लखनऊ, जेएनएन। रमजान के मुकद्दस महीने में एक नेकी के बदले 70 नेकियों का सवाब मिलता है। ऐसे में बड़े लोगों के अलावा बच्चे भी रमजान में रोजा रखकर ज्यादा से ज्यादा सवाब ले रहे हैं। इस रमजान में कई बच्चों ने अपना पहला रोजा रखा। वहीं, बच्चों की रोजा कुशाई की रस्म अदा कराई गई। 

इस मौसम में रोजा 15 घंटे से अधिक का है। छोटे तो दूर बड़े लोग भी रोजा मुश्किल से रख पाते है। ऐसे में इन बच्चों का हौसला काबिले तारीफ है। मौलाना खालिद रशीद फरंगी महली कहतेे हैं कि रहमतों और बरकतों का यह महीना अच्छे कामों का सवाब देने वाला होता है। इस वजह से इस महीने को नेकियों का महीना भी कहा जाता है। इस पाक महीने में कुरान शरीफ  नाजिल हुआ था। कुरान शरीफ  में रोजे का मतलब होता है तकवा। यानी बुराइयों से बचना और भलाई को अपनाना। सिर्फ  भूखे-प्यासे रहने का नाम रोजा नहीं होता है।

 

इन बच्चों की हुई रोजा कुशाई 

इस्लामिक सेंटर ऑफ इंडिया में तीन बच्चों की तकरीब-ए-रोजा कुशाई की गई। जिसमें नौ साल के वली उमर, 12 साल की जुड़वा बहनें अंबर माजिद व गुल माजिद ने पहली बार रोजा रखा। बच्चों ने बताया कि हर साल रमजान में घर में सभी बड़े रोजा रखते हैं, इस बार मैंने भी रोजा रखा। गर्मी बहुत है, इसलिए घर में रही। अम्मी के साथ ही पांचों वक्त की नमाज अदा की। 

 

-अल्लाह की इबादत में गुजरा दिन

रमजानुल मुबारक में अपना पहला रोजा रखने वाले 10 साल की नासिया नियाज बताती है कि उनका दिन कुरान शरीफ की तिलावत में बीतता है। सहरी में दूध, खजूर और सूतफेनी खाई थी। उसके बाद शाम को इफ्तार में अम्मी ने मेरी पसंद की चीजें बनाई। उन्होंने बताया कि गर्मी तो बहुत है, लेकिन रोजा पता ही नहीं चला। न तो भूख लगी और न ही प्यास, पूरा दिन कट गया। अल्लाह हमारे रोजे को कबूल फरमाए। 

-बहुत अफजल है रोजा रखना 

 गोइन रोड की रहने वाली एंजल अंसारी ने नौ साल की उम्र में ही पहला रोजा रखा। अम्मी अब्बू समेत घर में सभी लोग रोजा रखते हैं, इसलिए मैंने भी रोजा रखने का मन बनाया। स्कूल की छुट्टियां चल रही है तो घर पर रह रही हूं। इसलिए गर्मी का ज्यादा असर नहीं पड़ा। 

-बहुत खुश हूं कि रोजा रख सकी

घसियारी मंडी में रहने वाली आरिफा हुसैन ने भी पहली बार रोजा रखा। 12 वर्षीय आरिफा ने रमजान की फजीलत के बारे में बताया कि अब्बू मुजाहिद हुसैन बताते हैं कि रमजान में रोजा रखना बहुत अफजल है। इस महीने में एक नेकी के बदले 70 नेकी मिलती है। सुबह सहरी के बाद नमाज पढ़ी, फिर कुरान की तिलावत की। दिन कैसे गुजर गया पता ही नही चला। 

 

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Posted By: Anurag Gupta

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