लखनऊ[जुनैद अहमद]। रात 11 बजे के बाद विक्टोरिया स्ट्रीट पर भीड़ बढ़ती जा रही थी। हर कोई तरावीह की नमाज के बाद अपने घरों से निकल कर बाजारों की ओर जा रहे थे। नक्खास चौराहे के पास लगी कश्मीरी चाय की दुकान को घेरे लोगों की भीड़ चुस्किया ले रही थी। कोई अपने ग्रुप के साथ सड़क किनारे पड़ी बेंच पर बैठकर शेक व शिकंजी का मजा उठा रहा था, तो कोई दोस्तों के साथ खड़े होकर शाही पीस की मिठास लेते हुए गप्पे लगा रहा था। ऐसा नजारा रमजान में तरावीह की नमाज के बाद पुराने लखनऊ में देखने को मिला। सिर्फ नक्खास का ही नहीं, बल्कि माहौल नजीराबाद हो अमीनाबाद, मौलवीगंज या फिर अकबरी गेट, चौक हर जगह रमजान की रौनक दिख रही है। बाजार में त्योहार की खरीदारी के साथ रोजेदारों की भीड़ फुरसत के पल निकाल कर लजीज व्यंजनों का भी लुत्फ उठा रही है। अकबरी गेट की नॉनवेज दुकानों में जुटी भीड़ सुबह सहरी तक उमड़ रही है। दूर-दूर से खाने के शौकीन यहा नहारी-कुल्चा, पसंदा व बिरयानी का लुत्फ उठाने के लिए जुट रहे हैं। इसी तरह चौक की गली में टुंडे कबाब की दुकान भी खचाखच ग्राहकों से भरी रही। बिल्लौचपुरा में सीक कबाब, शीरमाल व पाय की नहारी के शौकीनों की भीड़ गुजरते समय के साथ बढ़ती ही जा रही थी। हाल यह है कि होटल से ज्यादा भीड़ बाहर सड़क पर अपनी बारी के आने के इंतजार में खड़ी थी। कुछ यही नजारा मौलवीगंज का अमीनाबाद व नजीराबाद का भी रहा। सड़क किनारे खड़े तरह-तरह के स्वादिष्ट व्यंजनों के स्टॉल पर लोगों की भीड़ उमड़ी पड़ी थी। वेज हो या नॉन वेज के होटल, हर जगह पाव रखने तक की जगह तलाशना मुश्किल होता जा रहा था।

Posted By: Jagran

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