अयोध्या, जेएनएन। कोई और वर्ष होता तो भगवान राम का छठ्योत्सव भव्यता का पर्याय बनता, पर इस वर्ष वासंतिक नवरात्र एवं राम जन्मोत्सव की तरह छठ्योत्सव भी प्रतीकात्मक पर्व के रूप में मनाया गया। अधिकांश मंदिरों में यह उत्सव स्थगित रखा गया, तो जानकीमहल जैसे कुछ मंदिरों में पूरी सादगी और कोरोना को लेकर निर्धारित शारीरिक दूरी का पालन सुनिश्चित कराने के साथ मनाया गया। सायं मंदिर में स्थापित युगल विग्रह के सम्मुख 56 भोग के रूप भांति-भांति का व्यंजन प्रस्तुत किए जाने के साथ जेवनार गायन की महफिल सजी।

पूर्व के वर्षों की तरह श्रद्धालुओं की जमघट के विपरीत इस महफिल में कुछ चुङ्क्षनदा श्रद्धालुओं को ही शामिल होने की इजाजत मिली। हालांकि राघवेंद्रशरण, लक्ष्मणशरण एवं सरयूप्रसाद जैसे मंझे गायकों ने अपनी प्रस्तुति से समां बांधने में कोई कसर नहीं छोड़ी। ...तो जानकीमहल के प्रबंधन से जुड़े आदित्य सुल्तानिया, नारायणप्रसाद गनेडीवाल, अरुण सुल्तानिया, नरेश पोद्दार, उषा पोद्दार, मधुर चिरानीवाला, रामकुमार शर्मा, अशोक वर्मा आदि ने व्यवस्था सुनिश्चित करने के साथ अतिथियों का स्वागत किया। 

श्री विद्यापीठ का छठ्योत्सव

कोरोनारोधी जंग के प्रति समर्पित जानी-मानी रामकथा मर्मज्ञ डॉ. सुनीता शास्त्री के संयोजन में राजघाट स्थित श्री विद्यापीठ का छठ्योत्सव कोरोनारोधी जंग के प्रति समर्पित हुआ। उत्सव के अनुरूप झूले पर विराजे राम, भरत, लक्ष्मण एवं शत्रुघ्न के विग्रह को कढ़ी, चावल, बड़ा आदि का भोग लगाया गया और बधाई गान प्रस्तुत किया गया। इससे पूर्व डॉ. सुनीता शास्त्री ने छठ्योत्सव के उपलक्ष्य में अपने इलाज के लिए संग्रहीत 51 हजार रुपया को चेक कोरोना से निपटने के लिए जिलाधिकारी अनुजकुमार झा के माध्यम से प्रधानमंत्री राहतकोष में समर्पित किया। डॉ. सुनीता ने लॉकडाउन का सामना करने के लिए रामचरितमानस की इस पंक्ति को अंगीकार करने का सुझाव भी दिया- धीरज धर्म मित्र अरु नारी/ आपद काल परखिए चारू। 

Posted By: Anurag Gupta

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