UP News: लखनऊ, राज्य ब्यूरो। नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के विरोध में हुए हिंसक प्रदर्शनों के दौरान वर्ष 2019 में जिस पापुलर फ्रंट आफ इंडिया (PFI) की भूमिका पहली बार खुलकर सामने आई थी, उसकी जड़ें उत्तर प्रदेश में लगातार गहराती जा रही हैं। यूपी में यह संगठन लगभग 15 वर्षों से सक्रिय है और भीतर ही भीतर कट्टरपंथियों के साथ मिलकर युवाओं में जहर घोलने का काम कर रहा था।

इससे पहले पोस्टर चस्पा कर सांप्रदायिक माहौल बिगाड़ने की साजिश करने वाले पीएफआइ के हाथ टेरर फंडिंग से सने होने के तथ्य खुलकर सामने आ चुके हैं। हाथरस कांड के बाद उत्तर प्रदेश में सांप्रदायिक हिंसा भड़काने की साजिश में पीएफआइ व उसकी स्टूडेंट विंग कैंपस फ्रंट आफ इंडिया (CFI) के साथ ही कुछ अन्य सहयोगी संगठनों की भूमिका सामने आई थी।

इसके बाद आतंकवाद निरोधक दस्ता (ATS) व स्पेशल टास्क फोर्स (STF) दोनों को सक्रिय किया गया था। अब एनआइए के यूपी समेत अन्य राज्यों में पीएफआइ के ठिकानों पर छापेमारी के बाद जांच के कदम एक बार फिर तेजी से बढ़ रहे हैं। कई संदिग्धों से पूछताछ भी की गई है। कुछ सहयोगी संगठन भी निशाने पर हैं।

सिमी पर प्रतिबंध के बाद उसके कई सक्रिय पदाधिकारी व सदस्य पीएफआइ से जुड़ गए थे। इसके बाद पीएफआइ ने वर्ष 2008 से अपना जाल बुनना शुरू किया था। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में शामली, बिजनौर व मुजफ्फरनगर में संगठन की जिला कार्य समिति गठित की गई थीं। पूर्वी उत्तर प्रदेश में लखनऊ व कानपुर में कार्य समिति बनाकर संगठन ने अपनी पैठ बढ़ानी शुरू की थी। खुफिया एजेंसियां इन गतिविधियों पर नजर तो रख रही थीं, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो सकी थी।

बाराबंकी, सीतापुर मुजफ्फरनगर में आपत्तिजनक पोस्टर चिपकाने के मामले में मुकदमा तो दर्ज कराया गया था, लेकिन इनके मंसूबे खुलकर सामने नहीं आ सके थे। मार्च, 2021 में एसटीएफ ने जब देश को दहलाने की साजिश के आरोप में लखनऊ से पीएफआइ के कमांडर अन्सद बदरुद्दीन व ट्रेनर फिरोज खान को गिरफ्तार किया, तब प्रदेश में इनके खतरनाक मंसूबे सामने आए।

इससे पूर्व एसटीएफ ने हाथरस कांड के बाद सांप्रदायिक हिंसा की साजिश के मामले में केरल से सीएफआइ के राष्ट्रीय महासचिव के.ए.रऊफ शरीफ को गिरफ्तार किया था। रऊफ पर दिल्ली में सीएए के विरोध में हिंसा फैलाने के लिए फंडिंग का आरोप है।

प्रतिबंध लगाने की सिफारिश

यूपी में पीएफआइ के खतरनाक मंसूबे खुलकर सामने आने के बाद वर्ष 2019 में तत्कालीन डीजीपी ओपी सिंह ने केंद्र सरकार से पीएफआइ पर प्रतिबंध लगाए जाने की सिफारिश की थी।

Edited By: Umesh Tiwari