लखनऊ, जेएनएन। यूपी पुलिस के अधिकारियों के जेहन में यही था कि प्रदेश में 22 सालों के बाद 47वीं अखिल भारतीय पुलिस साइंस कांग्रेस-2019 का आयोजन हो रहा है। इससे पहले उत्तर प्रदेश ने पहली बार नवंबर 1997 में 29वीं अखिल भारतीय पुलिस साइंस कांग्रेस की मेजबानी की थी, लेकिन इस तथ्य को पुलिस विकास व अनुसंधान ब्यूरो (बीपीआर एंड डी) के डीजी वीएसके कौमुदी ने दुरुस्त किया।

उद्घाटन सत्र में उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश में तीसरी बार पुलिस साइंस कांग्रेस का आयोजन हो रहा है। सबसे पहले पांचवीं पुलिस साइंस कांग्रेस का आयोजन नैनीताल में हुआ था। दरअसल, तब उत्तराखंड भी उत्तर प्रदेश का हिस्सा था। कौमुदी ने बताया कि वर्ष 1958 में आइजी पुलिस के सम्मेलन में पहली बार पुलिस साइंस कांग्रेस की कल्पना की गई थी। पहली पुलिस साइंस कांग्रेस का आयोजन वर्ष 1960 में पटना (बिहार) में हुआ था। उन्होंने उत्तर प्रदेश पुलिस को पुलिस साइंस कांग्रेस के सफल आयोजन की शुभकामनाएं दीं।

अत्याधुनिक असलहों पर टिकी निगाहें

पुडुचेरी की लेफ्टिनेंट गर्वनर डॉ.किरण बेदी ने पुलिस मुख्यालय के म्यूजियम में सजी प्रदर्शनी का उद्घाटन भी किया। प्रदर्शनी में अत्याधुनिक असलहों, सुरक्षा उपकरणों, सॉफ्टवेयर व वर्चुअल क्लास के सिस्टम से जुड़े स्टाल आकर्षण का प्रमुख केंद्र रहे। प्रदर्शनी में आतंकवाद निरोधक दस्ता (एटीएस) के स्टाल पर अत्याधुनिक वाहन व उपकरण भी देखने को मिले। प्रदर्शनी में यूपी 112, वूमेन पावर लाइन (1090) व यूपी कॉप एप समेत अन्य निजी कंपनियों के स्टाल लगे हैं।

डीजीपी ने गिनाई उपलब्धियां

डीजीपी ओपी सिंह ने पुलिस साइंस कांग्रेस के उद्घाटन सत्र में यूपी पुलिस की उपलब्धियां गिनाईं। बताया कि आइआइटी कानपुर के सहयोग से किस प्रकार पुलिस अपनी तकनीकी विशेषज्ञता को बढ़ा रही है। 

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