अयोध्या [नवनीत श्रीवास्तव]। रामजन्मभूमि पर मंदिर निर्माण श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र नाम से ट्रस्ट का गठन किया जा चुका है, लेकिन 30 साल से मंदिर के निर्माण की तैयारी में जुटे रामजन्मभूमि न्यास का सपना मंदिर के साथ ही अधिग्रहीत परिसर में और भी बहुत कुछ बनाने का रहा है। अधिग्रहीत परिसर में भगवान राम के जीवन से जुड़े विविध प्रसंगों को जीवंत करना है। कई प्रसंगों की प्रतिमाएं गढ़ी भी जा चुकी हैं, हालांकि अब यह सपना तभी पूर्ण होगा, जब न्यास के मॉडल को स्वीकार किया जाए।

अशोक सिंहल ने संजोया था सपना 

रामकथा कुंज की परिकल्पना मंदिर आंदोलन के शिल्पी दिवंगत विश्व हिंदू परिषद के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष अशोक सिंहल की थी। उन्होंने वर्ष 1990 में इस परिकल्पना को संजोया था। जनवरी 1993 में जन्मभूमि से सटी 67.77 एकड़ भूमि अधिग्रहीत होने के साथ न्यास को रामकथा कुंज की दावेदारी से वंचित हो जाना पड़ा। न्यास ने वर्ष 2014 से रामघाट स्थित रामजन्मभूमि न्यास कार्यशाला से पांच सौ मीटर पूरब स्थित रामसेवकपुरम के प्रांगण में स्थापित रामकथा कुंज की कार्यशाला में प्रतिमाओं को आकार दे रहा है। 

प्रत्येक प्रसंग की बननी हैं आधा दर्जन मूर्तियां 

इस प्रकल्प के तहत 125 से ज्यादा प्रतिमाएं निर्मित होनी हैं। भगवान राम के जन्म से लेकर उनकी बाल लीला, विवाह, वनगमन एवं लंका-विजय आदि प्रसंगों का अंकन किया जाना है। प्रत्येक प्रसंग में औसतन छह मूर्तियां और प्रसंग के अनुरूप अन्य छवियों का अंकन प्रस्तावित है। अब तक पुत्रेष्टि यज्ञ से लेकर रामजन्म, बाललीला, वशिष्ठ के आश्रम में विद्या अध्ययन, विश्वामित्र के यज्ञ की रक्षा, ताड़का, सुबाहु वध, सीता जन्म, अहिल्या उद्धार, सीता स्वयंवर, वनवास के प्रसंगों को आकार दिया जा चुका है। इन मूर्तियों को इस तरह बनाया जा रहा है कि यह भगवान राम के बाल्यकाल से लेकर सरयू में गुप्त होने तक के सभी प्रमुख पहलुओं का अहसास कराए और उसको जीवंत बनाए। 

क्‍या कहते हैं विहिप के प्रांतीय मीडिया प्रभारी ?

विहिप के प्रांतीय मीडिया प्रभारी शरद शर्मा के मुताबिक, उम्मीद है कि जिस मॉडल को संतों ने अनुमोदित किया था, ट्रस्ट उसी दिशा में निर्माण का क्रम आगे बढ़ाएगा।  

Posted By: Divyansh Rastogi

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