लखनऊ, जेएनएन। कोविड-19 महामारी और लॉकडाउन ने रिश्तों के महत्व को समझाया। प्रकृति से जुड़ने का मौका दिया। सीमित संसाधन में जीने का तरीका बताया। सकारात्मक सोच के साथ प्रतिकूल परिस्थिति ने हमें और मजबूत बनाया। मनोवैज्ञानिक डॉ. नेहाश्री श्रीवास्तव ने अपनी किताब थैंक यू लॉकडाउन के जरिए सकारात्मकता का यही संदेश देने का प्रयास किया है। शुक्रवार को दैनिक जागरण के फेसबुक एक्टिविटी पेज पर डाॅ. नेहाश्री ने अपनी किताब के बारे में विस्तार से बात की।

डॉ. नेहाश्री ने कहा कि लॉकडाउन के दौरान लोग काउंसिलिंग के लिए संपर्क करते थे। कुछ स्वयं काम के लिए बाहर निकल रहे थे, तो कुछ लोगों के बच्चे फील्ड पर निकलते थे। तनाव प्रबंधन के लिए तमाम कॉल आए। इन सबके बीच युवाओं की चिंता यह रहती थी कि हम इस समय का इस्तेमाल कैसे करें कि आगे चलकर हमें लाभ हो। युवाओं की इस फिक्र ने समझाया कि लॉकडाउन ने हमें बहुत सा वक्त दिया है, उन चीजों के लिए जो हम लंबे समय से नहीं कर पा रहे थे। इस दौरान हमने अपनी ताकत को समझा। अपनी कमजोरियों को खत्म या नियंत्रित करने की दिशा में भी काम किया। सफाईकर्मी, डॉक्टर, पुलिस, मीडिया सबने जी-जान से सेवा की। मुझे लगा आने वाली पीढ़ी को हम लॉकडाउन के दौरान की परेशानियां ही क्यों बताएं। इस दौरान हमने बहुत कुछ बेहतर किया, वो भी उन तक पहुंचना चाहिए। बस इसी सोच के लिए लिखना शुरू किया और 12 दिन में मोबाइल पर ही लिखकर 25 हजार शब्दों की किताब तैयार हो गई। ये किताब कहती है कि हम जो चाहेंगे, जैसा चाहेंगे, वैसा बन जाएंगे।

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