लखनऊ [राज्य ब्यूरो] : कोरोना संक्रमण ने जब पूरी दुनिया की प्राथमिकताएं बदलीं तब यूपी पुलिस के लिए भी नए अनुभवों की कमी नहीं थी। जरूरतमंदों तक दवा और राशन पहुंचाने का अनुभव करने के साथ ही यूपी पुलिस ने कोरोना से जुड़ी सूचनाओं का भार भी झेला। लॉकडाउन में पुलिस की सक्रियता बढ़ी तो आपात सेवा 112 पर सूचनाओं का पहाड़ भी। अब चौथा लॉकडाउन जब अपने अंतिम पायदान पर है और सड़कों पर यातायात बढ़ रहा है, तब पुलिस के लिए कानून-व्यवस्था का मोर्चा फिर प्राथमिकता बन रहा है। मिलने वाली सूचनाओं का ग्राफ भी यही कहानी दोहरा रहा है, जिसका मूल्यांकन पुलिस के उच्चाधिकारी भी कर रहे हैं और अपनी अगली रणनीति बनाने में भी जुट गए हैं।

लॉकडाउन की चरणबद्ध तस्वीर देखें तो 25 मार्च से 14 अप्रैल के बीच 112 पर भोजन की मदद मांगने वालों की 1.5 लाख से ज्यादा कॉल आईं थीं। दूसरे लॉकडाउन में कम्युनिटी किचन की सेवा बढ़ी और पुलिस ने भी भोजन व राशन के लिए दूसरी हेल्प लाइन सेवा 1076 पर काल डायवर्ट करनी शुरू की। नतीजा 15 अप्रैल से तीन मई के बीच ऐसी कॉल 46,257 आईं और चार मई से 15 मई के बीच ऐसी कॉल और घटकर 3949 रह गईं। चौथे लॉकडाउन में 18 मई से 21 मई के बीच भोजन व राशन की मदद मांगने वालों की कॉल 1126 आई हैं।

दरअसल, ऐसे ही लॉकडाउन में ट्रांसपोर्ट व अन्य मदद मांगने वाली कॉल का आंकड़ा भी घटा है। इसी अवधि में दुर्घटना व आपसी विवाद की सूचनाएं अचानक बढ़ भी गई हैं। दुर्घटना की सूचना की बात करें तो 25 मार्च से 14 अप्रैल के बीच 1892 तथा 15 अप्रैल से तीन मई के बीच 2358 सूचनाएं आई थीं। जबकि 112 पर चार से 17 मई के बीच 4319 सूचनाएं आई थीं और 18 से 21 मई के बीच ही 2327 सूचनाएं दर्ज की जा चुकी हैं।

दुर्घटना का आंकड़ा लगातार बढ़ा है। एडीजी 112 असीम अरुण के अनुसार लॉकडाउन से पहले प्रतिदिन करीब 15 से 16 हजार सूचनाएं आती थीं। अब प्रतिदिन 22 से 23 हजार कॉल आ रही हैं। पिछले एक सप्ताह में इनमें से करोनो से जुड़ी सूचनाएं ढाई से तीन हजार हैं। हालांकि पुलिस अभी हालात को देखते हुए सूचनाओं की और समीक्षा भी करेगी।

Posted By: Umesh Tiwari

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