लखनऊ। आगरा में भड़काऊ भाषण के मामले में पुलिस ने मुकदमा तो दर्ज कर लिया लेकिन कदम बढ़ाने से घबरा रही है। जांच आगे बढ़ाएगी तो केंद्रीय मंत्री रामशंकर कठेरिया का नाम शामिल करना पड़ सकता है। सांसद बाबूलाल भी नहीं बचेंगे। आरोपियों की गिरफ्तारी करनी होगी। इससे बवाल होगा इसलिए पुलिस बच रही है। रणनीति है कि कोर्ट से गैर जमानती वारंट हासिल करने के लिए पुलिस गुरुवार को अदालत में प्रार्थना पत्र प्रस्तुत किया जाए, तब आरोपी नेताओं पर हाथ डालने की शुरुआत की जाए। वहीं, बुधवार तक विवेचना में काटे गए पर्चों में मंत्री, सांसद, विधायकों में से किसी का नाम नहीं बढ़ाया गया है।

मंटोला में विहिप नेता की हत्या को लेकर भाजपा और ङ्क्षहदूवादी संगठनों ने 28 तारीख को जयपुर हाउस के रामलीला पार्क में शोक सभा आयोजित की थी। इसमें वक्ताओं द्वारा भड़काऊ भाषण देने का मामला संसद तक तूल पकडऩे के बाद पुलिस ने मंगलवार को सांप्रदायिक सौहाद्र्र बिगाडऩे का मुकदमा दर्ज किया। इसमें भाजपा नेत्री कुंदनिका शर्मा, विहिप नेता अशोक लवानिया तथा शशांक चौधरी को नामजद किया है। एफआइआर में मंत्री और सांसद की मौजूदगी दिखाई है। मुकदमा दर्ज करने के बाद हालांकि पुलिस दावा कर रही है कि उसने आरोपियों की गिरफ्तारी को उनके घरों पर दबिश दी, जबकि वास्तविकता ये है कि ङ्क्षहदूवादी संगठनों के विरोध की आशंका के चलते पुलिस आरोपियों की सीधी गिरफ्तारी से बच रही है। उधर, खुफिया एजेंसियां ताजनगरी में सांप्रदायिक तनाव के मद्देनजर ङ्क्षहदूवादी और मुस्लिम संगठनों गतिविधियों पर नजर रख रही हैं।

दलितों की हत्या पर मायावती चुप क्यों : कठेरिया

आगरा : केंद्रीय मानव संसाधन विकास राज्यमंत्री डॉ. रामशंकर कठेरिया ने बुधवार को बसपा सुप्रीमो मायावती पर पलटवार किया। डॉ. कठेरिया ने कहा कि आगरा में पिछले दिनों अंबेडकर विवि के कर्मचारी सतेंद्र जाटव की हत्या हुई। अब दलित युवा अरुण माहौर की हत्या अल्पसंख्यक समुदाय के गोकशों ने गोली मार कर दी। इसके बाद भी दलितों की हितैषी बनने वाली मायावती और राहुल गांधी चुप क्यों हैं। दलितों पर वोट की राजनीति करने वाली बसपा, कांग्रेस और सपा के नेता अरुण के घर शोक जताने भी नहीं पहुंचे। इससे पहले मायावती ने मंगलवार को कठेरिया के खिलाफ कार्रवाई की मांग की थी।

Edited By: Ashish Mishra