लखनऊ[जागरण संवाददाता]। दोपहिया वाहनों पर पीछे बैठी सवारी के लिए हेलमेट लगाने के सेना के आदेश पर निर्वाचित सदस्यों ने विरोध दर्ज कराया है। यह माननीय केंद्रीय मोटरयान अधिनियम के आदेश को नहीं मान रहे हैं। बुधवार को हुई छावनी परिषद की बोर्ड बैठक में इन माननीयों ने सैन्य प्रशासन ने डबल हेलमेट के आदेश को रद करने की माग की। इनका तर्क था कि बाहर से आने वाले लोगों को वापस लौटना पड़ रहा है। वहीं सेना ने भी साफ किया है कि वह दोपहिया वाहन पर पीछे बैठी सवारी की जान की सुरक्षा को लेकर कोई कोताही नहीं बरतेगी। दरअसल सेना ने छावनी के सैन्य इलाकों में दोपहिया वाहनों से आने वाले लोगों के डबल हेलमेट की व्यवस्था को अनिवार्य कर दिया है। सेना के बहादुर शाह मार्ग, सोमनाथ द्वार, नेहरू रोड, रायबरेली रोड की ओर से आने वाले सभी मार्गो के बैरियर पर तैनात जवान पीछे बैठी सवारी के हेलमेट लगाने पर ही उनको प्रवेश दे रहे हैं। ऐसे में शहर में बिना हेलमेट चलने वाले कई दोपहिया वाहन सवार जब छावनी में आते हैं तो उनको प्रवेश नहीं मिल पाता है। इसे लेकर वार्ड एक के सदस्य जगदीश प्रसाद, रूपा देवी और उपाध्यक्ष प्रमोद शर्मा ने अपनी आपत्ति दर्ज करायी।

मध्य यूपी सब एरिया के जीओसी मेजर जनरल प्रवेश पुरी ने नियम के अनुसार दोपहिया वाहन पर पीछे बैठी सवारी को बिना हेलमेट प्रवेश न देने की बात कही। उन्होंने कहा कि सुरक्षा की चिंता पीछे बैठी सवारी की भी करनी चाहिए। सीईओ अमित कुमार मिश्र ने कहा कि डबल हेल्मेट की व्यवस्था पूरे लखनऊ में लागू कराने के लिए उच्च स्तर पर जल्द ही बात की जाएगी।

पीछे बैठने वाले लोग अधिक हो रहे घायल

इस समय दोपहिया वाहन से पीछे बैठे लोग अधिक घायल हो रहे हैं। बोर्ड बैठक में बताया गया कि प्रतिदिन दोपहिया वाहनों से घायल होने वाले औसतन 25 लोग सेना के बेस अस्पताल पहुंचते हैं। इसमें 70 प्रतिशत पीछे की सीट पर बैठी सवारी घायल होती है।

Posted By: Jagran

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