यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Jul 03, 2017 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
साक्षात्कार- स्वतंत्र देव सिंहः असल सफलता तभी जब लोग निजी वाहनों से सफर भूल जाएं
स्वतंत्र देव मानते हैं कि उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य में परिवहन और यातायात जैसी समस्याओं का समाधान करना आसान नहीं है। इसके लिए लोगों का सहयोग भी जरूरी है।

लखनऊ (जेएनएन)। मीरजापुर मेें जन्मे स्वतंत्रदेव की पहचान जमीनी व संघर्षशील कार्यकर्ता की रही है। संगठनात्मक कार्यो में दक्षता रखने की वजह से वह कार्यकर्ताओं में बेहद लोकप्रिय हैं। बिना किसी सदन में सदस्य निर्वाचित हुए उनको मंत्रिमंडल में शामिल करके मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उनकी क्षमताओं पर भरोसा किया है और परिवहन जैसे अहम विभाग के राज्यमंत्री (स्वंतत्र प्रभार) पद की जिम्मेदारी सौंपी है। स्वतंत्र देव मानते हैं कि उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य में परिवहन और यातायात जैसी समस्याओं का समाधान करना आसान नहीं है। इसके लिए लोगों का सहयोग भी जरूरी है। विभाग से जुड़े कुछ अहम मुद्दों पर स्वतंत्रदेव सिंह से विशेष संवाददाता अवनीश त्यागी की बातचीत के प्रमुख अंश-
परिवहन मंत्री के तौर पर बड़ी चुनौती क्या मानते हैं?
चुनौतियां अनेक हैं। पूर्ववर्ती सरकारों ने परिवहन विभाग को केवल निजी कमाई का माध्यम बनाए रखा। नई सरकार ने केवल 100 दिनों में 3725 ऐसे गांवों को बस सेवा से जोड़ा जहां कभी बस नहीं गई थी। सबसे बड़ी चुनौती समाज के अंतिम व्यक्ति तक सुविधायुक्त परिवहन सेवा उपलब्ध कराना है।
रोडवेज की खस्ताहाल बसों में सफर करना जोखिम भरा क्यों माना जाता है?
पिछली सरकारों के कारनामों से रोडवेज की छवि धूमिल हुई, जिसकी भरपाई मुश्किल जरूर है, लेकिन असंभव नहीं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मंशा सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को लोकप्रिय बनाने व स्वीकार्यता बढ़ाने की है। रोडवेज बसों व अड््डों को अत्याधुनिक सुविधाओं व तकनीकी से लैस किया जा रहा है। मेरा मानना है कि रोडवेज तब सफल होगी जब लोग निजी वाहनों से सफर करना भूल जाएं।
खटारा बसें ही नहीं रोडवेज के ड्राइवरों और परिचालकों की वेशभूषा और व्यवहार आदि से भी जनता खुश नहीं।
इस ओर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। यात्रियों से नियमित फीडबैक लेने के लिए ट्विटर, फेसबुक एकाउंट व वाट्सएप जैसे माध्यम अपनाए जा रहे हैं। शराब पिये हुए कोई चालक या परिचालक मिले तो फोटो खींचकर 9415049696 वाट्सएप नंबर पर डालें, तत्काल एक्शन होगा। रेलवे की तर्ज पर ट्विटर आदि पर दर्ज शिकायत पर फौरी कार्रवाई करायी जा रही है। ड्राइवर कंडक्टर और अन्य कर्मचारियों के व्यवहार में सुधार लाने को कार्यशालाएं होगी।
रोडवेज के बस अड्डों के हालात बहुत खराब हैं। यात्रियों को मूलभूत सुविधाएं भी क्यों नहीं मिल पाती?
