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आरपीएफ ने हटाई झोपड़ियां कुछ ही देर में फिर आबाद

जागरण संवाददाता, लखनऊ : जिस बादशाहनगर से डालीगंज स्टेशन के बीच पिछले साल दिसंबर में 300 से

By JagranEdited By: Published: Sat, 21 Jul 2018 08:00 AM (IST)Updated: Sat, 21 Jul 2018 08:00 AM (IST)
आरपीएफ ने हटाई झोपड़ियां
कुछ ही देर में फिर आबाद
आरपीएफ ने हटाई झोपड़ियां कुछ ही देर में फिर आबाद

जागरण संवाददाता, लखनऊ : जिस बादशाहनगर से डालीगंज स्टेशन के बीच पिछले साल दिसंबर में 300 से ज्यादा पैंड्रॉल क्लिप दो घंटे में गायब हो गई थीं, इस कारण कैफियात एक्सप्रेस दुर्घटनाग्रस्त होने से बची थी। वहां लाइन किनारे आबाद झोपड़ियों को हटाने में आरपीएफ सिर्फ रस्म अदायगी कर रही है। आरपीएफ अब तक कई बार इन झोपड़ियों को हटाया, लेकिन कुछ समय में ही वह फिर से आबाद हो गई। शुक्रवार को भी आरपीएफ ने झोपड़ियों को हटाया। कुछ पक्के निर्माण भी तोड़े। इसके कुछ देर बाद फिर से लाइन किनारे यह झोपड़ियां बन गई।

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गोमतीनगर से लेकर बादशाहनगर और डालीगंज तक रेल लाइन किनारे अवैध निर्माण हो गए हैं। यहां झोपड़ियों में असामाजिक तत्व रहते हैं, जो कि स्मैक का सेवन करते हैं। आसपास की कालोनियों में भी यह चोरी भी कर लेते हैं। पिछले साल ही इन चोरों ने 300 से ज्यादा पैंड्रॉल क्लिप और स्लीपर की फिटिंग को निकाल दिया था। जिस कारण लखनऊ आ रही कैफियात एक्सप्रेस दुर्घटना का शिकार होने से बची थी। इसके बाद जांच हुई तो पता चला कि इन झोपड़ियों में ही ऐसे अपराधी रहते हैं जो चोरी की घटनाओं को अंजाम देते हैं। आरोप यह भी था कि पूर्वोत्तर रेलवे के इंजीनिय¨रग अनुभाग और आरपीएफ की मदद से यह अवैध निर्माण कराए गए हैं। इस घटना के बाद से अब तक कई बार अतिक्रमण हटाने की रस्म अदायगी की गई। जबकि इसका कोई स्थायी उपाय नहीं किया गया। सूत्रों के मुताबिक आरपीएफ कने कई बार इंजीनिय¨रग अनुभाग से अतिक्रमण हटाने के बाद यहां रेलिंग लगाने की मांग की गई है। जिस पर इंजीनिय¨रग अनुभाग बजट का रोना रोकर कार्रवाई नहीं करता है। शुक्रवार को बादशाहनगर गेट संख्या चार से छह के बीच करीब 70 झोपड़ियों को हटाया गया। हालांकि इस दौरान आरपीएफ को वहा विरोध भी झेलना पड़ा।


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