लखनऊ। उत्तर प्रदेश लघु उद्योग निगम (यूपीएसआइसी) अब सभी विभागों, निगमों और सार्वजनिक उपक्रमों के लिए सर्विस प्रोवाइडर एजेंसी का काम करेगा। निगम इन विभागों को दक्ष कर्मचारी उपलब्ध कराएगा। कर्मचारियों को मिलने वाले वेतन का 12 फीसद निगम सर्विस चार्ज के रूप में लेगा। इससे उसे हर साल करीब 40 से 45 करोड़ रुपये का लाभ होगा।

प्रदेश सरकार ने 29 जून 1991 को संविदा, वर्कचार्ज, दैनिक वेतन, मस्टर रोल, मानदेय पर कर्मचारियों की तैनाती पर रोक लगा दी थी। इस रोक के बाद जो भी पद रिक्त होते हैं उन पदों पर सर्विस प्रोवाइडर एजेंसियां ही दक्ष कर्मचारी उपलब्ध कराती हैं। प्रत्येक कर्मचारी को मिलने वाले वेतन से 12 फीसद सर्विस चार्ज काटकर शेष धनराशि कर्मचारी को अदा कर देती हैं। प्रदेश के कई प्राधिकरण, सार्वजनिक उपक्रम और निगम हैं जहां हजारों सर्विस प्रोवाइडर एजेंसियों के माध्यम से कर्मचारियों की तैनाती की गई है। दो सौ से अधिक ऐसी एजेंसियां काम कर रही हैं। इसमें कई जनप्रतिनिधियों की भी हैं।

कई घोटालों में नाम आने के बाद निगम को कोई खास काम नहीं मिल पा रहा है। ऐसे में नए प्रबंध निदेशक मनोज सिंह ने इस निगम की छवि सुधारने का कार्य शुरू किया है। साथ ही सर्विस प्रोवाइडर एजेंसी की तरह ही संबंधित विभागों में मैन पावर आपूर्ति का फैसला किया है। शासन ने भी प्रबंध निदेशक के प्रस्ताव पर मुहर लगा दी है। संबंधित विभाग सर्विस प्रोवाइडर एजेंसियों को 40 से 45 करोड़ रुपये का भुगतान कर रहे हैं, अब यह धनराशि उप्र लघु उद्योग निगम को मिलेगी। फिलहाल जिन निगमों, प्राधिकरणों और सार्वजनिक उपक्रमों में सर्विस प्रोवाइडरों के कर्मचारी लगे हैं। उन्हें निगम के माध्यम से तैनाती देने की तैयारी भी चल रही है। यूपीएसआइसी के प्रबंध निदेशक मनोज सिंह ने बताया कि पूरी कार्ययोजना तैयार है। अगले माह से इस पर अमल शुरू हो जाएगा।

खुलेंगे रोजगार के रास्ते

युवाओं के लिए अब रोजगार के नए रास्ते खुलने जा रहे हैं। निगम सेवा प्रदाता की भूमिका निभाएगा तो उसके लिए उसे कर्मचारियों की भी जरूरत होगी। ऐसे में वह शिक्षित युवाओं को जोड़ेगा और सेवायोजन कार्यालय में पंजीकृत युवाओं को भी मौका देगा।