जल्द हालात बदलते दिखेंगे। बसों व अड्डों में स्वच्छता को प्राथमिकता में शामिल किया गया है। पीपीपी मोड पर कार्य कराने की योजना है। बस अड्डों को वाई-फाई सुविधायुक्त बनाया जाएगा। 54 जिलों के 63 बस अड््डे वाई फाई किए जा चुके है। वाराणसी, इलाहाबाद, रामपुर, हरदोई, आजमगढ़ और मुरादाबाद में वाटर कूलर और एटीएम भी स्थापित हैं।
रोडवेज में ईंधन चोरी लाइलाज समस्या बन चुकी है?
इसके लिए खास इंतजाम किए जा रहे है। परिवहन निगम के 73 डिपो में आटोमेटेड फ्यूल मैनेंजमेंट सिस्टम लागू किया गया है। एक नया मोबाइल एप भी बना है। जिससे बस संचालन की स्थिति, सीट आरक्षण व अन्य फीडबैक सुविधा भी मिलेगी।
एक निजी बस से कई परिवार पलते हैं परंतु रोडवेज की बसें सरकार पर बोझ क्यूं बनी रहती है?
यह सच है कि अभी तक ऐसा ही होता आया है। अब हालात बदलने की कोशिशें गंभीरता से हो रही हैं। नतीजा है कि रोडवेज से करीब चार करोड़ रुपये मुनाफा प्रतिदिन मिलने लगा है। अन्य प्रदेशों में भी रोडवेज बस सेवाएं बढ़ाने के लिए अनुबंध किए जाएंगे। राजस्थान से अनुबंध हो चुका है और 11 अन्य राज्यों से जल्दी करार हो जाएगा।
सीमित संसाधनों में सबके लिए बस सेवा कैसे उपलब्ध कराएंगे?
देखिए, पूर्ववर्ती सरकारें इस ओर गंभीरता बना कर रखतीं तो हालात इतने जटिल नहीं होते। बुंदेलखंड की जनता के लिए पहली बार वातानुकूलित बस सेवा योगी सरकार ने ही उपलब्ध कराई है। संसाधन सीमित हैं परंतु नई बसें खरीदकर व अनुबंधित बसों की संख्या बढ़ाकर समाज के अंतिम व्यक्ति तक बस सेवा पहुंचाने का काम होगा।
आरटीओ कार्यालयों को लेकर लोगों की धारणा बेहद खराब है। इसे सुधारने के लिए क्या कदम उठाएंगे?
परिवहन कार्यालयों को अब भ्रष्टाचार का अड्डा नहीं बनने देंगे। प्रदेश में ई-चालान व्यवस्था लागू हो चुकी है। चालान संबंधित सभी कार्यवाही पारदर्शी होगी। अन्य सेवाएं जैसे पंजीयन प्रमाणपत्र लेना, एनओसी, पता परिवर्तन, स्वामित्व स्थानांतरण आदि कार्य आनलाइन होंगे। वहीं, 'सारथी साफ्टवेयर से लर्निंग व स्थायी लाइसेंस अब ऑनलाइन आवेदन पर मिलेंगे। सरकार की मंशा है कि लोगों को कम से कम आरटीओ कार्यालय के चक्कर लगाने पड़े।
ओवर लोडिंग व डग्गामारी जैसी स्थायी समस्याओं से कैसे निपटेंगे?
इस ओर सरकार काफी गंभीर है और इस का असर दिखने लगा है। भ्रष्टाचार किसी सूरत में बर्दाश्त न होगा। जनसहयोग इसी तरह मिलता रहा तो समस्या का स्थायी समाधान कर लिया जाएगा।
कांग्रेस सिंह से बने स्वतंत्र देव
मंत्री स्वतंत्रदेव सिंह के बारे में यह तथ्य कम लोग जानते होंगे कि उनका मूल नाम कांग्रेस सिंह था। यह नाम उनके परिवारीजन ने दिया, लेकिन वर्ष 1984 से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ में सक्रियता बढ़ी तो मन मस्तिष्क पूरी तरह से बदल गया। सिख दंगों ने ऐसे झकझोरा कि कांग्रेस नाम से ही तौबा कर ली और नाम कांग्रेस सिंह से बदलकर स्वतंत्रदेव सिंह कर लिया।
