लखनऊ, राज्य ब्यूरो। UPSSSC PET Result 2022 उत्तर अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (यूपीएसएसएससी) ने बुधवार को प्रारंभिक अर्हता परीक्षा (पीईटी)-2022 का परिणाम घोषित कर दिया। इस परीक्षा में 25,23,478 अभ्यर्थी शामिल हुए थे और सभी का स्कोर कार्ड जारी कर दिया गया है। इसमें 612 अभ्यर्थियों का रिजल्ट सशर्त घोषित किया गया है। यह स्कोर कार्ड एक वर्ष के लिए मान्य होगा। विभिन्न सरकारी विभागों में भर्ती के लिए आयोजित होने वाली परीक्षाओं में यह अभ्यर्थी अपने स्कोर के माध्यम से सम्मिलित हो सकेंगे।

यूपी के 1,899 केंद्रों पर आयोजित हुई थी परीक्षा

यह परीक्षा बीते 15 व 16 अक्टूबर 2022 को प्रदेश भर में 1,899 केंद्रों पर आयोजित हुई थी। यूपीएसएसएससी के अध्यक्ष प्रवीर कुमार ने बताया कि आयोग की वेबसाइट upsssc.gov.in पर उपलब्ध है। अब इस परिणाम के आधार पर विभिन्न विभागों में विभिन्न पदों पर भर्ती के लिए अभ्यर्थियों की छंटनी की जा सकेगी। उन्होंने बताया कि सामान्यता कोई भी विभाग भर्ती परीक्षा में विज्ञापित पदों के सापेक्ष 15 गुणा अभ्यर्थियों को आवेदन के लिए आमंत्रित करता है।

पीईटी में 37 लाख से अधिक अभ्यर्थियों ने क‍िया था आवेदन

मालूम हो कि पीईटी में शामिल होने के लिए 37 लाख से अधिक अभ्यर्थियों ने आवेदन किया था। करीब 33 प्रतिशत अभ्यर्थी परीक्षा में शामिल नहीं हुए थे। उन्होंने बताया कि यह विश्व की सबसे बड़ी पेपर-पेंसिल आधारित भर्ती परीक्षा है जो ओएमआर शीट पर कराई गई। चीन में विश्वविद्यालय व कालेजों में प्रवेश के लिए ओएमआर बेस्ड गाओकाओ परीक्षा आयोजित की जाती है लेकिन वह भर्ती परीक्षा नहीं है। वहीं भारतीय रेलवे द्वारा आयोजित भर्ती परीक्षा में इससे ज्यादा अभ्यर्थी शामिल होते हैं, लेकिन वह कंप्यूटर आधारित परीक्षा है।

100 रुपये शुल्क लगाने से आईं सिर्फ 600 आपत्तियां

पीईटी में प्रश्नों के उत्तर पर आपत्ति के लिए पहली बार 100 रुपये शुल्क का प्राविधान किया गया था। आयोग के अध्यक्ष प्रवीर कुमार ने बताया कि इसके कारण 600 आपत्तियां ही आईं और परिणाम घोषित करने में कठिनाई नहीं हुई। पहले निश्शुल्क सुविधा होने पर लेखपाल भर्ती परीक्षा में दो लाख अभ्यर्थी शामिल हुए थे और उसमें से 79 लाख ने प्रश्नों के उत्तर पर आपत्ति की थी। ऐसे में परिणाम निकालने में कठिनाई हुई।

प्रश्नपत्र की कोडिंग व उत्तर के बदले गए क्रम

पीईटी-2022 में नकल न हो सके इसके लिए पर्याप्त इंतजाम किए गए थे। आठ अंकों के प्रश्नपत्र में प्रश्नपत्र की सीरीज की कोडिंग की गई थी, ताकि कोई यह न जान सके कि उसे कौन से सीरीज का पेपर मिला है। वहीं प्रश्नों के उत्तर के क्रम में भी बदलाव किया गया था। जिसके कारण नकल पर नकेल कसी जा सकी।

Edited By: Prabhapunj Mishra

जागरण फॉलो करें और रहे हर खबर से अपडेट