समाजवादी पार्टी ने शिक्षक एमएलसी चुनाव में बदली रणनीति, भाजपा के दो बागी चेहरों पर दांव
Samajwadi Party MLC Candidates: ऐसे में सपा का उन्हें सीधे अपने प्रत्याशी के रूप में उतारना मुकाबले को बहुकोणीय बनाने ...और पढ़ें

सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव
HighLights
आगरा सीट पर मौजूदा निर्दलीय एमएलसी आकाश अग्रवाल को उतारा
गोरखपुर-फैजाबाद सीट पर भाजपा के बागी डॉ.संजयन त्रिपाठी को टिकट
स्वामी प्रसाद मौर्य के कदम की अखिलेश यादव को जानकारी नहीं
राज्य ब्यूरो, लखनऊ: उत्तर प्रदेश के विधान परिषद के शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों के चुनाव से ठीक पहले समाजवादी पार्टी ने अपनी रणनीति में बड़ा बदलाव करते हुए दो घोषित प्रत्याशियों के टिकट काटकर भाजपा खेमे से अलग हुए प्रभावशाली चेहरों पर दांव लगाया है।
सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने शनिवार को पार्टी मुख्यालय में पत्रकार वार्ता के दौरान आगरा खंड शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से पहले घोषित प्रत्याशी डॉ. प्रकाशचंद्र गुप्ता के स्थान पर मौजूदा निर्दलीय एमएलसी डॉ. आकाश अग्रवाल और गोरखपुर-फैजाबाद शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से कमलेश यादव की जगह डॉ. संजयन त्रिपाठी को प्रत्याशी बनाने की घोषणा की।
चुनाव से ठीक पहले दोनों बदलाव को लेकर समाजवादी पार्टी में भी खलबली मची है। सपा ने 28 सितंबर को जिन 11 प्रत्याशियों की अधिकृत घोषणा की थी, उसमें आगरा शिक्षक सीट से प्रकाशचंद्र गुप्ता और गोरखपुर-फैजाबाद से कमलेश यादव का नाम था। अब दोनों सीटों पर चेहरा बदल दिया गया है। अखिलेश यादव ने कहा कि पूर्व घोषित दोनों प्रत्याशियों की सहमति से यह बदलाव किया गया है और पार्टी उनके त्याग की आभारी है।
आगरा में आकाश अग्रवाल पहले भाजपा से टिकट के दावेदार थे। भाजपा ने यहां से इंजीनियर हरिकिशोर तिवारी को प्रत्याशी बनाया है। आकाश अग्रवाल वर्तमान में इसी शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से निर्दलीय एमएलसी हैं। नामांकन प्रक्रिया शुरू होने पर उन्होंने भी पर्चा खरीदा था। ऐसे में सपा का उन्हें सीधे अपने प्रत्याशी के रूप में उतारना मुकाबले को बहुकोणीय बनाने के बजाय अपने पक्ष में स्थापित चेहरे को पार्टी के साथ जोड़ने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।
वहीं गोरखपुर-फैजाबाद सीट पर भी कहानी कुछ ऐसी ही है। भाजपा ने ध्रुव कुमार त्रिपाठी को प्रत्याशी बनाया। टिकट के दावेदार डॉ. संजयन त्रिपाठी ने इसके बाद भाजपा से बगावत का रुख अपनाया और पार्टी का झंडा अपनी गाड़ी से उतारकर निर्दलीय चुनाव लड़ने की घोषणा की थी। शनिवार को वह सपा में शामिल हुए और अखिलेश यादव ने उन्हें इसी सीट से पार्टी प्रत्याशी घोषित कर दिया।
सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने भाजपा सरकार पर शिक्षा और परीक्षा व्यवस्था को कमजोर करने का आरोप लगाते हुए तदर्थ शिक्षकों, वित्तविहीन शिक्षकों, शिक्षामित्रों और पुरानी पेंशन योजना जैसे मुद्दों को सपा के घोषणा पत्र में शामिल करने की बात कही। उन्होंने कार्यकर्ताओं से सभी शिक्षक व स्नातक सीटों पर पार्टी प्रत्याशियों की जीत के लिए जुटने का आह्वान किया।
स्वामी प्रसाद मौर्य की राहुल गांधी से मुलाकात और उनकी अपनी पार्टी के इंडी गठबंधन में शामिल होने के सवाल पर अखिलेश ने तंज करते हुए कहा कि ये भर्ती कहां होती है, इसका कोई फार्म निकलता है, ये भर्ती मेरी जानकारी में नहीं है। सपा प्रमुख क्या खुद विधान सभा चुनाव लड़ेंगे, इस सवाल पर उन्होंने कहा, अच्छा तो यही होगा कि बिना लड़े ही मुख्यमंत्री बन जाऊं।
विश्व हिंदू परिषद के पोस्टर लगाकर अखिलेश यादव को धर्म संसद का आमंत्रण देने का सवाल उन्होंने अनसुना किया और शिक्षा, भर्ती स्वास्थ्य सुविधाओं की बदहाली के मुद्दे गिना दिए। सुभासपा अध्यक्ष ओमप्रकाश राजभर के बयान पर कहा कि ये भाजपा की रणनीति है, भाजपा ने अपने सहयोगी दलों की मोलभाव की क्षमता खत्म कर दी है।
