लखनऊ (जेएनएन)। यूपी इन्वेस्टर्स समिट से पांच दिन पहले अपने दूसरे बजट में योगी सरकार ने निवेश आकर्षित करने के लिए बनायी गईं विभिन्न नीतियों को अमली जामा पहनाने की नीयत भी दिखायी है। निवेशकों का भरोसा जीतने और उद्योगों के लिए अनुकूल माहौल बनाने के लिए बुनियादी ढांचे के विकास पर तो बजट का फोकस है ही, निवेश आकर्षित करने के लिए बनायी गईं नीतियों को धरातल पर उतारने के लिए भी सरकार ने तिजोरी खोली है। वहीं पारदर्शी और जवाबदेह प्रशासन की ओर भी सरकार ने कदम बढ़ाये हैं। 

राज्य में निवेश आकर्षित करने के लिए मौजूदा और पूर्ववर्ती प्रदेश सरकारों ने भी समय-समय पर नीतियां बनायीं लेकिन उन पर अमल को लेकर उद्यमियों के बीच शुबहा रहा। सत्ता संभालने के बाद से अब तक योगी सरकार ने निवेश आकर्षित करने के लिए कई नीतियां बनायीं। खास बात यह है कि इन नीतियों को बनाने के साथ योगी सरकार ने उन्हें धरातल पर उतारने के लिए अपने दूसरे बजट में 1400 करोड़ की भारी-भरकम राशि का इंतजाम किया है।

नीतियों के लिए आवंटित धनराशि

  • उप्र औद्योगिक नीति, 2012 - 600 करोड़ रुपये
  • उप्र औद्योगिक निवेश एवं रोजगार प्रोत्साहन नीति, 2017 - 500 करोड़ रुपये
  • उप्र हथकरघा, पावरलूम, रेशम एवं वस्त्र नीति, 2017 - 50 करोड़ रुपये
  • उप्र खादी एवं ग्रामोद्योग विकास एवं सतत् प्रोत्साहन नीति, 2017 - 25 करोड़ रुपये
  • उप्र नागर विमानन प्रोत्साहन नीति व रीजनल कनेक्टिविटी स्कीम-150 करोड़ रुपये
  • उप्र सूचना प्रौद्योगिकी एवं स्टार्ट अप नीति - 250 करोड़ रुपये (स्टार्ट अप फंड)

मुख्यमंत्री हेल्पलाइन की स्थापना

वहीं शासन और प्रशासन को जवाबदेह बनाने के लिए मुख्यमंत्री हेल्पलाइन की स्थापना के लिए बजट में 40.33 करोड़ रुपये आवंटित किये गए हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बताया कि प्रदेशवासी किसी भी समस्या को लेकर टोल फ्री नंबर के जरिये मुख्यमंत्री हेल्पलाइन पर फोन कर सकेंगे। उनकी समस्याओं का निवारण कर उन्हें फोन के जरिये अवगत कराया जाएगा। वहीं शासन की कार्यप्रणाली को पारदर्शी और त्वरित बनाने के मकसद से सचिवालय में लागू की जा रही ई-ऑफिस योजना के तहत प्रदेश में 30 करोड़ रुपये आवंटित किये गए हैं। ई-ऑफिस व्यवस्था से अभी 22 विभाग जुड़े हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि पहली अप्रैल से इस योजना को पूरी तरह लागू करने की योजना है। 

 

Posted By: Nawal Mishra