लखनऊ, जेएनएन। राजधानी में रोजाना करीब सोलह सौ क्विंटल दालों की खपत है। फिलहाल, बाजार में दाल उपलब्ध है और अभी करीब एक सप्ताह तक कोई दिक्कत नहीं है। लेकिन अगर प्रशासन ने खासतौर पर महाराष्ट्र और एमपी से ट्रकों को क्लीयरेंस देने में देरी की तो फिर संकट खड़ा हो सकता है। हालांकि प्रशासन आश्वस्त है कि सब कुछ पटरी पर आ जाएगा।

राजधानी सहित यूपी में दाल की आपूर्ति मुख्य तौर पर मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र के नागपुर, कटनी, अंकोला समेत विभिन्न जिलों से होती है। लखनऊ दाल एंड राइज मिलर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष भारत भूषण गुप्ता के मुताबिक, पुराने ऑर्डर का माल आना शुरू हुआ है। रास्ते में रुके दस ट्रक बाजार में आ जरूर गए हैं। इससे कुछ दिन ही राहत मिलेगी। अगर जल्द ही वहां से ट्रकों की आवाजाही सामान्य नहीं हुई तो मुश्किल हो सकती है। अध्यक्ष लखनऊ व्यापार मंडल एवं आढ़ती राजेंद्र अग्रवाल का कहना है मूल्य नियंत्रण के लिए नए ऑर्डर की भी सप्लाई सामान्य करनी होगी। अगर सप्लाई नहीं हुई तो गैप बढ़ेगा, जिससे फिर महंगाई बढ़ेगी। इस बारे में मंडी सचिव संजय सिंह का कहना है कि दाल या किसी तरह की आवश्यक चीजों की निर्बाध आपूर्ति के लिए तमाम तरह के कदम उठाए जा रहे हैं। शासन स्तर पर सारे प्रयास हो रहे हैं।

राशन वितरण में सर्वर कर रहा दिक्कत

लॉकडाउन में गरीबों को समय से पहले राशन दिलाने की सरकारी कोशिशों के बावजूद तमाम दुकानों पर सर्वर का ब्रेक नजर आया। कई दुकानें में सर्वर की गड़बड़ी के चलते पात्रों को घंटों इंतजार करना पड़ा। वहीं कई जगहों पर बिना हाथों की सफाई के ही बायोमीटिक से राशन लेते नजर आए। जिलाधिकारी अभिषेक प्रकाश ने कई इलाकों का निरीक्षण कर राशन वितरण सुनिश्चित कराया। बुधवार को करीब 90 हजार लोगों को राशन वितरण किया गया।

 

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