लखनऊ (जेएनएन)। उत्तर प्रदेश में सक्रिय राजनीति में रजत जयंती पूरा करने वाले दबंग विधायक रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया 30 नवंबर को बेहद यादगार बनाने में जुटे हैं। सूबे की राजधानी में समाजवादी सेक्युलर मोर्चा के संयोजक शिवपाल सिंह यादव के बाद अब प्रतापगढ़ के कुंडा से निर्दलीय विधायक रघुराज प्रताप सिंह के हर कदम पर लोगों की निगाहे हैं।

प्रतापगढ़ के कुंडा से 1993 से लगातार निर्दलीय विधायक होने का रिकार्ड बनाने के साथ ही अपनी सक्रिय राजनीति के 25 वर्ष पूरा करने पर रघुराज प्रताप सिंह 30 नवंबर को लखनऊ में बड़ी जनसभा करेंगे। इसकी तैयारी में वह जोरदार ढंग से लगे हैं। माना जा रहा है कि लखनऊ के रमाबाई अम्बेडकर रैली स्थल पर जनसभा के साथ ही रघुराज प्रताप सिंह अपनी नई पार्टी की भी घोषणा कर सकते हैं। उत्तर प्रदेश के राजपूत नेता लगातार उनके संपर्क में हैं। 30 नवंबर के समारोह में राजा भैया राजनीतिक दल बनाने का एलान कर सकते हैं। उनके नजदीकी लोगों ने निर्वाचन आयोग में दल के पंजीकरण के लिए आवेदन भी कर दिया है।

प्रदेश के पूर्व मंत्री व कुंडा प्रतापगढ़ के विधायक रघुराज प्रताप सिंह (राजा भैया) ने कल देर रात मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से उनके सरकारी आवास पर मुलाकात की। उनकी राजनीतिक पार्टी बनाने की तैयारियों के बीच मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से करीब 20 मिनट की इस मुलाकात को अहम माना जा रहा है। मुख्यमंत्री से भेंट करने के बाद बाहर निकले राजा भैया ने मीडिया से बात नहीं की। माना जा रहा है कि उन्होंने मुख्यमंत्री को अपनी राजनीतिक पारी के रजत जयंती समारोह के लिए निमंत्रण दिया है। राजा भैया 1993 से लगातार निर्दलीय विधायक हैं। वह कई बार मंत्री रह चुके हैं। 25 वर्ष तक एक सीट से लगातार निर्दलीय चुनाव जीतने वाले पहले राजनीतिज्ञ हैं।

समझा जाता है कि उन्होंने अपने सम्मान में होने वाले सम्मान समारोह में सीएम को आने का न्यौता दिया है। यह समारोह 30 नवंबर को राजा भैया समर्थकों ने किया है। राजा भैया के विधानसभा में 25 वर्ष पूरे हो रहे हैं। इसी उपलक्ष्य में होने वाले इस समारोह में राजा भैया नए राजनीतिक दल के गठन का ऐलान कर सकते हैं। वैसे लंबे समय तक सपा के नजदीक रहे व उनकी सरकार में मंत्री रहे राजा भैया की कुछ समय से सीएम योगी आदित्य नाथ व भाजपा से नजदीकी बढ़ी है। राजा भैया वैसे भाजपा की कल्याण सिंह सरकार में भी कैबिनेट मंत्री रह चुके हैं।

समाजवादी पार्टी से रिश्ते बिगडऩे के बाद राजा भैया का यह बड़ा सियासी दांव है। राजा भैया की इस कवायद को सवर्णों को लामबंद करने की मुहिम के रूप में देखा जा रहा है। राज्यसभा चुनाव के दौरान क्रॉस वोटिंग को लेकर समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव से हुए मतभेद के बाद से ही वे नई सियासी जमीन तलाश रहे हैं। राजा भैया के समर्थकों ने देश-प्रदेश एवं विदेश में रह रहे राजा समर्थकों से नया दल बनाने, बीजेपी या सपा को समर्थन देने का कैंपेन चलाया था। कैंपेन में संपूर्ण उत्तर प्रदेश और देश के लगभग 25 राज्यों से 20 लाख से अधिक समर्थकों ने भाग लिया था। 

Posted By: Dharmendra Pandey

डाउनलोड करें जागरण एप और न्यूज़ जगत की सभी खबरों के साथ पायें जॉब अलर्ट, जोक्स, शायरी, रेडियो और अन्य सर्विस