अयोध्या, [रमाशरण अवस्थी]। भव्य मंदिर की बाट जोह रहे रामलला सात करोड़ से भी अधिक की नकदी के मालिक हैं। उनकी यह पूंजी चढ़ावा से एकत्र हुई है। जनवरी 1993 में अधिग्रहण के बाद रामलला का स्टेट बैंक में खाता खोला गया और इसमें व्यय से बचे हुए रुपये जमा किए जाने लगे। शुरू में रामलला का मासिक चढ़ावा 60-70 हजार के बीच था पर हाल के कुछ वर्षों में बढ़ कर पांच से छह लाख रुपये मासिक तक जा पहुंचा है। 

अधिग्रहीत परिसर के पदेन रिसीवर मंडलायुक्त की देख-रेख में इसी चढ़ावा से रामलला का खर्च भी चलता है। अर्चकों का पारिश्रमिक, पूजन सामग्री एवं भोग-राग के लिए महीने में करीब एक लाख रुपये मासिक की जरूरत पड़ती है। राम जन्मोत्सव के लिए 51 हजार एवं सावन मेला के लिए 11 हजार की व्यवस्था अलग से होती है। हालांकि यह आर्थिक परि²श्य देश के कई अन्य प्रमुख देवालयों के आगे फीका है और गाहे-बगाहे रामलला के व्यय में अभाव को लेकर अर्चक असंतोष भी जताते हैं। 

फिलहाल, मंदिर-मस्जिद विवाद के फैसले की प्रतीक्षा के बीच रामलला के मुख्य अर्चक आचार्य सत्येंद्रदास उम्मीदजदा हैं। वे कहते हैं, रामलला के भक्तों की संख्या करोड़ों में है और मंदिर बनने पर रामलला के चढ़ावे में कई गुना की वृद्धि होगी। इस धन से रामलला की पूंजी में तो इजाफा होगा ही, सेवा-संस्कृति के अनेक प्रकल्प भी चल सकेंगे।

 

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