लखनऊ(राजीव बाजपेयी)। स्वच्छता मिशन को रफ्तार देने के लिए प्रदेश सरकार तमाम दावे कर रही है, लेकिन खुद राजधानी में ही खुले में शौच मुक्त गावों की हालत खस्ता है। दो अक्टूबर तक सूबे के प्रत्येक गाव को ओडीएफ घोषित करने के सरकार की घोषणा को राजधानी के अफसर अमली जामा कैसे पहनाएंगे यह सबसे बड़ा सवाल है। हैरत है कि अब तक सासद आदर्श गाव ही खुले में शौच के अभिशाप से मुक्त नहीं हो पाए हैं।

अब तक सिर्फ 50 गाव ही खुले में शौच मुक्त घोषित

राजधानी में 570 ग्राम पंचायतों में करीब नौ सौ गाव और मजरे हैं। इसी तरह शहरी क्षेत्र जो नगर निगम की सीमा में है, उसमें 110 वार्ड हैं। केंद्र में भाजपा सरकार बनने के बाद स्वच्छता अभियान को लेकर तेजी भले ही आई हो, लेकिन यह है कि गावों को खुले में शौच मुक्त करने की दिशा में प्रगति बहुत धीमी है। राजधानी में अब तक केवल पचास गाव ही खुले में शौच मुक्त घोषित हुए हैं। अब जब सरकार ने ओडीएफ की डेड लाइन तय कर दी है अफसरों के सामने कठिन चुनौती है। सात महीनों में पाच सौ से अधिक ग्राम पंचायतों को ओडीएफ करना है, जो अफसरों के लिए आसान नहीं होगा।

सासदों के गाव भी खुले में शौच मुक्त नहीं

मोदी की आदर्श सासद ग्राम योजना के बाद केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने सरोजनीनगर मे बेंती, पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने माल और भाजपा सासद कौशल किशोर ने आट गढ़ी सौरा को गोद लिया था। योजना का एक साल पूरा हो गया और सासदों ने दूसरे गाव भी गोद ले लिए, लेकिन यह अब तक खुले में शौच के अभिशाप से मुक्त नहीं हो सके हैं।

सचिवों को सौंपी गई जिम्मेदारी

सीएम की घोषणा होते ही प्रशासन हरकत में आया है। दो अक्टूबर तक जिले को ओडीएफ बनाने के लिए ग्राम सचिवों को जिम्मा सौंपा गया है। जिला पंचायत राज अधिकारी प्रदीप कुमार के मुताबिक एक सचिव को कम से कम चार गावों को ओडीएफ घोषित कराने का जिम्मा दिया गया है। शौचालय के लिए बजट सीधा ग्राम पंचायतों को दिया जाएगा, जहा से पैसा सीधे लाभार्थी के खाते में ट्रासफर कर दिया जाएगा।

Posted By: Jagran