपा  के सहयोगी सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के अध्यक्ष ओम प्रकाश राजभर और जनवादी पार्टी सोशलिस्ट के अध्यक्ष डा. संजय चौहान ने भी अखिलेश यादव पर तल्ख टिप्पणी की है। राजभर ने कहा कि मैं लगातार अखिलेश यादव से कह रहा हूं कि लखनऊ के एसी कमरे से बाहर निकलकर गांव-कस्बों में भी घूमें। जो गलती विधानसभा चुनाव में प्रत्याशियों के चयन में की गई, वही गलती उन्होंने उपचुनाव में दोहरा दी। प्रत्याशी चयन में उन्होंने बहुत विलंब किया। आजमगढ़ तो उनकी अपनी सीट थी, इसलिए उन्हें प्रचार के लिए आना चाहिए था।

जनवादी पार्टी सोशलिस्ट के अध्यक्ष डा. संजय चौहान भी अखिलेश यादव के नेतृत्व पर सवाल खड़ा करते हुए कहते हैं कि सपा अध्यक्ष ट्विटर के जरिए राजनीति कर रहे हैं जबकि उनका मुकाबला 24 घंटे चुनावी मोड में रहने वाली भाजपा से है। उन्होंने कहा कि अखिलेश दगे हुए कारतूसों पर यकीन कर रहे हैं, इनसे जंग नहीं जीती जाती है। स्वामी प्रसाद मौर्य के चुनाव हारने के बावजूद विधान परिषद भेजना अखिलेश यादव का गलत फैसला था।

यादव बिरादरी के अलावा ओबीसी में अति पिछड़ा वर्ग जब तक भाजपा के साथ रहेगा तब तक सपा चुनाव नहीं जीत सकती है। अखिलेश अति आत्मविश्वास के कारण ही 2022 का विधानसभा चुनाव हार चुके हैं और वही गलती फिर की है। उन्होंने कहा कि आजम खां के कहने पर अखिलेश ने राज्यसभा व एमएलसी के टिकट दिए, अब उनसे पूछें कि इतना करने के बावजूद आजम अपने गढ़ रामपुर में कैसे हार गए?

अखिलेश के पुराने साथी रहे महान दल के अध्यक्ष केशव देव मौर्य ने भी उपचुनाव के परिणामों पर अखिलेश यादव को घेरा है। उन्होंने कहा कि सपा की रणनीति में इतनी खामियां हैं जिनको दूर किए बिना अखिलेश कोई चुनाव नहीं जीत सकते हैं। अखिलेश जब मेहनत ही नहीं कर रहे हैं तो वे चुनाव कैसे जीतेंगे?

प्रगतिशील समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष शिवपाल सिंह यादव पहले से ही भतीजे अखिलेश से नाराज चल रहे हैं, उन्होंने भी अखिलेश को नसीहत देते हुए कहा कि चुनाव का जनादेश स्वीकार कर लेना चाहिए। सपा के नेता खुद भी यह कहने लगे हैं कि उनके राष्ट्रीय अध्यक्ष अभी भी अपने आपको मुख्यमंत्री ही समझते हैं। पार्टी के कार्यकर्ता तक उनसे नहीं मिल पाते हैं। जब कार्यकर्ताओं का जुड़ाव नहीं होगा तो वह कैसे पार्टी के लिए संघर्ष करेगा?

Edited By: Umesh Tiwari