लखनऊ, राज्य ब्यूरो। उप्र सहकारी ग्राम विकास बैंक लिमिटेड लखनऊ की ऋण वसूली पचास फीसद से भी कम होने से अफसर खफा हैं। समीक्षा बैठकों के बाद विभाग में बड़े पैमाने पर कार्रवाई की गई है। प्रदेश के छह शाखा प्रबंधक निलंबित कर दिए गए हैं, जबकि दस को प्रतिकूल प्रविष्टि दी गई है। इसके अलावा 50 शाखा प्रबंधकों को निलंबन की नोटिस के साथ ही फील्ड अफसरों को भी कठोर चेतावनी व निलंबन नोटिस जारी की गई है।

सहकारी ग्राम विकास बैंक प्रदेश के गांवों में रहने वाले किसान परिवारों की राेजगारपरक आय बढ़ाने की योजनाएं चला रहा है। बैंक उन लोगों को ऋण भी उपलब्ध कराता है जो कृषि व अकृषि पर आधारित हैं। बैंक को नाबार्ड के पक्ष में शासकीय गारंटी देने पर शासन की ओर से ऋण वितरण के लिए धनराशि दी जाती है। इसीलिए बैंक शाखाओं की ओर से दिए गए ऋण की वसूली पर विशेष जोर है। बैंक के प्रबंध निदेशक अरविंद कुमार सिंह व प्रमुख सचिव सहकारिता ने क्षेत्रीय व शाखा प्रबंधकों से ऋण वसूली की वीडियो कांफ्रेंसिंग से समीक्षा की। बैंक का लक्ष्य 1527.62 करोड़ रहा, इसके सापेक्ष 2020-21 में 633.53 करोड़ रुपये की ही वसूली हो सकी।

जुलाई की समीक्षा बैठकों में प्रबंध निदेशक ने लापरवाही करने वाले कार्मिकों के विरुद्ध कठोर अनुशासनात्मक कार्रवाई की है। इनमें बैंक शाखा मल्लावां, शाहाबाद, गाजियाबाद, जगनेर, रजपुरा व मितौली के प्रबंधकों को निलंबित कर दिया है। 10 को विशेष प्रतिकूल प्रविष्टि व 50 शाखा प्रबंधकों को निलंबन नोटिस चेतावनी के साथ जारी की गई। ऐसे ही 70 फील्ड आफीसर व सहायक फील्ड आफीसरों को वसूली कार्य में लापरवाही बरतने पर कठोर चेतावनी के साथ निलंबन नोटिस दी गई है।

एकमुश्त समाधान योजना शुरू : बैंक ने बड़े बकाएदारों व एनपीए खातों से वसूली के लिए शासन से स्वीकृति लेकर एकमुश्त समाधान योजना 2021 भी 11 जून को लागू की है। इसमें बकायेदारों को 30 लेकर 100 फीसद तक ब्याज में श्रेणीवार छूट दी जा रही है। इस योजना के तहत 3274 किसानों ने पूरा बकाया अदा किया है। वहीं, लघु व सीमांत कृषकों को मार्च से ऋण वितरित किया जा रहा है। बैंक शाखाओं ने 1602 किसानों को 2701.80 लाख का ऋण दिया है।

Edited By: Anurag Gupta