लखनऊ, जेएनएन। प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार के उत्तर प्रदेश में पुलिस कमिश्नर प्रणाली लागू करने के फैसले को एक ओर जहां जमकर सराहा जा रहा है, वहीं दूसरी ओर रार भी बढ़ी है। लखनऊ नगर व नोएडा (गौतमबुद्धनगर) में पुलिस कमिश्नर प्रणाली लागू होने के बाद से आइएएस और आइपीएस संवर्ग के बीच तनातनी जैसा माहौल है। सोशल मीडिया पर दोनों संवर्ग के अधिकारियों के बीच ताने-तंज भी शुरू हैं। चुटकी ली जा रही है कि इस व्यवस्था में आइपीएस के पास पीसीएस अधिकारियों से भी कम अधिकार होंगे।

आइएएस फ्रेटर्निटी नाम के ट्विटर हैंडल पर मंगलवार को ट्वीट किया गया कि तीन महीने इंतजार करें। उसके बाद पुलिस कमिश्नर को छोड़कर कमिश्नरेट के किसी आइपीएस से पूछा जाएगा तो वह पछताएगा। मेरठ, वाराणसी, गाजियाबाद और प्रयागराज के एसएसपी रहे नितिन तिवारी अब डीसीपी हैं। इस पर ट्वीट कर आइपीएस नितिन तिवारी ने खुद को इस बहस से अलग करते हुए लिख दिया कि जनता की सेवा ही उनका प्रथम और एकमात्र मकसद है। इसके बाद एक ट्विटर हैंडल से एक ट्वीट किया गया कि लखनऊ के नगर आयुक्त पीसीएस अफसर हैं। उनके अधिकार लखनऊ में तैनात आइजी रैंक के आइपीएस दोनों संयुक्त पुलिस आयुक्त से अधिक होंगे। इसके आगे लिखा कि गाजियाबाद का कोई भी एसपी नोएडा में तैनात होने वाले एसएसपी रैंक के किसी भी डीसीपी से ज्यादा ताकतवर होगा। हालांकि इस बहस में एक आइपीएस शामिल हुए और लिखा कि नई व्यवस्था जनता की सुरक्षा के लिहाज से बेहतर है। बताया गया है कि इस ट्विटर हैंडल को कई आइएएस अधिकारी फॉलो करते हैं।

दरअसल विवाद की शुरुआत 'आईएएस फ्रैटर्निटी' नामक ट्विटर हैंडल से किए गए एक ट्वीट से हुई। इस पर सबसे पहले ट्वीट किया गया कि 'जिलों के एसएसपी डीसीपी बनने को आतुर।' इसमें उन आईपीएस अफसरों को निशाना बनाया गया, जो जिलों में एसएसपी रहने के बाद डीसीपी बना दिए गए हैं। इसके बाद यह ट्वीट किया गया कि गाजियाबाद जिले का कोई भी एएसपी नोएडा के डीसीपी (एसएसपी) से ज्यादा पॉवरफुल है। इतना ही नहीं 'आईएएस फ्रैटर्निटी' नामक ट्विटर हैंडल से यह टिप्पणी भी की गई कि लखनऊ में नगर आयुक्त पद पर कार्यरत पीसीएस अफसर लखनऊ में नियुक्त दो संयुक्त पुलिस आयुक्तों (आईजी रैंक) से ज्यादा पॉवरफुल है।

आईपीएस अफसरों को चिढ़ाने वाला यह ट्वीट सामने आने के बाद दूसरे तरफ से भी प्रतिक्रिया होने लगी। एक आईपीएस ने जवाब में ट्वीट किया कि हमें अधिकारों के संघर्ष की भावना से ऊपर उठना चाहिए। जनता की सेवा करना हमारा सबसे प्रमुख और एकमात्र लक्ष्य है। बाद में एक एडीजी भी इस विवाद में कूदे। उन्होंने डीसीपी को ट्विट करते हुए कहा-'मैं तुमसे बहुत ज्यादा सहमत नहीं हूं। पहले लोगों को नए सिस्टम के जरिए सुविधा और सुरक्षा का बोध होने दो।' इस वाद-विवाद में कुछ अधिवक्ताओं समेत आम लोगों ने भी प्रतिक्रियाएं दीं। फिलहाल 'आईएएस फ्रैटर्निटी' नामक ट्विटर हैंडल ने यह कहते हुए अपनी तरफ से बहस का पटाक्षेप किया-'शुभकामनाएं! मेरा आशय यह है कि पुलिस सुधारों का असर थानों पर दिखना चाहिए। 

Posted By: Dharmendra Pandey

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