लखनऊ [राज्य ब्यूरो]। केंद्र सरकार की ओर से प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना (पीएमजीकेवाई) के तहत उत्तर प्रदेश में मई से सितंबर तक के लिए बांटे जाने वाले खाद्यान्न में गेहूं का आवंटन रोक दिया है। इस पर उत्तर प्रदेश सरकार ने केंद्र से प्रदेश के सात मंडलों में पीएमजीकेवाई के तहत अनाज वितरण की पुरानी व्यवस्था को जारी रखने का अनुरोध किया है। इनमें पश्चिमी उत्तर प्रदेश के छह मंडल-आगरा, अलीगढ़, मेरठ, सहारनपुर, मुरादाबाद व बरेली तथा बुंदेलखंड का झांसी मंडल शामिल हैं।

इस वर्ष गेहूं की सरकारी खरीद में आई जबर्दस्त गिरावट को देखते हुए केंद्र ने राज्यों को पीएमजीकेवाई के तहत मई से सितंबर तक मुफ्त बांटे जाने वाले अनाज के आवंटन को पुनरीक्षित किया था। इसमें जहां कई राज्यों का गेहूं का कोटा कम किया गया था, वहीं उत्तर प्रदेश समेत तीन राज्यों के लिए गेहूं का कोटा शून्य कर दिया गया है।

उत्तर प्रदेश समेत जिन तीन राज्यों में गेहूं का आवंटन शून्य किया गया है, केंद्र ने उनमें गेहूं के आवंटन के बराबर अतिरिक्त मात्रा में चावल आवंटित करने के लिए कहा है। राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत अभी प्रदेश में पात्र गृहस्थी राशन कार्डधारकों को प्रतिमाह प्रति यूनिट पर तीन किलो गेहूं व दो किलो चावल तथा अंत्योदय कार्डधारकों को प्रतिमाह 20 किलो गेहूं व 15 किलो चावल दिया जाता है।

पीएमजीकेवाई के तहत केंद्र की ओर से उत्तर प्रदेश का खाद्यान्न आवंटन 7.43 लाख टन प्रतिमाह है। इसमें गेहूं का आवंटन 4.46 लाख टन और चावल का 2.97 लाख टन है। इस हिसाब से केंद्र ने यूपी को अप्रैल से सितंबर माह तक के लिए कुल 44.61 लाख टन अनाज आवंटित कर दिया है। पुनरीक्षित आवंटन में उप्र को सितंबर तक के लिए अब प्रतिमाह 7.43 लाख टन चावल ही आवंटित किया गया है। गेहूं का आवंटन शून्य कर दिया गया है।

एक माह पीछे चल रहा वितरण : प्रदेश में पीएमजीकेवाई के तहत खाद्यान्न का वितरण एक महीने पीछे चल रहा है। अभी अप्रैल माह के लिए वितरण हो रहा है। मई माह के लिए खाद्यान्न वितरण जून में शुरू होगा। केंद्र के इस फरमान से प्रदेश में पीएमजीकेवाई के तहत मई से सितंबर तक के लिए किये जाने खाद्यान्न वितरण में लाभार्थियों सिर्फ चावल मिलने की स्थिति पैदा हो गई है।

कई क्षेत्रों में मुख्य आहार गेहूं : उत्तर प्रदेश के पश्चिमी क्षेत्र के कई जिलों में लोगों का मुख्य आहार गेहूं है। बुंदेलखंड के झांसी मंडल में भी गेहूं लोगों के भोजन का मुख्य हिस्सा है। पीएमजीकेवाई के तहत यदि इन जिलों में सिर्फ चावल बांटा गया तो लोगों को भोजन में बड़ी समस्या होगी। इस व्यावहारिक कठिनाई के दृष्टिगत राज्य सरकार ने केंद्र से अनुरोध किया है कि प्रदेश के सात मंडलों में पूर्व की भांति गेहूं और चावल दोनों बांटे जाएं और उत्तर प्रदेश का खाद्यान्न आवंटन उसी हिसाब से किया जाए।

निर्यात पर रोक लगने से गेहूं खरीद में तेजी आने की उम्मीद : गेहूं के निर्यात पर केंद्र सरकार की ओर से रोक लगाये जाने के बाद प्रदेश में गेहूं के बाजार भाव में कमी आने और न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर गेहूं की खरीद में तेजी आने की उम्मीद है। प्रदेश में इस वर्ष पहली अप्रैल से एमएसपी पर गेहूं की खरीद जारी है। इस साल बड़े पैमाने पर निर्यात किये जाने से कई जिलों में गेहूं का बाजार भाव उसके एमएसपी (2015 रुपये प्रति क्विंटल) से ज्यादा है। 15 मई तक प्रदेश में 5666 गेहूं क्रय केंद्र स्थापित किये जा चुके हैं जिनके माध्यम से अब तक 61,873 किसानों से सिर्फ 2.36 लाख टन खरीद हो सकी है जबकि पिछले साल इस अवधि में 5.04 लाख किसानों से 25.72 लाख टन गेहूं खरीदा जा चुका था। गेहूं खरीद शुरू हुए डेढ़ महीने बीत चुके हैं। बड़ी संख्या में किसान अपना गेहूं आढ़तियों और व्यापारियों को बेच चुके हैं। फिर भी अब तक जिन किसानों ने गेहूं व्यापारियों को नहीं बेचा है, बाजार भाव में कमी आने से वे सरकारी क्रय केंद्रों का रुख करेंगे।

Edited By: Umesh Tiwari