लखनऊ में बलरामपुर अस्पताल के जर्जर भवन में सांस एवं टीबी रोगियों का इलाज, छत से टपकता है पानी
Balrampur Hospital Lucknow: भवन की छत से पानी टपकने के साथ ही दीवारों और छत का प्लास्टर उखड़ गया है। ...और पढ़ें

बलरामपुर अस्पताल को इलाज की जरूरत, दीवारों और छत का प्लास्टर उखड़ गया
HighLights
बदहाल भवन में श्वसन रोग समेत कई संवेदनशील विभागों की ओपीडी संचालित
सांस के रोगी के लिए बेहद घातक है नमी और सीलन
जागरण संवाददाता, लखनऊ। राजधानी के बलरामपुर अस्पताल में गंभीर रोग से जूझ रहे मरीजों का इलाज ऐसे भवन में किया जा रहा है, जिसको स्वयं की इलाज की जरूरत है। यह सभी भवन लंबे समय से बदहाल स्थिति में है।
यहां पर बदहाली का आलम यह है कि भवन की छत से पानी टपकने के साथ ही दीवारों और छत का प्लास्टर उखड़ गया है। नमी के कारण दीवारों पर काई भी जम गई है, जिससे संक्रमण फैलने का खतरा बढ़ गया है।
खास बात है कि इस भवन में फेफड़ा व श्वसन रोग जैसे संवेदनशील विभाग की ओपीडी चलती है। नमी और काई दोनों ही सांस के रोगियों के लिए बेहद घातक हैं। इसी भवन में एचआइवी जांच और दिव्यांग प्रमाण पत्र से संबंधित कार्यालय का भी संचालन होता है।
श्वसन रोगियों के लिए ज्यादा जोखिम
नम और सीलन वाले वातावरण में फफूंद और अन्य सूक्ष्म जीवों की वृद्धि हो सकती है। यह स्थिति सांस की बीमारी से पीड़ित मरीजों के लिए परेशानी पैदा कर सकती है। कमजोर प्रतिरोधक क्षमता वाले रोगियों में संक्रमण का खतरा और बढ़ सकता है। ऐसे मरीजों को उपचार के साथ संक्रमण से बचाव के लिए बेहतर जरूरी है।
मरीजों और तीमारदारों के लिए परेशानी
जर्जर भवन में इलाज की व्यवस्था मरीजों और तीमारदारों के लिए परेशानी का कारण बनी हुई है। एक तरफ अस्पतालों में संक्रमण नियंत्रण को लेकर लगातार जोर दिया जा रहा है, वहीं दूसरी तरफ श्वसन रोगियों के इलाज वाले भवन की ऐसी स्थिति व्यवस्था पर सवाल खड़े होते हैं। मरीजों का कहना है कि भवन का जल्द निरीक्षण कराकर छत की लीकेज, सीलन और अन्य क्षतिग्रस्त हिस्सों की मरम्मत कराई जाए, ताकि उन्हें सुरक्षित और संक्रमण मुक्त वातावरण मिल सके। इस भवन में हर दिन करीब 200-250 मरीज आते हैं।
कैंसर पीड़िता से अभद्रता
बलरामपुर अस्पताल के आर्थोपेडिक्स विभाग में दिखाने पहुंची खदरा निवासी 48 वर्षीय रिहाना खातून के साथ एक कर्मचारी ने अभद्रता की। खातून का आरोप है कि देर तक चक्कर लगाने के बाद आर्थोपेडिक्स विभाग की ओपीडी तक नहीं पहुंच पा रही थी तो बाल रोग विभाग की ओपीडी के कमरे के बाहर ड्यूटी पर मौजूद कर्मचारी से जानकारी ली, लेकिन सही पता बताने की बजाय कर्मचारी ने ‘अनपढ़-जाहिल’ कहकर भगा दिया।
रिहाना ने बताया कि वह पिछले दो वर्ष से कैंसर से पीड़ित हैं और उनका इलाज केजीएमयू में चल रहा है। हाल ही में कीमोथेरेपी के बाद पैरों में सूजन और दर्द बढ़ गया था। ऐसे में हड्डी रोग विभाग में दिखाने बलरामपुर अस्पताल पहुंची थीं। कर्मचारी के व्यवहार से रिहाना भावुक और नाराज थीं। उन्होंने अस्पताल प्रशासन से शिकायत दर्ज कराने की बात कही।
समस्या के लिए पत्राचार जारी
मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. हिमांशु चतुर्वेदी ने बताया कि भवन के मरम्मत के लिए संबंधित विभाग को दो बार पत्र लिखा जा चुका है। टीम ने निरीक्षण भी किया है। मरम्मत से जुड़ी प्रक्रिया शुरू हो गई है। दो साल पहले इस भवन का प्लास्टर और पुताई कराया गया था। जल्द ही श्वसन रोग समेत अन्य विभागों को दूसरे भवन में शिफ्ट किया जाएगा।
