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प्रयागराज का कसारी-मसारी: अब माफिया का खौफ नहीं, आकार लेंगे गरीबों के ख्वाब

Published: Thu, 15 Oct 2026 03:29 PM (IST)

प्रयागराज के कसारी-मसारी में माफिया से मुक्त कराई गई जमीन पर ₹191 करोड़ की लागत से 602 आवासों का भूमिपूजन ...और पढ़ें

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प्रणय विक्रम सिंह। जहां कभी माफिया का भय था, वहां अब बच्चों के कहकहे गूंजेंगे। जहां कभी दबंगई की दीवारें खड़ी थीं, वहां अब गरीबों के सपनों के दरवाजे खुलेंगे। जहां कभी कब्जे का अहंकार था, वहां अब गरीब के अपने घर का अभिमान होगा। यह केवल जमीन का बदलता स्वरूप नहीं है। यह उत्तर प्रदेश में बदलती शासन-व्यवस्था, बदलती प्राथमिकताओं और बदलते जनजीवन की कहानी है।

संगम नगरी प्रयागराज के कसारी-मसारी में एक ऐसी ही कहानी आकार लेने जा रही है। माफिया से मुक्त कराई गई 9,811 वर्ग मीटर भूमि पर पद्म लोक आवास योजना के अंतर्गत ₹191 करोड़ से अधिक की लागत से 602 आवासों के निर्माण का भूमिपूजन होगा। इसी अवसर पर प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के अंतर्गत निर्मित 556 आवासों के लाभार्थियों को उनके घरों की चाबियां सौंपी जाएंगी।

एक ओर 602 परिवारों के भविष्य की नींव रखी जाएगी, दूसरी ओर 556 परिवारों की वर्षों पुरानी प्रतीक्षा पूरी होगी। एक तरफ नए सपनों का भूमिपूजन, दूसरी तरफ पूरे हुए सपनों का गृहप्रवेश। किसी गरीब के लिए अपना घर क्या होता है?

यह सवाल उस पिता से पूछिए, जिसने जिंदगी भर मेहनत की, लेकिन अपनी छत का सपना अधूरा रह गया। उस मां से पूछिए, जिसने हर बरसात में छत से टपकते पानी के नीचे बच्चों का बिस्तर खिसकाया। उस बेटी से पूछिए, जो हर बार किराए का मकान बदलते समय अपने पुराने आंगन को पीछे छोड़ आई।

उनके लिए घर केवल ईंट और सीमेंट नहीं है। वह सुरक्षा है, स्थिरता है, स्वाभिमान है। और जब किसी गरीब के हाथ में अपने घर की चाबी आती है, तो केवल एक दरवाजा नहीं खुलता। उसके जीवन में संभावनाओं का नया संसार खुलता है। भय से मुक्ति, अधिकार की रक्षा और भविष्य की सुरक्षा

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उत्तर प्रदेश में शासन की एक स्पष्ट रेखा खींची है- अपराध के प्रति जीरो टॉलरेंस, व्यवस्था में रूल ऑफ लॉ और विकास में गरीब को प्राथमिकता। ये तीनों अलग-अलग नीतियां नहीं हैं। एक-दूसरे से जुड़ी हुई प्रतिबद्धताएं हैं।

क्योंकि जहां कानून कमजोर पड़ता है, वहां सबसे पहले गरीब का अधिकार छिनता है। जहां माफिया मजबूत होता है, वहां सामान्य नागरिक का आत्मविश्वास टूटता है। और जहां भय का वातावरण होता है, वहां विकास के अवसर भी सीमित हो जाते हैं।

इसीलिए कानून का राज केवल अपराधियों को दंडित करने का विषय नहीं है। उसका सबसे बड़ा उद्देश्य उस सामान्य नागरिक को निर्भय जीवन देना है, जिसकी आवाज कभी ताकतवर लोगों के सामने दब जाती थी।

