लखनऊ, जेएनएन। कोरोना के इस संकटग्रस्त समय में 'कलम कार्यक्रम ऑनलाइन आयोजित हो रहा है। प्रभा खेतान फाउंडेशन, दैनिक जागरण और लखनऊ एक्सप्रेशंस के सहयोग से आयोजित इस कार्यक्रम में वक्ता थे पूर्व राजनयिक और सांसद शशि थरूर। 'कलम' के इस आयोजन में 30 शहरों के करीब दो सौ लोग जुड़े। शशि थरूर को हाल में उनकी पुस्तक 'एन एरा ऑफ डार्कनेस के लिए साहित्य अकादमी पुरस्कार मिला है। इस पुस्तक के हिंदी अनुवाद 'अंधकार काल' को भी पाठकों ने खूब पसंद किया।

शशि थरूर ने बताया कि वह रात में ग्यारह बजे के बाद लेखन कार्य करते हैं। शशि थरूर ने माना कि हाल के दिनों में उन्होंने संवाद की भाषा के तौर पर हिंदी का प्रयोग अपेक्षाकृत ज्यादा करना शुरू कर दिया है। उनका कहना था कि हिंदी जनसाधारण की भाषा है और इसकी व्याप्ति अधिक है, साथ ही वह ये कहना भी नहीं भूले कि हिंदी को किसी भाषा या प्रांत पर थोपा नहीं जाना चाहिए।

शशि थरूर सोशल मीडिया को संवाद का प्रभावी माध्यम मानते हैं। ट्विटर पर बेहद सक्रिय शशि थरूर इस बात को स्वीकारते हैं कि जब वह इस मीडियम पर आए थे तो कई नेता हतोत्साहित करते थे लेकिन बाद में उनमें से कई इस पर सक्रिय हो गए। एक प्रश्न के उत्तर में शशि थरूर ने कहा कि 'अभी आत्मकथा लिखने का समय नहीं आया है, अभी तो जिंदगी में बहुत कुछ करना है, जब लगेगा कि जिंदगी के सारे मकसद लगभग पूरे हो गए तब आत्मकथा लिखने पर विचार करूंगा।' शशि थरूर से बातचीत अनंत विजय ने की। इस कार्यक्रम हॉस्पिटीलैटी पार्टनर 'हयात लखनऊ' था। 

Posted By: Anurag Gupta

डाउनलोड करें जागरण एप और न्यूज़ जगत की सभी खबरों के साथ पायें जॉब अलर्ट, जोक्स, शायरी, रेडियो और अन्य सर्विस