लखनऊ [रूमा सिन्हा]। आसमान से बरसती आग और तपती धरती। पानी को तरसते जलाशय और पोखर-तालाब, यह बताने के लिए काफी हैं कि प्रदेश में प्री मानसून के हालात अच्छे नहीं रहे हैं। आंकड़ों पर नजर डालें तो यह साफ हो जाता है कि इस वर्ष प्री मानसून सीजन पिछले छह वर्षो में सबसे खराब रहा है। 

मौसम विभाग के अनुसार मार्च, अप्रैल और मई माह को प्री मानसून सीजन कहा जाता है। इस दौरान जहां पूर्वी उत्तर प्रदेश में 69 फीसद कम बारिश रिकॉर्ड की गई, वहीं पश्चिमी उत्तर प्रदेश में 40 फीसद बारिश कम हुई। लखनऊ की बात करें तो यहां इस दौरान मात्र 4.3 मिमी प्री मानसून बारिश ही रिकॉर्ड हुई। यहां मार्च में बारिश औसत के मुकाबले 70 फीसद कम मात्र 1.8 मिमी और अप्रैल में 47 फीसद कम 2.5 मिमी हुई। वहीं, मई माह में मौसम विभाग के अनुसार प्री मानसून की बारिश में सौ फीसद की कमी रिकार्ड की गई। साफ है कि प्री मानसून इस बार पूरी तरह सूखा ही रहा है। 65 वर्षो में पहली बार प्री मानसून में इतनी कम बारिश हुई है।

लेकिन गेहूं के लिए फायदेमंद: हालांकि, आंचलिक मौसम विज्ञान केंद्र के निदेशक जेपी गुप्ता के अनुसार कृषि के लिहाज से यह स्थिति कतई चिंता का विषय नहीं है। उनका कहना है कि प्रदेश में इस समय खेतों में फसल नहीं होती। यही नहीं, प्री मानसून सीजन मार्च-अप्रैल में यदि बारिश हो जाए तो किसानों के लिए मुसीबत का सबब बनती है। वजह यह है कि इस दौरान गेहूं की कटाई होती है, जिसमें बारिश आफत बन जाती है। 

निराश होने की जरूरत नहीं: जेपी गुप्ता कहते हैं कि प्री मानसून सीजन में बारिश न होने से निराश होने की जरूरत नहीं है। इसका मानूसन पर कोई प्रभाव नहीं पड़ने वाला। लखनऊ में मानसून सामान्य तौर पर 18 से 20 जून के बीच दस्तक देता है। हालांकि, इस वर्ष मानसून कब दस्तक देगा यह अभी से कहना मुश्किल है। लेकिन, मानसून सामान्य रहने की उम्मीद है। यानी 96 फीसद बारिश होने की संभावना है। बादल झूमकर बरसेंगे।

लोकसभा चुनाव और क्रिकेट से संबंधित अपडेट पाने के लिए डाउनलोड करें जागरण एप

Posted By: Divyansh Rastogi