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लखनऊ SGPGI में दुर्लभ बीमारी से पीड़ित बच्चे का सफल इलाज, कोलेस्ट्रॉल पहुंचा 854 एमजी ; प्लाज्मा एक्सचेंज से बचाई जान

Published: Wed, 02 Sep 2026 01:26 AM (IST)Updated: Wed, 02 Sep 2026 02:02 AM (IST)

लखनऊ के एसजीपीजीआई में एक तीन साल के बच्चे को दुर्लभ आनुवंशिक बीमारी एचओएफएच से जीवनदान मिला, जहां उसका कोलेस्ट्रॉल ...और पढ़ें

प्रतीकात्मक तस्वीर।

प्रतीकात्मक तस्वीर।

HighLights

  1. एसजीपीजीआई लखनऊ में 3 साल के बच्चे का सफल इलाज।

  2. दुर्लभ आनुवंशिक बीमारी एचओएफएच का प्लाज्मा एक्सचेंज से उपचार।

  3. देश में इतनी कम उम्र के बच्चे में यह पहला मामला।

जागरण संवाददाता, लखनऊ। एसजीपीजीआई के ट्रांसफ्यूजन मेडिसिन विभाग में दुर्लभ आनुवंशिक बीमारी से पीड़ित तीन साल के बच्चे को जीवनदान मिला है। बच्चे के खून में कोलेस्ट्राल का स्तर 854 मिलीग्राम/डेसीलीटर तक पहुंच गया था। दवाओं से फायदा नहीं होने पर प्लाज्मा एक्सचेंज के जरिये खून से अतिरिक्त कोलेस्ट्राल निकालने का फैसला किया गया।

बच्चे में होमोजाइगस फैमिलियल हाइपरकोलेस्ट्रोलेमिया (एचओएफएच) की पुष्टि हुई थी। मेडिकल जेनेटिक्स विभाग में बीमारी की पहचान के बाद बच्चे को ट्रांसफ्यूजन मेडिसिन विभाग भेजा गया। विशेषज्ञों ने बच्चे की कम उम्र और वजन को ध्यान में रखते हुए विशेष प्लाज्मा एक्सचेंज की योजना तैयार की। करीब 20 सप्ताह तक हर सात दिन में यह प्रक्रिया नियमित की गई।

प्रत्येक प्रक्रिया के बाद कोलेस्ट्राल के स्तर में औसतन करीब 70 प्रतिशत तक कमी आई। प्लाज्मा एक्सचेंज के दौरान मशीन की मदद से कोलेस्ट्राल से प्रभावित प्लाज्मा को अलग किया गया और उसकी जगह उपयुक्त द्रव दिया गया। इसके बाद बच्चे की बाकी रक्त कोशिकाओं को शरीर में वापस पहुंचाया गया।

सभी प्रक्रियाओं को बच्चे ने अच्छी तरह सहन किया और कोई बड़ी जटिलता नहीं हुई। इलाज के बाद बच्चे की हालत में सुधार हुआ और त्वचा पर जमा कोलेस्ट्राल भी कम हो गया। परिवार की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं थी। ऐसे में संस्थान प्रशासन की ओर से इलाज के दौरान कई प्रक्रियाएं मुफ्त की गईं।

ट्रांसफ्यूजन विभाग के अध्यक्ष प्रो. प्रीति एल्हेंस के अनुसार, यह देश का पहला मामला है, जिसमें इतनी कम उम्र के बच्चे में एचओएफएच के सबसे सटीक प्रबंधन के लिए प्लाज्मा एक्सचेंज तकनीक का इस्तेमाल किया गया है।

क्या है एचओएफएच
होमोजाइगस फैमिलियल हाइपरकोलेस्ट्रोलेमिया (एचओएफएच) एक बेहद दुर्लभ आनुवंशिक बीमारी है, जो करीब पांच लाख लोगों में किसी एक में होती है। इसमें शरीर खून से खराब कोलेस्ट्राल यानी एलडीएल (लो-डेंसिटी लिपोप्रोटीन) को प्रभावी ढंग से बाहर नहीं निकाल पाता।

इससे कम उम्र में ही त्वचा, रक्त वाहिकाओं और अन्य अंगों में कोलेस्ट्राल जमा होने लगता है। ऐसे मरीजों में हृदय की धमनियों में रुकावट, हृदय के वाल्व में बीमारी और कम उम्र में हार्ट अटैक का खतरा कई गुणा तक बढ़ जाता है।

इलाज करने वाली टीम
ट्रांसफ्यूजन मेडिसिन विभाग: डॉ. भरत सिंह, प्रो. प्रीति एल्हेंस (विभागाध्यक्ष), प्रो. अनुपम वर्मा और डा. अजय जोसेफ। मेडिकल जेनेटिक्स विभाग: डॉ. अमिता मोइरांगथेम।

निश्चित तौर पर ट्रांसफ्यूजन मेडिसिन और मेडिकल जेनेटिक्स विभाग के डाक्टरों ने जटिल रोग से पीड़ित बच्चे का पुनर्जन्म कराया है। पीजीआए ऐसी ही गंभीर बीमारियों के उच्चस्तरीय इलाज के लिए जाना जाता है। बच्चे का सफल उपचार करने वाली पूरी टीम को बधाई।
-प्रो. आरके धीमान, निदेशक, एसजीपीजीआई।