BSP Will Vote For Duaupdi Murmu : लखनऊ, जेएनएन। राष्ट्रपति पद के लिए 18 जुलाई को होने वाले चुनाव में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन ने द्रौपदी मुर्मू को मैदान में उतारा है तो संयुक्त विपक्ष के प्रत्याशी पूर्व केन्द्रीय मंत्री तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष यशवंत सिन्हा हैं। बसपा की मुखिया मायावती ने राष्ट्रपति उम्मीदवार के लिए द्रौपदी मुर्मु को अपना समर्थन दिया। द्रौपदी मुर्मू के समर्थन के साथ ही मायावती ने विपक्षी दलों पर बसपा को अलग-थलग रखने का आरोप लगाया।

राष्ट्रपति के चुनाव में उत्तर प्रदेश के वोट की काफी महत्ता है। राष्ट्रपति पद के चुनाव में उत्तर प्रदेश से भाजपा तथा सहयोगी दल और समाजवादी पार्टी तथा सहयोगी दलों के पत्ते खोलने के बाद बारी बहुजन समाज पार्टी की है। बसपा के वोट काफी मायने रखते हैं। ऐसे में बसपा की मुखिया मायावती शनिवार को अपना मत रखा दिया।मायावती ने कहा कि हमने एनडीए के राष्ट्रपति चुनाव की उम्मीदवार द्रौपदी मुर्मू को समर्थन देने का फैसला किया है। हमने यह फैसला ना तो भाजपा या एनडीए के समर्थन में और ना ही विपक्ष के खिलाफ लिया है, बल्कि अपनी पार्टी और आंदोलन को ध्यान में रखते हुए लिया है। 

हमारी पार्टी ने आदिवासी समाज को अपने मूवमेंट का खास हिस्सा मानते हुए द्रौपदी मुर्मू समर्थन देने का फैसला किया। हमने अपनी पार्टी के मूवमेंट को ध्यान में रखते हुए एक आदिवासी समाज की योग्य और कर्मठ महिला को देश की राष्ट्रपति बनाने के लिए यह फैसला लिया है। हमने द्रौपदी मुर्मू को राष्ट्रपति पद के प्रत्याशी के रूप में खुलकर अपना समर्थन देने का निर्णय लिया है। बसपा प्रमुख ने कहा एनडीए के समर्थन में नहीं बल्कि आदिवासी समाज के समर्थन में बसपा ने यह निर्णय लिया है। वह अपने इस कदम को बसपा के सामाजिक आंदोलन का हिस्सा मानती हैं।

मायावती ने विपक्ष पर उनसे सलाह न लेने के लिए भी निशाना साधा। ममता बनर्जी ने राष्ट्रपति चुनाव के लिए एक विपक्षी उम्मीदवार का चयन करने के लिए 15 जून को बुलाई गई बैठक में केवल चयनित पार्टियों को आमंत्रित किया और जब शरद पवार ने 21 जून को एक बैठक बुलाई तो भी बसपा को आमंत्रित नहीं किया गया। उन्होंने एक संयुक्त उम्मीदवार पूर्व केंद्रीय मंत्री यशवंत सिन्हा का चयन किया। तृणमूल, कांग्रेस, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी, समाजवादी पार्टी, राष्ट्रीय जनता दल, असदुद्दीन ओवैसी की एआईएमआईएम, नेशनल कांफ्रेंस और द्रमुक का एक संयुक्त मोर्चा इस महीने आम सहमति से राष्ट्रपति चुनाव के लिए उम्मीदवार चुनने के लिए मिला था। ममता बनर्जी ने राष्ट्रपति चुनाव के लिए विपक्षी उम्मीदवार का चयन करने के लिए 15 जून को बुलाई गई बैठक में केवल चुनिंदा पार्टियों को आमंत्रित किया। जब शरद पवार ने 21 जून को एक बैठक बुलाई तो बसपा को भी आमंत्रित नहीं किया गया था। यह उनके जातिवादी उद्देश्यों को दर्शाता है।

राष्ट्रपति के चुनाव में सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश की सबसे बड़ी भूमिका रहती है। राजग उम्मीदवार को यहीं से सबसे अधिक वोट मिलेंगे। देशभर के मतदाता जनप्रतिनिधियों के कुल मत मूल्य 10,86,431 का 14.86 प्रतिशत हिस्सा यूपी के पास है। राष्ट्रपति चुनाव में सभी राज्यों के लोकसभा और राज्यसभा सदस्यों के वोट का मूल्य बराबर है, जो कि 700 है। विधायकों के वोट का मूल्य आबादी की गणना के अनुसार तय होता है। यूपी के प्रत्येक विधायक के वोट का मूल्य 208 है। यहां 80 लोकसभा सदस्य, 31 राज्यसभा सदस्य और 403 विधायक हैं। लोकसभा सदस्यों के मतों का कुल मूल्य 56,000 होता है। बसपा के पास दस लोकसभा सदस्य तथा एक राज्यसभा सदस्य है। इनके पास एक विधानसभा सदस्य भी है।

Edited By: Dharmendra Pandey