लखनऊ, [पुलक त्रिपाठी]। बैनर पोस्टल लगे वाहनों के काफिले नहीं, मैदान पर हजारों लाखों की संख्या में पार्टी समर्थकों की भीड़ नहीं। बड़ी बड़ी होर्डिंग से पटे चौराहे नहीं। समर्थकों के बलबूते कोई शक्ति प्रदर्शन नहीं। इस बार चुनावी महासमर पूरी तरह वर्चुअल प्लेटफार्म पर है। चुनाव को लेकर आयोग की ओर से शारीरिक रूप से मौजूदगी वाली कोई जनसभा, पदयात्रा, साइकिल रैली, बाइक रैली रोड शो पर पाबंदी लगाने के बाद से जीत के लिए पार्टियों ने सोशल मीडिया पर अपनी ताकत झोंकनी शुरू कर दी है।

पार्टी, नेता और समर्थक सभी फेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और वाट्सएप पर सक्रिय हैं। सभी अपने अपने जतन से जनमानस को प्रभावित करने वाले पोस्ट साझा कर रहे हैं, तो वहीं समर्थक उनकी पोस्ट को लाइक और कमेंट कर अपना समर्थन दे रहे हैं। पार्टी और उम्मीदवारों ने अपने अपने स्तर पर कंटेंट राइटर कर रखे हैं, ताकि अधिक से अधिक जनता को प्रभावित किया जा सके।

एक से 20 लाख तक के हायर किए जा रहे कंटेंट राइटरः सोशल मीडिया पर नारे और आकर्षक कंटेंट से मतदाताओं को अपनी ओर खींचने के लिए हर स्तर पर मजबूत प्रयास किए जा रहे हैं। इसके लिए प्रत्याशियों द्वारा कंटेंट राइटर की मदद ली जा रही है। सोशल मीडिया फ्रेंडली और युवाओं के मन की बात को समझने वाले कंटेंट राइटर राजनीतिक दलों की पहली पसंद हैं। सोशल मीडिया पर अच्छा लिखने वाले लोगों से संपर्क किया जा रहा है। सोशल मीडया हैंडलर और बेहतरीन कंटेंट राइटर एक लाख से 20 लाख तक चार्ज कर रहे हैं।

जानना जरूरी कि क्या है वोटरों के मन की बातः एक पार्टी के लिए काम कर रहे क्रिएटिव और कनेक्टिव कंटेंट राइटर बताते हैं कि सोशल मीडिया पर वन लाइनर का ट्रेंड है। टविटर, फेसबुक, इंस्टाग्राम समेत सभी सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर अधिकतर युवा ही हैं। इनकी चुनाव में महती भूमिका मानी जाती है। युवा वोटर ही किसी भी पार्टी व उम्मीदवार की परिवार के बीच छवि तैयार करते हैं। ऐसे में युवाओं को अपनी ओर आकर्षित करने वाला कंटेंट ज्यादा मायने रखता है। कंटेंट ऐसा होना चाहिए जो युवाओं को अपनी ओर आकर्षित करे। यह तभी संभव है जब औरों से अलग और क्रिएटिव पोस्ट करें। सोशल मीडिया पर निगेटिव और पाजिटिव दोनों ही कंटेंट चलते हैं। जिसमें कटाक्ष से लेकर अपने कामों के प्रचार को आकर्षक रूप से लिखकर पोस्ट करना बेहद जरूरी है। इसलिए क्रिएटिव और कनेक्टिव कंटेंट राइटर की ही मांग है।

एक अन्य कंटेंट राइटर का कहना है कि जब से वर्चुअल रैली की घोषणा हुई है तब से ही कई बड़ी पार्टियों की आईटी सेल और उम्मीदवारों की ओर से सोशल मीडिया प्लेटफार्म हैंडल करने के लिए फोन आ रहे हैं। उनकी डिमांड है कि कैसे भी ज्यादा से ज्यादा फालोवर्स की संख्या बढ़ाई जाए। लोग प्रचार के लिए गाने व जिंगल लिखने के लिए कह रहे हैं। उनका कहना है कि सोशल मीडिया है पर दो घंटे पहले की पोस्ट भी इतने कम समय में इतने लोग देख चुके होते हैं कि वह पुरानी हो जाती है। हर घंटे यहां पर मुद्दे का ट्रैंड बदलता रहता है, इसलिए एक लेखक के तौर पर हम लोगों को काफी अपडेट भी रहना पड़ता है। एक अन्य सोशल मीडिया हैंडल कहते हैं कि पार्टियां अपनी विचारधारा को केंद्र में रखकर काम करती हैं। हमें भी उसी को दिमाग में रखकर काम करना पड़ता है। 

सोशल मीडिया पर ऐसे छोटे छोटे डाक्यूमेंट्री व वीडियो को तैयार किया जा रहा है। इसके तहत कभी महिलाओं से तो कभी युवाओं से जुड़े मुद्दे उठाए जाते हैं। कभी रोजगार की। ऐसे में सोशल मीडिया हैंडलर और कंटेंट राइटर को सभी विषय की व्यापक जानकारी होना बेहद जरूरी है। उदाहरण के लिए युवा दिवस पर दिनभर जितनी भी पोस्ट होगी वह युवा से ही संबंधित होंगी। एक दिन में करीब सभी सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर कम से कम 20 से 25 पोस्ट की जाती है। मतलब दिन भी में सौ से अधिक छोटे छोटे मैसेज या फिर वन लाइनर लिखना होता है। इसके तहत अगर किसी पीआर कंपनी के लिए काम करने वाले सोशल मीडिया हैंडलर वेतन पर हायर किए जा रहे हैं। उम्मीदवार द्वारा हायर करने पर प्रति पोस्ट के हिसाब से भुगतान किया जा रहा है।

Edited By: Vikas Mishra