लखनऊ, [सौरभ शुक्‍ला]। लखनऊ चौक के एक बुजुर्ग दंपती की कहानी बिल्कुल बागवान फिल्म जैसी है। बेटे और बहू उनका खर्च उठाने में असमर्थ थे। 90 वर्षीय बुजुर्ग अपने चौक स्थित पैतृक आवास में रहते हैं, जबकि उनकी पत्नी जानकीपुरम में। बुजुर्ग ने पुल‍िस कम‍िश्‍नर डीके ठाकुर के न‍िदे्रशन मे चल रहे सीनियर सिटीजन सेल में बीते 11 फरवरी को शिकायत की कि उनकी पत्नी से बेटा और बहू मिलने नहीं देते हैं। शिकायत मिली दोनों को सेल के अधिकारी और काउंसलर डा. इंदु सुभाष ने फोन करके बुलाया। बुजुर्ग ने लिखित प्रार्थनापत्र दिया। इसके बाद सेल से एक सम्मन बेटे और बहू को भेजा गया। दोनों पहली तारीख पर तो नहीं आए दूसरी तारिख पर 12 मार्च को मां के साथ पहुंचे। बुजुर्ग दंपती ने एक दूसरे को छह माह बात देखा तो उनकी आंखे भर आयीं।

तत्कालीन जेसीपी कानून व्यवस्था नवीन अरोड़ा ने पूछतताछ शुरू की। बात चीत हुई पता चला कि मां पैतृक आवास में बेटी को हिस्सा देना चाहती हैं पर बेटे औैर बहू नहीं चाहते। इस पर दोनों की काउंसिलिंग की गई। जेसीपी नवीन आरोड़ा ने पूरे परिवार को समझाया। बुजुर्ग दंपती को एक साथ रखने को तैयार हो गए। इसके बाद बुजुर्ग दंपती के लिए माला मंगाई गई। दोनों ने एक दूसरे मिठाई खिलाई। बेटे और बहू ने आर्शिवाद लिया इसके बाद दोनों को साथ रहने के लिए पैतृक आवास चौक भेज दिया गया। इस तरह से बुजुर्गों के पारिवारिक मामले डालीगंज नबीउल्ला रोड स्थित जेसीपी कानून व्यवस्था के दफ्तर में स्थित सीनियर सिटीजन सेल में सुलझाए जाते हैं। बुजुर्गों की शिकायत आने पर पुलिस और काउंसलर उनकी हर संभव मदद करते हैं।

लाकडाउन में नहीं था खाने को वृद्ध को दिलाई वृद्धा पेंशन : डा. इंदू सुभाष ने बताया कि बीते साल लाकडाउन के दौरान वृंदावन कालोनी में रहने वाले एक बुजुर्ग की कई माह से कैंट स्थित एक बैंक से वृद्धा पेंशन नहीं मिली थी। उनका कूलर खराब था। मारे गर्मी के बहुत दिक्कत हो रही है। वृद्ध ने सीनियर सिटीजन सेल के टाल फ्री नंबर पर संपर्क किया। इसके बाद वहां एक टीम गई। इलेक्ट्रीशियन को बुलाकर कूलर ठीक कराया गया। बुजुर्ग के खाने की व्यवस्था की गई। बैंक अधिकारी से पेंशन के लिए बात की गई। इसके बाद उन्हें बैंक से चार दिन बाद पेंशन भी मिल गई।

वर्ष 2013 में बनी थी सीनियर सिटीजन सेल, थानों से मिलता है रजिस्ट्रेशन फार्म : वर्ष 2013 में बने सेल के लिए सात लोगों का स्टॉफ आवंटित है। मौजूदा वक्त में दरोगा मंजेश जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। सेकेंड प्रभारी एचसीपी महावीर सिंह हैं। उन्होंने बताय कि मदद के लिए एक रजिस्ट्रेशन फार्म भरना होता है। जिसे थाने से प्राप्त किया जा सकता है। इसके साथ ही ऑनलाइन भी यह फार्म उपलब्ध है। उन्होंने बताया कि हेल्पलाइन नंबर 9454403882 पर फोन कर किसी भी वक्त मदद प्राप्त की जा सकती है।

आते हैं अधिकतर पारिवारिक मामले, सीओ/एसीपी स्तर के अधिकारी करते हैं जांच : महावीर सिंह ने बताया कि सीनियर सिटीजन सेल में सामान्यत पारिवारिक विवाद के मामले अधिक आते हैं। जिन्हें सुलझाने के लिए जांच सीओ/एसीपी स्तर के अधिकारी को दी जाती है। वह पूरे मामले की जांच करते हैं। दोनों पक्षों को बुलाकर काउंसर से काउंसिलिंग भी कराते हैं। सहायता से वृद्धों की मदद की जाती है। मामला न सुलझने पर वह रिपोर्ट बनाकर देते हैं। रिपोर्ट जिलाधिकारी कार्यालय को भेज दी जाती है। इस सेल में आने वाली शिकायतों का समाधान सात दिन में करना जरूरी है। यदि गंभीर शिकायत है तो उसका समाधान 15 दिन में करना अनिवार्य है।

एक फोन पर मिलती है मदद : रजिस्ट्रेशन कराने के बाद जरूरतमंद और अकेले रहने वाले वृद्धों को कई तरह की सहूलियत प्रदान की जाती है। मसलन अगर किसी को प्लंबर की जरूरत है तो वह इस सेल में फोन कर प्लंबर भेजने को कह सकता है। संबंधित थाना फोन करने वाले सीनियर सिटीजन को प्लंबर उपलब्ध करा देता है। इसी तरह धोबी, इलेक्ट्रिशियन, नाई, मोटर मैकेनिक, कूड़ा उठाने वाले, एम्बुलेंस सर्विस, राजमिस्त्री, डॉक्टर, रिचार्ज कूपन बेचने वाले, एसी और कूलर मैकेनिक, कंप्यूटर मैकेनिक, गैस एजेंसी, बुटिक और टेलर, दूध वाले, सिक्योरिटी गार्ड एजेंसी, टीवी, सेटअप बाक्स रिचार्ज करने वाले, नर्सिग होम, डायग्नोस्टिक सेंटर व पैथालॉजी सुविधा के लिए यहां बुजुर्ग फोन कर सकते हैं।

एक नजर में

  • 2013 में सेल की हुई शुरुआत
  • 401 रजिस्ट्रेशन अब तक हुए
  • 24 घंटे मदद को खुला रहता है
  • हेल्पलाइन नंबर 9454403882

पांच साल में रजिस्ट्रेशन

  • 2016 में 84
  • 2017 में 97
  • 2018 में 92
  • 2019 में 70
  • 2020 में 29
  • 2021 में अब तक 13 

Edited By: Anurag Gupta