लखनऊ, [पुलक त्रिपाठी]। चुनावी बिगुल के साथ ही बहुजन समाज पार्टी ने भी अपनी बिसात बिछानी शुरू कर दी है। राजधानी लखनऊ की सभी नौ सीटाें के लिए रणनीति बन चुकी है। जोर आजमाइश के इस मुकाबले में संघर्ष तगड़ा है, मगर बहुजन समाज पार्टी के पास इन सभी सीटों पर कब्जा करने का अच्छा मौका है। बशर्ते इसके लिए साल 2017 की अपनी खामियों को दूर करना होगा। जमीनी कसरत बढ़ानी हाेगी।

साल 2017 के चुनावों परिणामों को देखा जाए तो बीएसपी का प्रदर्शन ठीक रहा। मगर पार्टी नौ सीटों पर खाता खोलने में सफल नहीं हो सकी। विधानसभा वार बात की जाए तो बक्शी का तालाब में बीएसपी दूसरे स्थान पर रही। यहां बीएसपी ने अपनी लड़ाई मजबूती से लड़ी। मगर भाजपा प्रत्याशी को मुकाबले में हरा न सकी। मलिहाबाद में बीएसपी का प्रदर्शन अच्छा नहीं रहा था। यहां भी कमल और साइकिल ने हाथी को काफी पीछे छोड़ दिया था। बात अगर सरोजनी नगर सीट की जाए तो यहां हाथी ने साइकिल को कांटे की टक्कर दी थी।

यहां हाथी महज 2530 वोटों से ही हाथी साइकिल से पीछे रहा। हालांकि इस सीट पर भाजपा प्रत्याशी का प्रदर्शन काफी उम्दा रहा। लखनऊ पश्चिम की बात की जाए तो यहां भी हाथी काफी सुस्त रहा। नतीजतन कमल और साइकिल ने हाथी को काफी पीछे छोड़ दिया। हाथी की यही सुस्त चाल उत्तर विधानसभा, मध्य विधानसभा, कैंट और पूर्व विधानसभा क्षेत्र में भी देखने को मिली थी। इन चारों विधानसभा में भी बीएसपी उम्मीदवार को बड़े अंतर से हार का सामना करना पड़ा था।

मोहनलालगंज सीट इस बार भी होगी खासः विधान सभा चुनाव 2017 में मोहनलालगंज सीट हाल के बावजूद बीएसपी के लिए बेहद खास रही। मोहनलालगंज में हाथी और साइकिल की रफ्तार बेहद आस पास रहीं। साइकिल और हाथी के बीच मामूली अंतर ने पूरा गेम ही पलट दिया। बीएसपी प्रत्याशी को महज 530 मतों से न सिर्फ हार का सामना करना पड़ा बल्कि एक मजबूत सीट को भी गंवाना पड़ा। ऐसे में इस मोहनलालगंज सीट इस बार भी बीएसपी के लिए बेहद अहम रहेगी।

Edited By: Vikas Mishra