कसारी-मसारी की भूमि इसी बदलाव की प्रतीक है। पहले कब्जा हटाया गया, फिर जनहित का रास्ता बनाया गया और अब उस जमीन पर गरीबों के घर बसाने का संकल्प साकार हो रहा है। यह है जीरो टॉलरेंस का मानवीय पक्ष। यह है रूल ऑफ लॉ की वास्तविक सार्थकता।

कानून की शक्ति तब और अधिक अर्थपूर्ण हो जाती है, जब उसका लाभ समाज के सबसे कमजोर व्यक्ति तक पहुंचता है। भारतीय चिंतन में आदर्श शासन का अर्थ केवल व्यवस्था चलाना नहीं, बल्कि प्रजा के सुख-दु:ख की चिंता करना रहा है। गोस्वामी तुलसीदास जी ने रामचरितमानस में रामराज्य का वर्णन करते हुए लिखा है...

'दैहिक दैविक भौतिक तापा।
राम राज नहिं काहुहि ब्यापा॥'

भयमुक्त समाज और प्रजा का सुख ही रामराज्य का मूल भाव है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की शासन-दृष्टि इसी आदर्श को सुशासन और जनकल्याण से जोड़ती है। सुरक्षा से विश्वास, विश्वास से विकास और विकास से स्वाभिमान की यह यात्रा प्रयागराज में धरातल पर आकार ले रही है।

एक चाबी, जो केवल ताला नहीं खोलेगी
कल्पना कीजिए उस क्षण की, जब 556 लाभार्थियों में से किसी एक परिवार को अपने घर की चाबी मिलेगी। संभव है, पिता उसे बार-बार हाथ में पलटकर देखे। मां मन ही मन अपने नए घर की रसोई और पूजा के स्थान की कल्पना करे। बच्चे पूछें कि 'अब हम अपने घर कब चलेंगे?'

उस दिन परिवार के लिए सरकारी योजना का नाम उतना महत्वपूर्ण नहीं होगा, जितना यह विश्वास कि अब उनके पास अपना ठिकाना है। यहां विकास का अर्थ केवल मकान बनाना नहीं, बल्कि व्यक्ति को सुरक्षा, परिवार को संबल और समाज को विश्वास देना है।

यही कारण है कि कसारी-मसारी की आवासीय परियोजना साधारण निर्माण कार्य से कहीं अधिक महत्व रखती है।

जहां दबंगई की कहानी थी, वहां गृहप्रवेश के गीत होंगे

जरा आने वाले दिनों की तस्वीर देखिए।
जिन 602 आवासों की आज नींव रखी जाएगी, उनके निर्माण के बाद वहां नई गलियां होंगी, नए दरवाजे होंगे, नए पड़ोसी होंगे।
सुबह बच्चे विद्यालय जाने की तैयारी करेंगे। किसी आंगन में तुलसी का पौधा लगेगा। किसी देहरी पर दीप जलेगा। किसी घर में पहली बार त्योहार मनाया जाएगा।
एक दिन कोई बुजुर्ग अपने दरवाजे पर बैठकर बच्चों को खेलते देखेगा। उसे शायद यह जानने की आवश्यकता भी नहीं होगी कि इस जमीन का अतीत क्या था। उसके लिए सबसे बड़ी सच्चाई यही होगी कि उसके परिवार का वर्तमान सुरक्षित है।
यही परिवर्तन किसी सरकार की नीतियों को जनजीवन से जोड़ता है। माफिया के लिए जीरो टॉलरेंस, नागरिक के लिए रूल ऑफ लॉ और गरीब के लिए अपना घर, यही नए उत्तर प्रदेश में सुशासन का जीवंत स्वरूप है। प्रयागराज गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती के पावन संगम की नगरी है। यहां आस्था की त्रिवेणी सदियों से मानव जीवन को नई प्रेरणा देती आई है।

अब कसारी-मसारी में सुरक्षा, सम्मान और स्वाभिमान की एक नई त्रिवेणी आकार ले रही है। इसकी सबसे बड़ी सार्थकता यह है कि जिस जमीन पर कभी भय का पता था, वहां अब सैकड़ों परिवारों की खुशियों का स्थायी पता होगा।