लखनऊ, जागरण संवाददाता। ऐशबाग रामलीला रामलीला मैदान में शुक्रवार को रात आठ बजे 80 फीट ऊंचे रावण के पुतले का दहन होगा। रामलीला समिति के अध्यक्ष हरिश्चंद्र अग्रवाल ने बताया कि धार्मिक अलगाववाद और मातांतरण के विनाश का रावण उप मुख्यमंत्री डा.दिनेश शर्मा जलाएंगे। दहन में महापौर संयुक्ता भाटिया, नगर विकास मंत्री आशुतोष टंडन व विधि एवं न्यायमंत्री ब्रजेश पाठक शामिल होंगे। 

रामलीला मंचन के बाद अब रावण दहन में भी कोरोना का असर दिखाई दे रहा है। संयोजक आदित्य द्विवेदी ने बताया कि सामान्य दर्शकों का शाम सात बजे के बाद प्रवेश वर्जित होगा। आतिशबाजी के साथ दहन हाेगा। डालीगंज के मौसमगंज रामलीला समिति के निर्देशक शिव कुमार ने बताया कि छोटा पुतला जलाया जाएगा। एक दर्जन स्थानों पर हर साल होने वाला रावण दहन इस बार कुछ ही स्थानों पर होगा। कानपुर रोड के एलडीए कालोनी और आलमबाग में कल्याणपुर, एचएएल व आरडीएसओ में रावण दहन नही होगा। 

ओम ब्राह्मण सभा की ओर से होगी प्रार्थनाः ओम ब्राह्मण महासभा की ओर से दशहरे पर विशेष जाप के साथ कोरोना मुक्त समाज की कामना की जाएगी। संस्थापक धनंजय द्विवेदी ने बताया कि दोपहर तीन बजे संरक्षक अनुराग पांडेय के सानिध्य में चौक में परशुराम जी की पूजा-अर्चना होगी। कोरोना संक्रमण से बचने के सुरक्षा उपायों के साथ समाज के लाेग पूजन में शामिल होंगे।

यहां जलेगा रावण का पुतला 

  • शाम सात बजे      रामलीला मैदान                     चिनहट
  • शाम सात बजे      बड़ी जुगौली रामलीला मैदान   गोमतीनगर
  • शाम सात बजे      रामलीला मंचन मैदान,           सदर
  • शाम सात बजे      मौसमगंज रामलीला मैदान      डालीगंज
  • शाम आठ बजे      रामलीला मैदान                    ऐशबाग
  • शाम आठ बजे      पक्कापुल के पास                 खदरा

विजयादशमी व विजय मुहूर्तः आचार्य शक्तिधर त्रिपाठी ने बतायाकि आश्विन शुक्ल दशमी को विजयादशमी या दशहरे के रूप में पर्व मनाया जाता है। श्री राम का लंका विजय तथा मां दुर्गा का महिषासुर मर्दिनी अवतार दशमी को हुआ था, इसलिए इसे विजयादशमी भी कहा जाता है। यह त्योहार बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है। इस दिन स्वयं सिद्ध अबूझ मुहूर्त होता है। कोई भी नया काम शुरू करना शुभ होता है। इस दिन रावण मेघनाद व कुंभकर्ण के पुतले जलाने की परंपरा है। आचार्य एसएस नागपाल ने बताया कि नीलकंठ पक्षी का दर्शन बहुत शुभ माना जाता है। ये क्षत्रियों का बहुत बड़ा पर्व है। इस दिन विजय मुहूर्त में अस्त्र- शस्त्र पूजन का विधान है। मां दुर्गा भगवान श्रीराम की पूजा , अपराजिता पूजन, और शमी पूजन किया जाता है।

शुक्रवार को दोपहर की बेला में ईशान दिशा में अपराजिता देवी के साथ जया और विजयादेवी का पूजन किया जाता है। शमी वृक्ष के पूजन का भी विधान है। आचार्य आनंद दुबे ने बताया कि दशमी तिथि का मान 14 अक्टूबर को रात्रि 9:53 से 15 अक्टूबर को रात्रि 8:22 बजे तक है।15 अक्टूबर को दोपहर 1:47 से 2:33 बजे तक विजया मुहूर्त है। दापेहर 1:01 बजे से 3:20 तक अपराजिता देवी का पूजन, शमी वृक्ष पूजन और सीमा उल्लंघन कर्म (शत्रु क्षेत्र में प्रवेश करना ) करना शुभ होग। आचार्य अरुण कुमार मिश्रा ने बताया कि महाभारत काल में अर्जुन ने अज्ञातवास के समय अपना धनुष एक शमी वृक्ष पर रखा था और वृहंलता के वेश में राजा विराट के यहाँ नौकरी कर ली थी। उसके उपरांत अर्जुन ने शमी वृक्ष से अपने हथियार उठाकर शत्रुओं पर विजय प्राप्त की थी। भगवान रामचंद्र द्वारा लंका पर चढ़ाई के समय शमी वृक्ष ने रामचंद्र की विजय का उद्घोष किया था, इसीलिए विजय काल मे शमी का पूजन किया जाता है। मराठी के समाज के उमेश पाटिल ने बताया कि हथियारों की पूजा की जाएगी।

बिकने लगा रेडीमेड रावण, खरीदार का इंतजारः यदि आप अपने घर के आसपास रावण का पुतला जलाना चाहते हैं तो अपने इलाके के टिम्बर स्टोर से संपर्क करके अपनी पसंद का रावण बनवा सकते हैं। रायबरेली रोड के उतरेटिया रेलवे पुल के पास तो रावण के पुतलों की मंडी लगती है। उतरेटिया में सबसे छोटे (पांच फीट) पुतले की कीमत 800 से 1000 रुपये है। आर्डर पर 20 फीट का पुतला दो से आठ हजार रुपये में मिलेगा। हालांकि तक दुकानदारों के पास लेने वालों की संख्या बहत कम है। डालीगंज बांसमंडी रोड पर रावण का पुतला बनाकर बेचने वाले सुनील बताते हैं कि इस बार बांस महंगा होने से कीमत बढ़ गई है। पिछले साल 25 फीट का जो बांस 800 रुपये में था वह इस बार एक हजार रुपये में हो गया है।

  • जैसा रावण              वैसा दाम
  • पांच फीट                800-1000
  • सात फीट                1500-2500
  • 10 फीट                  3500-5000
  • 20 फीट                  2000 से 8000

(दाम रुपये में )

Edited By: Vikas Mishra