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प्रश्नपत्र लीक करने और संगठित सॉल्वर गिरोह चलाने वालों को UP में नहीं मिलेगी सरकारी नौकरी, योगी आदित्यनाथ सरकार का फैसला

Published: Thu, 29 Oct 2026 07:17 PM (IST)

Person Involved in regime change through violence barred from govt jobs: सरकार के आदेश में साफ कहा गया है कि ...और पढ़ें

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ

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डिजिटल डेस्क, लखनऊ : योगी आदित्यनाथ सरकार ने एक बड़े फैसले के तहत 'हिंसा से सत्ता परिवर्तन' की मांग करने वालों के लिए सरकारी नौकरी के लिए दरवाजे बंद करने का फैसला लिया है। योगी आदित्यनाथ सरकार ने सरकारी नौकरी में सीधी भर्ती के लिए चयनित उम्मीदवारों के कैरेक्टर वैरिफिकेशन के नियमों को सख्त कर दिया है। विपक्षी कांग्रेस और सपा ने इस फैसले की आलोचना की है।

उत्तर प्रदेश सरकार ने सरकारी सेवाओं में सीधी भर्ती के लिए अभ्यर्थियों के चरित्र और पिछले रिकॉर्ड के सत्यापन संबंधी नियम सख्त कर दिए हैं जिसके तहत हिंसक तरीके से ‘समाज की विद्यमान व्यवस्था को बदलने’ का उद्देश्य रखने वाले संगठनों के सदस्यों को राज्य की सरकारी नौकरियों में शामिल होने से प्रतिबंधित कर दिया गया है। नियम राज्य सरकार के विभागों के अलावा उसके अधीन निगमों, परिषदों, शैक्षणिक संस्थानों, सार्वजनिक उपक्रमों और शहरी तथा ग्रामीण स्थानीय निकायों पर भी लागू होंगे।

28 अक्टूबर को इस संबंध में संशोधित दिशा-निर्देश जारी 

उत्तर प्रदेश सरकार के नए दिशा-निर्देशों के तहत हत्या, बलात्कार, आतंकवादी गतिविधियों, भ्रष्टाचार, प्रश्नपत्र लीक करने और संगठित सॉल्वर गिरोह चलाने जैसे गंभीर अपराधों में संलिप्त अभ्यर्थियों को सरकारी नौकरी के लिए अयोग्य ठहराने का प्रावधान किया गया है। प्रमुख सचिव (नियुक्ति एवं कार्मिक) एम. देवराज ने इलाहाबाद हाई कोर्ट के निर्देशों के अनुपालन में 28 अक्टूबर को इस संबंध में संशोधित दिशा-निर्देश जारी किए।

सरकार के आदेश के मुताबिक, ऐसे व्यक्ति जो किसी ऐसे संगठन के सदस्य हैं जिसका संकल्प और उद्देश्य हिंसक तरीके से समाज की विद्यमान व्यवस्था को बदलना है, वे सरकार के अधीन नियुक्ति के लिये अपात्र समझे जाएंगे। हालांकि, किसी विशेष राजनीतिक विचारधारा का समर्थक होना अपने आप में अयोग्यता का आधार नहीं होगा।

सरकार के आदेश में साफ कहा गया है कि ‘रिजीम चेंज' के लिए हिंसक गतिविधियों में शामिल व्यक्तियों को सरकारी नौकरी से प्रतिबंधित किया जा सकता है। सरकार ने साफ किया है कि यह सिर्फ राजनीतिक विचारधारा के आधार पर अयोग्य घोषित नहीं किया जाएगा और सिर्फ FIR दर्ज होने या जांच के लंबित होने पर भी आवेदक को अयोग्य नहीं घोषित किया जाएगा।

इलाहाबाद हाईकोर्ट के निर्देशों का पालन करते हुए डिपार्टमेंट ऑफ अपॉइंटमेंट एंड पर्सनल के प्रिंसिपल सेक्रेटरी एम.देवराज ने नई गाइडलाइन जारी की है। यह नई पॉलिसी राज्य के सरकारी विभागों, निगमों, परिषदों और स्थानीय निकायों में सीधी भर्ती के जरिए चुने गए उम्मीदवारों पर लागू होगी।

आदेश में और क्या कहा गया

सरकारी आदेश में कहा गया है कि जो व्यक्ति ऐसे संगठनों के सदस्य हैं, जिनका उद्देश्य हिंसक गतिविधियों के जरिए मौजूदा व्यवस्था को बदलना है, उन्हें सरकारी पदों पर नियुक्ति के लिए अयोग्य माना जाएगा। इसमें आगे कहा गया है कि किसी आवेदक के 21 साल के होने के बाद वेरिफिकेशन की तारीख से तीन साल पहले ऐसी किसी गतिविधियों में शामिल लेना इस बात का सबूत माना जाएगा कि वह व्यक्ति ऐसे कामों में एक्टिव है। इस दौरान अगर व्यक्ति के व्यवहार में परिवर्तन के ठोस सबूत मिलते हैं तो इस पर दोबारा विचार किया जा सकता है। सरकार ने अपने आदेश में साफ कहा कि केवल राजनीतिक विचारधारा के आधार पर किसी को सरकारी नौकरी के लिए नहीं रोका जा सकता।

सिर्फ FIR से अयोग्य घोषित नहीं होंगे उम्मीदवार

नई नीति के तहत सिर्फ FIR होने या फिर जांच लंबित होने की अवधि में उम्मीदवार को अयोग्य घोषित नहीं किया जा सकता। अगर किसी केस में उम्मीदवार बरी कर दिया गया है या जिन मामलों का निपटारा समझौते के माध्यम से किया गया है और जो मामले जुवेनाइल जस्टिस लॉ के तहत आते हैं, उनमें भी अपने आप उम्मीदवारों को अयोग्य घोषित नहीं किया जाएगा।

समाजवादी पार्टी ने बताया- ब्रिटिश युग की सोच

समाजवादी पार्टी ने इस आदेश को लेकर योगी सरकार पर निशाना साधा और कहा कि ये ब्रिटिश युग की मानसिकता है। समाजवादी पार्टी के प्रवक्ता आशुतोष वर्मा ने कहा कि यह तो एक कायर सरकार के नियम हैं। सत्ता परिवर्तन का क्या मतलब है। यह व्यवस्था में बदलाव नहीं, बल्कि सिर्फ सत्ता में बदलाव है। उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी केवल लोकतांत्रिक तरीकों, खासकर चुनावों के जरिए ही सरकार बदलने का समर्थन करती है, और सत्ता बदलने के किसी अन्य तरीके का समर्थन नहीं करती।

भाजपा की कोशिशों का कड़ा विरोध होगा

कांग्रेस प्रवक्ता सुरेंद्र राजपूत ने भी भाजपा की आलोचना करते हुए कहा कि युवाओं के शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शनों और धरनों को हिंसा की घटनाओं के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि युवा आंदोलनों को हिंसक बताने की भाजपा की कोशिशों का कड़ा विरोध होगा, न केवल उत्तर प्रदेश के युवाओं की ओर से, बल्कि पूरे देश के युवाओं की ओर से। राजपूत ने कहा, "अगर युवा विरोध प्रदर्शन करते हैं, तो यह हिंसा नहीं है। अगर वे धरना देते हैं, तो यह हिंसा नहीं है। अगर वे पेपर लीक के खिलाफ विरोध करते हैं, तो यह हिंसा नहीं है। उन्होंने चेतावनी दी कि ऐसे कदम उठाकर बीजेपी अपने ही ताबूत में एक और कील ठोंक रही है।

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