लखनऊ, जेएनएन। कुशीनगर तथा सहारनपुर में जहरीली शराब से मौत के मामले में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ बेहद गंभीर हैं। जहरीली शराब के सेवन से बीमार लोगों के अच्छी चिकित्सा देने के साथ ही उन्होंने पीडि़त परिवार के लोगों आर्थिक सहायता देने का निर्देश दिया था।

अब उन्होंने सहारनपुर और कुशीनगर में जहरीली शराब से बड़ी संख्या में मौत की जांच विशेष अनुसंधान दल (एसआईटी) से कराने का निर्देश दिया है। एसआइटी की कमान अपर पुलिस महानिदेशक रेलवे संजय सिंघल को सौंपी गई है। राज्य सरकार ने एक और कड़ा कदम उठाते हुए सहारनपुर और कुशीनगर के दो क्षेत्राधिकारियों को भी निलंबित कर दिया है।

प्रमुख सचिव गृह अरविंद कुमार के अनुसार एसआइटी एस पूरे मामले की समग्र जांच करेगी। आइपीएस अफसर संजय सिंघल की अध्यक्षता में गठित इस टीम में मंडलायुक्त गोरखपुर अमित गुप्ता, आइजी गोरखपुर जय नारायन सिंह, मंडलायुक्त सहारनपुर चंद्र प्रकाश त्रिपाठी और आइजी सहारनपुर शरद सचान शामिल हैं। एसआइटी घटना के कारणों का विस्तृत पता लगाएगी। वह यह भी छानबीन करेगी कि इन घटनाओं के पीछे कोई साजिश तो नहीं है। इसके साथ ही पूर्व में घटित इस प्रकार की घटनाओं की समीक्षा भी करेगी। एसआइटी एसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो, इसके सुझाव भी देगी।

यह माना जा रहा था कि घटना की गंभीरता को देखते हुए राज्य सरकार पुलिस अधिकारियों के खिलाफ भी कड़े कदम उठा सकती है। इस क्रम में कल सहारनपुर में देवबंद के सीओ सिद्धार्थ और तमकुहीराज के सीओ राम कृष्ण तिवारी को निलंबित कर दिया गया। इससे पहले दो आबकारी अधिकारियों समेत दस आबकारी कर्मी निलंबित किए जा चुके हैैं।

प्रमुख सचिव गृह अरविंद कुमार ने बताया कि निलंबित हुए दोनों क्षेत्राधिकारी पुलिस महानिदेशक कार्यालय के संबद्ध किए गए हैैं। उनके खिलाफ विभागीय जांच भी चलेगी। गौरतलब है कि देवबंद के कई गांवों में जहरीली शराब से मौतें हुई हैैं। गृह विभाग ने अपनी जांच में पाया कि वहां उत्तराखंड की सीमा से लगे गांवों में अवैध शराब की बिक्री और तस्करी रोकने के लिए समुचित उपाय नहीं किए गए। इसी तरह तमकुहीराज क्षेत्र में अवैध शराब की रोकथाम न कर पाने के लिए रामकृष्ण तिवारी को दोषी पाया गया।  

Posted By: Dharmendra Pandey

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