लखनऊ, जेएनएन। रामपुर में भू माफिया घोषित समाजवादी पार्टी के सांसद आजम खां की मुश्किलें लगातार बढ़ती ही जा रही हैं। रामपुर में 85 मामलों में नामजद आजम खां दो महीने तक अंडरग्राउंड रहने के बाद सोमवार को जमीन कब्जा करने के मामले में रामपुर में एसआइटी के समक्ष पेश हो गए थे। अब लखनऊ में उनके खिलाफ शिकंजा कसा जा रहा है। 

अखिलेश यादव सरकार में कैबिनेट मंत्री रहे आजम खां जल निगम भर्ती घोटाले में आरोपित हैं। शासन ने इस मामले में एसआइटी का गठन किया है जो कि मामले की जांच कर रही है। जांच एजेंसी ने पूर्व कैबिनेट मंत्री आजम खां को नोटिस देकर तलब किया था। आजम खां मंगलवार को लखनऊ में एसआइटी ऑफिस में पहुंचे। जहां पर उनसे करीब दो घंटा से पूछताछ की जा रही है। उनके खिलाफ जल निगम भर्ती घोटाला में केस दर्ज किया गया है। आजम खां के साथ इस मामले में रिटायर्ड आइएएस अफसर एसपी सिंह तथा तीन अन्य अफसर भी नामजद हैं।

विशेष अनुसंधान दल (एसआइटी) ने शासन की अनुमति पर जल निगम भर्ती घोटाले के मामले में सपा सरकार के पूर्व कैबिनेट मंत्री आजम खां सहित अन्य के खिलाफ धोखाधड़ी के साथ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम सहित अन्य धाराओं में एफआइआर दर्ज की है। एसआइटी ने 29 मार्च को शासन को अपनी जांच रिपोर्ट भेजने के साथ ही मामले में मुकदमा दर्ज कराए जाने की सिफारिश की थी। जलनिगम में भर्ती 122 सहायक अभियंताओं की नियुक्तियां अगस्त 2017 में रद कर दी गई थीं। यह मामला अब कोर्ट में विचाराधीन है, जबकि 1178 पदों पर भर्ती अवर अभियंता व लिपिक वर्तमान में कार्यरत हैं और वेतन पा रहे हैं।

पुलिस ने बताया कि एसआइटी ने पूर्व मंत्री आजम खां के अलावा जलनिगम के तत्कालीन एमडी पीके आसूदानी, नगर विकास विभाग के पूर्व सचिव एसपी सिंह (अब सेवानिवृत्त), पूर्व मंत्री आजम के तत्कालीन ओएसडी सैय्यद आफाक अहमद व तत्कालीन चीफ इंजीनियर अनिल कुमार खरे के खिलाफ नामजद व अन्य के खिलाफ एफआइआर दर्ज की है। एसआइटी के इंस्पेक्टर अटल बिहारी की ओर से गबन, धोखाधड़ी, षड्यंत्र, साक्ष्य छिपाने व भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत रिपोर्ट दर्ज कराई गई है।

उल्लेखनीय है कि जलनिगम में सपा शासनकाल में 1300 पदों पर हुई भर्तियों में अनियमितता के आरोप लगे थे। योगी आदित्यनाथ सरकार के गठन के बाद शासन ने पूरे मामले की जांच एसआइटी को सौंपी थी। 22 सितंबर 2017 को एसआइटी ने जलनिगम मुख्यालय में छापा मारकर भर्ती से संबंधित मूल पत्रावलियां अपने कब्जे में ली थीं। जांच में सामने आया था कि आरोपित एसपी सिंह के नगर विकास विभाग के सचिव पद पर तैनात रहने के दौरान ही जल निगम में नियमों को दरकिनार कर भर्तियां की गई थीं। तब आजम खां नगर विकास मंत्री व जल निगम के अध्यक्ष थे। अभ्यर्थियों ने पत्रावलियों के गलत मूल्यांकन सहित अनियमितता के कई गंभीर आरोप लगाए थे, जबकि जलनिगम के अधिकारियों ने अपने बयानों में प्रचलित परंपरा के अनुरूप भर्ती कराए जाने की बात कही थी।

जल निगम भर्ती घोटाले में नगर विकास विभाग के पूर्व सचिव एसपी सिंह (अब सेवानिवृत्त) सहित नौ अधिकारियों के बयान के बाद विशेष अनुसंधान दल (एसआइटी) को आजम खां का इंतजार था। एसआइटी पूर्व कैबिनेट मंत्री के लखनऊ व रामपुर के पतों पर नोटिस जारी कर बयान दर्ज कराने के लिए बुलाया था। जल निगम में 1300 पदों पर हुई भर्तियों में घोटाले के मामले में शासन के निर्देश पर जांच कर रही है। इसमें पूर्व सचिव एसपी सिंह से भर्ती प्रक्रिया में उनकी भूमिका से जुड़े 12 सवाल किए गए। इसमें अधिकतर सवालों के जवाब में उन्होंने कहा कि कई तथ्य अब उन्हें याद नहीं हैं। पत्रावलियां देखकर वह कई बातों को स्पष्ट कर सकेंगे। इसके साथ ही यह भी कहा कि जलनिगम अलग विभाग है, उसका उनसे कोई सीधा सरोकार नहीं था। एसपी सिंह के नगर विकास विभाग के सचिव पद पर तैनात रहने के दौरान ही जल निगम में नियमों को दरकिनार कर भर्तियां की गई थीं। आजम खां के तत्कालीन ओएसडी सैय्यद अफाक अहमद ने भी घोटाला में बयान दर्ज कराया।  

Posted By: Dharmendra Pandey

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