लखनऊ, जेएनएन। ऐतिहासिक बड़े इमामबाड़े में विरोध जताने के लिए मजलिस का आयोजन किया गया। आसिफी मस्जिद के इमाम मौलाना कल्बे जवाद नक़वी ने डीएम अभिषेक प्रकाश के एक समाचार पत्र को दिए गए बयान 'इमामबाड़ा धार्मिक स्थल है या नहीं' पर कड़ा विरोध जताया है। एक द‍िन पूर्व डीएम को पत्र भेज कर लिखित स्पष्टीकरण देने की बात कही, वहींं इतवार को बड़े इमामबाड़े में सायं आठ बजे मजलिस का आयोजन किया गया। 

मौलाना कल्बे जावाद नक़वी ने मजलिस को संबोधित करते हुए कहा कि हमें पर्यटकों के आने से कोई परेशानी नहीं है, परंतु इसका यह मतलब नहीं के इमामबाड़े को धार्मिक स्थल ही न माना जाये। डीएम का समाचार पत्र को दिया गया बयान अफसोसनाक है। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि सिटी मजिस्ट्रेट भी घर पर मिलने आए थे, उनसे भी हमने यही मांग की है कि डीएम लिखित स्पष्टीकरण दें अन्यथा हमारा विरोध जारी रहेगा। मौलाना ने कहा कि डीएम हुसैनाबाद ट्रस्ट के चेयरमैन हैं उन्हें मालूम है कि शिया समुदाय के लिए इमामबाड़े मुकद्दस स्थल हैं। यहां तरह तरह के धार्मिक प्रोग्राम होते रहते हैं।

कहा, साल भर ताजिया व अन्य चीजें यहां सजी रहती हैं। प्रशासन की देखरेख में इमामबाड़े से शाही जरीह का जुलूस निकलता आया है। गेट पर भी लिखा है कि यह एक धार्मिक स्थल है। यह सब होते हुए भी डीएम का बयान अफसोसनाक है। उन्हें अपना बयान वापस लेते हुए लिखित स्पष्टीकरण देना चाहिए। इस अवसर पर सैकड़ों की तादाद में लोग मौजूद रहे, जिनमें महिलाएं भी शामिल थीं। 

शाम तक का द‍िया समय 

सोमवार को बड़े इमामबाड़े में होने वाली मजलिस प्रशासन से बातचीत के बाद स्थगित कर दी गई है। शाम 7:30 बजे तक प्रशासन को वक्त दिया गया है। यदि डीएम की तरफ से लिखित स्पष्टीकरण आ जाता है कि इमामबाड़ा धार्मिक स्थल हैं तो विरोध के रूप में की जाने वाली मजलिस नहीं की जाएगी। अन्यथा विरोध के रूप में मजलिस का सिलसिला शुरू कर दिया जाएगा। मौलाना कल्बे जवाद ने कहा क‍ि प्रशासन के आश्वासन पर बड़े इमामबाड़े में दिन का प्रोग्राम स्थगित कर द‍िया गया है अब शाम को मजलिस होगी। वहीं अधिवक्ता मोहम्मद हैदर ने कहा क़ानूनी तौर पर इमामबाड़ा धार्मिक स्थल है। 

 

डाउनलोड करें जागरण एप और न्यूज़ जगत की सभी खबरों के साथ पायें जॉब अलर्ट, जोक्स, शायरी, रेडियो और अन्य सर्विस