लखनऊ [संदीप पांडेय]। केजीएमयू में ऑनलाइन सिस्टम धांधली का शिकार हो गया है। यहां रसीदों में ही नहीं दवाओं में भी जमकर खेल किया गया है। फार्मेसी में तैनात कर्मियों ने स्टोर में आइसीयू में दवाएं आधी भेजीं, वहीं कंप्यूटर पर  पूरी चढ़ा दीं। यह धांधली इश्यू व रिसीविंग पेपर में दर्ज अलग-अलग स्टॉक से उजागर हो रही है।

केजीएमयू ई-हॉस्पिटल सुविधा से लैस है। यहां मरीजों की बिलिंग से लेकर फार्मेसी ऑनलाइन है। ऐसे में वार्डों, आइसीयू, ओटी में दवाओं का इंडेंट भी ऑनलाइन भेजने का नियम है। इसके बाद स्टोर से दवाएं वार्ड के लिए जारी की जाती हैं। वहीं फार्मेसी में तैनात कर्मी ऑनलाइन के नाम पर धांधली कर रहे हैं। वह कंप्यूटरीकृत रिकॉर्ड में हेराफेरी कर लाखों के वारे-न्यारे कर रहे हैं।

1200 इंजेक्शन जारी, वार्ड में पहुंचे 500

ट्रॉमा सेंटर के इमरजेंसी मेडिसिन विभाग के आइसीयू से 20 नवंबर 2018 को नौ दवाओं का ऑनलाइन इंडेंट भेजा गया। इसमें 1200 सिफोपेराजोन सलबेक्टम इंजेक्शन भी मांगे गए। वहीं स्टोर से इंडेंट के सापेक्ष 500 इंजेक्शन ही जारी किए गए। बावजूद, स्टोर के कंप्यूटर पर  1200 इंजेक्शन जारी करना दर्ज कर दिया गया। वहीं वार्ड में 11:43 पर रिसीविंग पेपर में पांच सौ इंजेक्शन ही पहुंचाना दर्ज है। इन इंजेक्शन का बैच नंबर एयूसी 48003 है।

200 कैथेटर, कंप्यूटर पर एक हजार

ट्रॉमा के दूसरे आइसीयू से 20 नवंबर 2018 को 12 दवाओं का इंडेंट बनाकर भेजा गया। इसमें एक हजार फॉली कैथेटर की डिमांड की गई। स्टोर से वार्ड को 200 कैथेटर ही भेजे गए। दोपहर दो बजकर 11 मिनट पर रिसीविंग में भी 200 कैथेटर दर्ज हैं। वहीं स्टोर के रिकॉर्ड में 1200 कैथेटर निर्गत दर्ज कर दिए गए।

300 दर्ज, भेजे 100 कैथेटर

22 अप्रैल 2019 को ट्रॉमा सेंटर की ओटी से स्टोर को चार दवाओं का इंडेंट भेजा गया। इसमें 300 कैथेटर भी मांगे गए थे। वहीं 10:47 की रिसीविंग में 100 कैथेटर की ओटी पहुंचे। वहीं स्टोर के कंप्यूटर पर 300 निर्गत करना दर्ज कर दिया।

क्या कहते हैं सीएमएस?

सीएमएस डॉ. एसएन शंखवार का कहना है कि यह गंभीर मामला है। स्टोर से जारी व आइसीयू में रिसीव किए गए इंडेंट का मिलान किया जाएगा। गड़बड़ी साबित होने पर दोषियों के खिलाफ सख्त एक्शन लिया जाएगा।

 

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Posted By: Divyansh Rastogi

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